What is Pax Silica Initiative?: भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को राजधानी नई दिल्ली में पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन पर साइन किए। इस दौरान अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स जैकब हेलबर्ग ने कहा कि यह सिर्फ कागज पर लिखा एग्रीमेंट नहीं बल्कि साझा भविष्य के लिए एक रोड मैप है।
उन्होंने आगे कहा कि आज जब हम पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन पर साइन कर रहे हैं, हम हथियारों पर निर्भरता और ब्लैकमेल को न कहते हैं। हम साथ मिलकर कहते है कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है। जैकब हेलबर्ग ने यह भी कहा कि पैक्स सिलिका के जरिए हमारा यह ऐलान है कि भविष्य उन्हीं लोगों का होता है जो उसे बनाने का साहस रखते हैं। जब आजाद लोग मिलकर काम करते हैं तो वो खुद अपने प्रयासों से भविष्य बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर AI इनोवेशन को बढ़ावा देने वाला नजरिया अपना रहे हैं। हम एक ऐसी सप्लाई चेन बना रहे हैं जो समृद्धि की मजबूत नींव बनेगी। हम एक नई व्यवस्था तैयार कर रहे हैं, जिससे ज्ञान और तकनीक ज्यादा लोगों तक पहुंचे और एआई की बड़ी ताकत आम लोगों के हाथों तक पहुंचे।
अश्विनी वैष्णव बोले- सेमीकंडक्टर सिस्टम के लिए जरूरी है पैक्स सिलिका
इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया भारत पर विश्वास करती है। हमारे पास बहुत टैलेंट है और हमने अपनी विदेश नीति पर इस तरह से काम किया है कि दुनिया हम पर विश्वास करती है। इसी कारण आज पैक्स सिलिका पर साइन किए गए। यह हमारे देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, चिप डिजाइन के लिए बहुत जरूरी है।

उन्होंने आगे कहा कि इससे भारत की इलेक्ट्रोनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को फायदा होगा। भारत में दस प्लांट पहले ही लग चुके हैं और स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में हैं। बहुत जल्द भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर देगा। आज भारत में सबसे एडवांस टू-नैनोमीटर चिप्स डिजाइन किए जा रहे हैं। भारत में पूरा इकोसिस्टम बन रहा है, जिसके लिए पैक्स सिलिका बहुत जरूरी है। इससे भारत के युवाओं को फायदा होगा।
क्या है पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन?
अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, पैक्स सिलिका का मकसद फ्रेंडली और विश्वसनीय देशों को साथ लाकर यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण तकनीक सुरक्षित, भरोसेमंद और दुश्मनी वाले खेल से कंट्रोल न हो। इस पहल को दुनिया में मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर चीन के बढ़ते प्रभाव का जवाब माना जा रहा है।
इस पहल के जरिए संवेदनशील तकनीक और बनियादी ढांचे को ऐसे देशों के नियंत्रण से दूर रखना है, जिनको लेकर चिंता जताई जाती रही है। इसके तहत भरोसेमंद तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिसमें ICT सिस्टम, फाइबर-ऑप्टिक, डेटा सेंटर, आधारभूत AI मॉडल और उनके जुड़ी एप्लिकेशन शामिल होंगी। भारत को भी पहले से ही अपने महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर (खासकर दूरसंचार क्षेत्र में) चीन की भागीदारी को चिंता रही है।
पैक्स सिलिका की शुरुआत 12 दिसंबर 2025 को हुई थी। इसका मकसद ‘दबाव वाली निर्भरताओं को कम करना’ और एक ‘सुरक्षित, समृद्ध और इनोवेशन-आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन’ तैयार करना है। इसमें महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा संसाधनों से लेकर उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स तक पूरी व्यवस्था को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
इस पहल की शुरुआत में अमेरिका ने भारत को शामिल नहीं किया था। यह दुनिया भर के लिए चौंकाने वाला था। तब अमेरिका ने इसकी घोषणा करते हुए अपने ‘सहायक देशों’ के तौर पर जापान, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, यूके, इजरायल, यूएई और ऑस्ट्रेलिया का नाम लिया था। तब इस वजह से चिंता पैदा हुई कि ट्रेड डील को लेकर अनिश्चिता दोनों देशों में मतभेद का कारण है।
नए अमेरिकी राजदूत के आने से कम हुआ तनाव
ट्रेड डील को लेकर भारत-अमेरिका के बीत का तनाव दिल्ली में नए अमेरिकी राजदूत के आने पर काफी हद तक कम हुआ। इसके बाद दोनों देश ट्रेड डील की शर्तों को लेकर भी एकमत हुए। भारत का पैक्स सिलिका में शामिल होना AI और सेमीकंडक्टर जैसे नए तकनीकी क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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भारतीय सामानों को अमेरिकी बाजार में लाभ मिलेगा क्योंकि उन पर 18% शुल्क लगेगा, जबकि प्रतिस्पर्धी देशों जैसे चीन पर 35% तक शुल्क लगता है और अन्य देशों पर 19 प्रतिशत से अधिक शुल्क लागू है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
