scorecardresearch

नूपुर शर्मा विवाद के बाद भाजपा के भीतर बदल गया है बहुत कुछ, नेता का दावा- खाड़ी देशों के दबाव में नहीं हुई थी कार्रवाई, वजह कुछ और है, जानें इनसाइड स्टोरी

एक केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”सरकार को आठ साल हो गए हैं। आठ साल का विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, जनकल्याणकारी पहल, स्टार्टअप, निवेश और इन सबसे बढ़कर दो साल का कोविड प्रबंधन। सरकार लोगों का ध्यान इस तरह लाना चाहती है। लेकिन इस घटना ने सबका ध्यान भंग कर दिया। इससे सरकार द्वारा किए गए कामों और प्रयासों को भारी नुकसान पहुंचा है।”

नूपुर शर्मा विवाद के बाद भाजपा के भीतर बदल गया है बहुत कुछ, नेता का दावा- खाड़ी देशों के दबाव में नहीं हुई थी कार्रवाई, वजह कुछ और है, जानें इनसाइड स्टोरी
नूपुर शर्मा (Photo Credit – Twitter/@NupurSharmaBJP)

1 जून को रात 11 बजे से कुछ मिनट पहले एक वरिष्ठ भाजपा नेता को अपने एक वरिष्ठ सहयोगी का गुस्से से भरा कॉल आता है। कॉल करने वाले वरिष्ठ नेता ने कहा “इस नवीन जिंदल ने क्या ट्वीट किया है?” उस समय तक कॉल उठाने वाले नेता, जो मीडिया इकाई का हिस्सा हैं, उन्हें उस तूफान का अंदाजा नहीं था, जिससे पार्टी और सरकार दोनों हिलने वाली थी। वह कहते हैं ”मैंने फौरन जिंदल के ट्वीट्स देखें। मैं हैरान रह गया। वह कुछ समय से पैगंबर के बारे में ट्वीट कर रहा था और मुझे कोई जानकारी नहीं थी।”

छह दिन पहले भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के डिबेट शो में एक अन्य पैनलिस्ट को जवाब देते हुए पैगंबर के लिए अपमानजनक संदर्भ का इस्तेमाल किया था। जिंदल का ट्वीट और शर्मा की टिप्पणी दोनों सोशल मीडिया और न्यूज चैनल पर दिन भर चलने वाले हिंदुत्व के बहस के लिए सामान्य था। लेकिन जैसे ही वीकएंड शुरू हुआ और वीडियो क्लिप अंग्रेजी कैप्शन के साथ वायरल हुआ, खतरे की घंटी बजने लगी। अल्पसंख्यकों को गाली देना कई टीवी चैनलों के लिए सामान्य है लेकिन इस बार अपमान पैगंबर का हुआ था। सीमा रेखा का उल्लंघन हुआ था और यह इस्लामी दुनिया की नजर में आ गया था।

इसके बाद ‘बॉयकॉट इंडियन प्रोडक्ट्स’ जैसे हैशटैग और खाड़ी देशों के पब्लिक फिगर व इन्फ्लुएंसर्स के बयान आने शुरू हुए। 7.6 मिलियन प्रवासी, भारत आने वाला 37 बिलियन डॉलर विदेशी धन, एक कूटनीति जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध के इर्द-गिर्द घूमती है- यह सब अचानक दाव पर लग गया। 5 जून को पार्टी ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल को पार्टी से बर्खास्त कर दिया। खाड़ी देशों की प्रतिक्रियाओं का सामना कर रही सरकार ने बयान जारी कर कहा, ”हम सभी धर्मों का बराबर सम्मान करते हैं।” साथ ही यह भी कहा कि, ”सत्तारूढ़ दल के प्रवक्ताओं की टिप्पणी, किसी भी तरह से भारत सरकार के विचारों को प्रदर्शित नहीं करती है। वो फ्रिंज एलिमेंट्स के विचार हैं।”

कुछ देर के लिए संकट को कम कर दिया गया लेकिन शुक्रवार की नमाज के बाद झारखंड के रांची में गोली लगने से दो प्रदर्शनकारियों की मौत के साथ देश भर के एक दर्जन से अधिक शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। पार्टी के कई नेता स्वीकार करते हैं कि भले ही भाजपा पूरे देश में अपना विस्तार कर रही हो। 180 मिलियन सदस्यों के साथ ‘दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी’ हो। भारत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी पर शासन कर रही हो। लेकिन फिलहाल नई और अप्रत्याशित चुनौतियों से जूझ रही है।

भाजपा के भीतर इस बात को स्वीकार किया जा रहा है कि शर्मा और जिंदल की घटना ने पार्टी को ‘पथ से भटका दिया’ है। जैसा कि एक नेता ने कहा, “जब कोई पार्टी के कार्यक्रम को पटरी से उतारने की कोशिश करता है, तो चीजों को ठीक करना और वापस पटरी पर लाना हमारा कर्तव्य है।” ऐसे में सवाल उठता है कि भाजपा ने अपने लिए क्या रास्ता चुना है?

