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Brijbhushan Sharan Singh: दाऊद इब्राहिम से कनेक्शन के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद थे बृजभूषण शरण सिंह, वाजपेयी ने पत्र लिखकर सावरकर को याद करने की दी थी सलाह, पढ़ें प्रोफाइल

Atal Bihari Vajpayee: 30 मई 1996 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जेल में बंद बृजभूषण शरण सिंह को पत्र लिखकर कहा था- मैं शीघ्र ही आऊंगा

Brijbhushan Sharan Singh: दाऊद इब्राहिम से कनेक्शन के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद थे बृजभूषण शरण सिंह, वाजपेयी ने पत्र लिखकर सावरकर को याद करने की दी थी सलाह, पढ़ें प्रोफाइल
बृजभूषण सिंह टाडा कानून के तहत तिहाड़ जेल में बंद थे। (फोटो क्रेडिट – Facebook/brijbhushansharan)

महिला कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद बृजभूषण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) पर कई लड़कियों के यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) का आरोप लगाया है। विनेश फोगाट एशियन गेम्स (Asian Games) और राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में भारत को कई पदक दिला चुकी हैं।

देश के सबसे हाई-प्रोफाइल एथलीटों के विरोध के बाद बृजभूषण सिंह ने भारतीय कुश्ती संघ (Wrestling Federation Of India) के अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (Indian Olympic Association) ने एक पैनल का गठन किया है। हालांकि इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

कौन हैं बृजभूषण शरण सिंह? (Who is Brij Bhushan Sharan Singh)

बृजभूषण सिंह उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। 65 वर्षीय बृजभूषण शरण सिंह कैसरगंज से भाजपा सांसद हैं। वह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हैं। फैजाबाद के साकेत विश्वविद्यालय से लॉ में ग्रेजुएट बृजभूषण का राजनीति में करियर 1980 के दशक में एक छात्र संघ नेता के रूप में शुरू हुआ था। वह छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए थे।

अपनी युवावस्था का अधिकांश समय उन्होंने अयोध्या के अखाड़ों में बिताया है। वह लगभग 10 वर्षों तक रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष और यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग-एशिया के उपाध्यक्ष रहे हैं।

वह पहली बार साल 1991 में भाजपा की टिकट पर गोंडा से लोकसभा सांसद बने थे। 1991 की जीत को मिलाकर वह अब तक छह बार (1999, 2004, 2009, 2014 और 2019) लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। कैसरगंज के अलावा वह गोंडा और बलरामपुर से भी सांसद रह चुके हैं।

जुलाई 2008 में सिंह ने सपा का दामन थाम लिया था। भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर विश्वास मत के दौरान उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का समर्थन किया। 2008 से वह सपा में थे और 2014 के लोकसभा चुनाव से कुछ माह पहले भाजपा में आए।

बृजभूषण सिंह अपनी हिंदुत्व की राजनीति को लेकर हमेशा मुखर रहे हैं। वह विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सक्रिय सदस्य थे। वह राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े थे। उनके 2019 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, सिंह का नाम बाबरी विध्वंस मामले में भी था।

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी समेत जो 40 लोगों में बृजभूषण सिंह का भी नाम था लेकिन साल 2020 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने सिंह समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

दाऊद इब्राहिम से कनेक्शन के आरोप

सिंतबर 1992 की बात है। तब मुंबई में दाऊद इब्राहिम का गैंग डी-कंपनी बहुत एक्टिव थी। अंडरवर्ल्ड एक सबसे खौफनाक रूप अपने चरम पर था। उन्हीं दिनों दाऊद के बहनोई इब्राहिम कासकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दाऊद इब्राहिम के गैंग डी-कंपनी को शक था कि यह हत्या अरुण गवली गैंग के शूटर्स ने की है। बताया जाता है कि बदला लेने के लिए डी-कंपनी के छोटा, राजन, छोटा शकील, सुभाष ठाकुर और अन्य ने मुंबई के जेजे हॉस्पिटल शूटआउट में गवली के शूटर्स शैलेश हालदनकर और विपिन की हत्या कर दी।

बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगा था कि उन्होंने डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों और गैंग के शूटर्स को अपने यहां शरण दी थी। यह आरोप केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने लगाया था। सिंह ने साल 1996 की शुरुआत में गोंडा में आत्मसमर्पण कर दिया था। अंडरवर्ल्ड के साथ जुड़े होने के आरोप की वजह से सिंह के खिलाफ टाडा के तहत मामला दर्ज किया गया। यह कानून उन लोगों पर लगाया जाता था, जिन पर आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने का संदेह हो। इसके बाद बृजभूषण शरण सिंह तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

जेल में आया अटल बिहारी वाजपेयी का पत्र

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेल में रहने के दौरान बृजभूषण शरण सिंह को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पत्र मिला था। 30 मई 1996 को लिखे पत्र में वाजपेयी ने लिखा था,

“प्रिय बृजभूषण जी, सप्रेम नमस्कार। आपका समाचार मिला। नए सिरे से जमनात का प्रयत्न करना होगा। आप हिम्मत रखें। अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे दिन तो निश्चित ही नहीं रहेंगे। आजन्म कैद की सजा काटने वाले सावरकर जी का स्मरण करें। पढ़ें। सुनें। खुश रहें। मैं शीघ्र ही आऊंगा।” इसके बाद वाजपेयी ने एक भजन की चंद पंक्तियां लिखकर अपनी पत्र को खत्म किया है।

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First published on: 21-01-2023 at 02:52:47 pm
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