सोमवार को लोकसभा बजट सत्र के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा एक अप्रकाशित पुस्तक के एक पत्रिका में प्रकाशित कथित अंश को लेकर हंगामा मच गया और सदन पूरे दिन के लिए स्थगित हो गया। राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलना था। राहुल गांधी प्रकाशित पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे के संस्मरण का जिक्र किया तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस पर आपत्ति जतायी।
विवाद होने पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि सदन में अप्रकाशित पुस्तक को उद्धृत नहीं किया जा सकता। न ही किसी पत्रिका में प्रकाशित सामग्री को प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकता। राजनाथ सिंह के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जतायी और कहा कि चर्चा का विषय राष्ट्रपति का अभिभाषण है, नेता विपक्ष को उसी पर बोलना चाहिए।
पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से राहुल गांधी डोकलाम टकराव केुू में चीनी सैनिकों के घुसपैठ का मुद्दा उठा रहे थे। इस पर राजनाथ सिंह और अमित शाह खड़े हो गए। इस दौरान राहुल गांधी के भाषण के दौरान 45 मिनट तक सदन में हंगामा हुआ और फिर सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
राहुल गांधी द्वारा नरवण के कथि संस्मरण का जिक्र करने पर रक्षा मंत्री राजनाथ ने उनसे पूछा, “आप जिस किताब की बात कर रहे हैं, वह प्रकाशित हुई है कि नहीं हुई है। ये किताब प्रकाशित नहीं हुई है। राजनाथ ने डोकलाम और चीनी घुसपैठ को लेकर राहुल गांधी के बयान शुरू होते उसकी तथ्य की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। इधर राहुल गांधी ने कहा, “यह किताब सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है।”
क्या है किताब का नाम?
दरअसल राहुल गांधी पूर्व सेनाध्यक्ष एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के एक पत्रिका में प्रकाशित कथित अंश के हवाले से बोल रहे थे। इस किताब को रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक अनुमति नहीं मिल सकी। इस किताब की छपने की अनुमति रक्षा मंत्रालय से 2024 में ही मांगी गई थी।
क्यों नहीं छप पा रही किताब?
इंडियन एक्सप्रेस को अक्टूबर 2025 में दिए अपने इंटरव्यू पूर्व सेनाध्यक्ष ने इसका जवाब दिया था। उन्होंने कहा, “मेरा काम किताब लिखना और उसे प्रकाशकों को देना था। प्रकाशकों को ही रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेनी थी। उन्होंने ही किताब उन्हें भेजी है, जो अभी समीक्षाधीन है। एक साल से अधिक समय से इसकी समीक्षा की जा रही है।”
आगे एमएम नरवणे ने कहा, “प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं, इसलिए इस मामले में आगे की कार्रवाई करना मेरा काम नहीं है। अब यह प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय के हाथ में हैं, लेकिन मुझे किताब लिखने में खुशी मिली, चाहे अच्छा हो या बुरा बसी यही बात है। रक्षा मंत्रालय जब चाहे तब अनुमति दे सकता है।”
2020 में हुआ था गलवान संघर्ष
जनरल एमएम नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक इंडियन आर्मी के सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। इसी दौरान 2020 में भारत-चीन संघर्ष (गलवान) की घटना घटित हुई थी। इस किताब में पूर्व सेनाध्यक्ष ने गलवान में 31 अगस्त 2020 की देर रात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया है, जो पूर्वी लद्दाख के रेचिन दर्रे में चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर की गई थी। किताब में यह भी दावा किया गया है एमएम नरवणे से राजनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाले से कहा, ‘जो उचित समझो व करो।’
इसके अलावा, किताब में जून 2022 में शुरू की गई अग्निपथ भर्ती योजना पर टिप्पणी की गई। एमएम. नरवणे ने किताब में खुलासा किया कि सेना ने अल्पकालिक भर्ती किए गए 75 फीसदी दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अंतिम मॉडल में चार साल बाद केवल 25 प्रतिशत को ही बनाए रखा गया। साथ ही सैनिकों के लिए 20,000 रुपये का प्रारंभिक वेतन अस्वीकार्य माना गया, जो बाद में बढ़ाकर 30,000 रुपये किया गया। उन्होंने इस योजना को लेकर सैन्य सलाह को नजरअंदाज करते हुए राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था। हालांकि सरकार ने इस दावे को गलत बताया था।
कब से लटकी हुई है यह किताब?
भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने जनवरी 2024 में इस किताब की समीक्षा शुरू की और प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस को प्रतियां या अंश किसी से साझा न करने का निर्देश दिया। तब से यह किताब अधर में लटकी हुई है और रक्षा मंत्रालय की अनुमति का इंतजार कर रही है।
हालांकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन जैसे वेबसाइटों पर अप्रैल-मई 2024 में ही प्रारंभिक लिस्टिंग हो गई थी, लेकिन मंत्रालय की रोक के बाद अमेजन ने प्री-ऑर्डर रद्द कर दिए गए। आगे पढ़िए ‘सरकार को घबराने की जरूरत नहीं, नरवणे की किताब पब्लिश होनी चाहिए’…रिटायर्ड मेजर जनरल बोले- कैलाश रेंज में हम चीन पर हावी थे