”यह बहुत स्पष्ट है: भाजपा विस्तार मोड में है। प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक पुनरुत्थान का कार्यभार संभाला है। राम मंदिर का निर्माण पटरी पर है, ज्ञानवापी और मथुरा के मुद्दों को अदालतों के माध्यम से सुलझाया जाएगा और हम समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ रहे हैं। इन सबके बीच पैगम्बर का अपमान करना आज भाजपा के कद के अनुकूल नहीं है। आप मुसलमानों को बेनकाब कर सकते हैं, आतंकवादी गतिविधियों की निंदा कर सकते हैं, लेकिन पैगंबर को अपमानित करना एक सीमा रेखा का उल्लंघन है। नूपुर और नवीन दोनों ने शिष्टता की सारी हदों को पार कर दिया।” भाजपा के एक मुख्यमंत्री ने कहा। यह सभी जानते हैं कि भाजपा के जिस “कद” का जिक्र नेता अपने बयान में कर रहे हैं, वो सीधे तौर पर प्रधानमंत्री से जुड़ा हुआ है।

केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी महासचिवों सहित कम से कम चार वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पार्टी नेताओं के साथ अपनी बातचीत में, मोदी ने अक्सर उनसे केंद्र सरकार के “विकास के एजेंडे” पर टिके रहने का आग्रह किया है। नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ही उन राज्यों को रोका जो स्कूली पाठ्यक्रम में गीता को शामिल करना चाहते थे। उन्होंने उनसे कहा कि ”ऐसा करने से एक पैंडोरा बॉक्स खुल जाएगा क्योंकि भगवद गीता पूरी तरह से हिंदू धर्मग्रंथ है।”

दरअसल अब यह मैसेज देने की कोशिश हो रही है कि प्रधानमंत्री सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं। राजद्रोह के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सरकार के बदले रुख को भी पीएम मोदी का ही कदम माना जा रहा है। सरकार के बदलते रुख का एक उदाहरण 12 मई का भाषण भी है। पीएम मोदी इस दिन चुनावी राज्य गुजरात में केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं के लाभार्थियों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि वह तीसरे कार्यकाल के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ”एक दिन, एक वरिष्ठ नेता मुझसे मिले। वह राजनीतिक रूप से हमारा विरोध करते हैं, लेकिन मैं उनका सम्मान करता हूं। वह कुछ मुद्दों पर खुश नहीं थे, इसलिए मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि देश ने आपको दो बार प्रधानमंत्री बनाया है, अब आपको और क्या चाहिए। उनका मानना था कि अगर कोई दो बार पीएम बनता है तो उसने सब कुछ हासिल कर लिया। उन्हें नहीं पता कि यह मोदी किसी और चीज से बना है। गुजरात की मिट्टी ने उसे आकार दिया है। यह काफी नहीं है कि मैं अब आराम कर लूं, ये सोचकर कि जो कुछ हुआ है वह अच्छा है। नहीं मेरा सपना संतृप्ति है। अपने लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करना है।”

एक चुनावी राज्य के लिए असामान्य रूप से पीएम के भाषण का फोकस कल्याणकारी योजानाओं पर रहा। इसलिए शर्मा और जिंदल के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश यह था कि पीएम मोदी के नैरेटिव को खराब नहीं करना है। एक केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”सरकार को आठ साल हो गए हैं। आठ साल का विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, जनकल्याणकारी पहल, स्टार्टअप, निवेश और इन सबसे बढ़कर दो साल का कोविड प्रबंधन। सरकार लोगों का ध्यान इस तरह लाना चाहती है। लेकिन इस घटना ने सबका ध्यान भंग कर दिया। इससे सरकार और शासन द्वारा किए गए कामों और प्रयासों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा है”

आरएसएस के कामकाज को नजदीक से जानने वाले एक भाजपा नेता ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल के खिलाफ हुई कार्रवाई का भाजपाई वर्जन बताया। उन्होंने कहा, ”उदारवादी जो सोचते हैं उसके विपरीत, यह राजनयिक दबाव नहीं था जिसने प्रधान मंत्री को प्रवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पार्टी को निर्देश दिया। बेशक, यह एक ऐसा मामला है जिसके बारे में सरकार और पार्टी चिंतित हैं क्योंकि हम उन देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध साझा करते हैं। लेकिन रिश्ता आपसी होता है, एकतरफा नहीं। कार्रवाई इसलिए भी हुई क्योंकि उनकी टिप्पणी आरएसएस और भाजपा के लिए नैतिक रूप से खिलाफ है। किसी भी ‘सच्चे’ भाजपा नेता या आरएसएस ने कभी भी पैगंबर या ईसा मसीह के खिलाफ अपमानजनक बयान नहीं दिया है। यह वह नहीं है जो हम मानते हैं।”

पढें विशेष (Jansattaspecial News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट