राजनीति के गलियारों में इस हफ्ते कई दिलचस्प घटनाक्रम सामने आए। वसुंधरा राजे के बयान ने जहां सियासी हलचल तेज कर दी, वहीं केरल में कांग्रेस के सत्ता में आने के दावे ने नई चर्चा छेड़ दी। संसद में तंज और ठहाकों के बीच बहस चली, तो ममता बनर्जी के सामने बंगाल में चुनौतियां बढ़ती दिखीं। दूसरी ओर उमर अब्दुल्ला ने देशभक्ति का अलग संदेश दिया।

छलका दर्द

वसुंधरा राजे एक नए विवाद में फंस गई हैं। राजस्थान में भाजपा की सबसे कद्दावर मानी जाने वाली नेता अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रहीं और धौलपुर की महारानी के संबोधन से प्रसिद्ध वसुंधरा 2023 से पार्टी में लगातार हाशिये पर हैं। उन्हें तो पार्टी ने मुख्यमंत्री नहीं ही बनाया, छह बार के सांसद उनके बेटे दुष्यंत को भी केंद्र में मंत्री पद नहीं दिया। अलबत्ता वसुंधरा को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जरूर बना रखा है। यह पद उन्हें कभी भाया ही नहीं। दरअसल इसी हफ्ते झालावाड़ में एक सभा में वसुंधरा ने कहा कि छोटी-मोटी दिक्कतें तो होती रहेंगी, पर आप अपना प्यार बनाए रखना। मेरे साथ भी ऐसा हुआ। मैं तो अपने लिए भी कुछ नहीं कर पाई। मैंने अपना सब कुछ खो दिया। मैं तो खुद को बचा नहीं पाई। इसे उनके दर्द की अभिव्यक्ति और पार्टी में उपेक्षा बताया गया तो विपक्ष को मौका मिल गया। आम निष्कर्ष यही निकाला गया कि मुख्यमंत्री पद ना मिल पाने का यह असंतोष है। हालांकि उन्होंने सफाई भी दी कि उनके बयान का निहितार्थ गलत संदर्भ में निकाला गया। पत्रकारों ने राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ से वसुंधरा के बयान को लेकर सवाल किया तो राठौर बोले कि हर बार एक व्यक्ति ही मुख्यमंत्री नहीं बन सकता। फिर वसुंधरा को सलाह देने के मकसद से एक दोहा भी सुना दिया, ‘चिट्ठी चूर-चूर करे, मांगे दाल और घी, मोदी सु कुन झगड़ो करे, चिट्ठी खानी नाल।’

केरल पर कानाफूसी

केरल को लेकर कांग्रेस पार्टी को भरोसा है कि इस बार राज्य में सरकार उसी की बनेगी। राज्य की सभी 140 सीटों के लिए मतदान एक चरण में नौ अप्रैल को निपट गया था। प्रचार के दौरान कांग्रेस को बढ़त महसूस हुई थी। कहा जा रहा है कि सांसद केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री पद की हसरत पाल रखी है। हालांकि वे राष्ट्रीय स्तर पर संगठन का काम देख रहे हैं। राहुल गांधी के मुख्य सलाहकार भी हैं और पार्टी के महासचिव (संगठन) भी। वे केरल जाएंगे तो पार्टी की समस्याएं बढ़ जाएंगी। वैसे मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदारों में रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन की चर्चा हो रही है। अब कहा जा रहा है कि वेणुगोपाल को साथ रखकर राहुल 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। लिहाजा उनके केरल जाने से नया महासचिव (संगठन) खोजना होगा। वैसे, प्रियंका गांधी भी संभाल सकती हैं संगठन का काम।

सदन में ‘बच्चे’ पर तंज

नारी वंदन विधेयक को लेकर संसद में आरोप-प्रत्यारोप का दौर खूब चला। कई तंज भी किए गए तो पत्नी और कविता को लेकर खुशनुमा माहौल भी बना। अपनी खास शैली के तहत कांग्रेस के नेता अपना भाषण शुरू करने से पहले भूमिका बना रहे थे। भूमिका बनाते हुए उनके मुंह से निकला, जब मैं बच्चा था…। उनके इतना कहते ही भाजपा के एक नेता ने तपाक से कहा कि आप अभी भी बच्चे ही हैं। इस पर पूरा सदन ठहाके से गूंज गया। कांग्रेस नेता के ह्यबाल-मनह्ण पर सत्ता-पक्ष कटाक्ष करते रहता है। सांसद का ताजा तंज सदन में बार-बार आसन से आ रहे दिशा-निर्देश और आपत्तियों की ओर था। सांसद बार-बार निर्देश मिलने के बाद भी उसे नजरअंदाज कर रहे थे।

दीदी की चुनौती

बंगाल में दीदी यानी ममता बनर्जी को घेरने में इस बार भाजपा ने अपनी तरफ से तो कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। चुनाव के दौरान ही उनका चुनाव प्रबंधन करने वाली कंपनी आई-पैक के निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर प्रवर्तन निदेशालय ने ममता बनर्जी की मुश्किल और बढ़ा दी है। चुनाव पर इसका क्या असर होगा, कहा नहीं जा सकता, पर इससे इतना पता तो चलता ही है कि ममता के खिलाफ भाजपा की लड़ाई कैसी चल रही है। ममता ने पिछले दिनों एक चुनावी सभा में कहा भी था कि उन्हें केंद्र सरकार ही नहीं उसकी एजंसियों और चुनाव आयोग से भी लड़ना पड़ रहा है। इससे पहले ईडी ने आई-पैक पर इस साल आठ जनवरी को छापा मारा था। प्रशांत किशोर की बनाई कंपनी आई-पैक का जिम्मा इस समय चंदेल ही देख रहे थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को कोयला तस्करी से मिले काले धन को सफेद बनाया है। चुनाव प्रचार के बीच आई-पैक की पूरी टीम के तितर-बितर होने से ममता बनर्जी की चिंता तो बढ़ी होगी। उनके मुसलिम वोट बैंक को बिखेरने के लिए ओवैसी और हुमायूं कबीर जैसे नेता अलग सक्रिय हैं। चुनाव आयोग ने भी एसआइआर के दौरान बंगाल में बिहार से इतर तकनीकी विसंगति का पेच फंसाकर लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाकर ममता की नींद उड़ा दी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस बार उनकी चुनौती काफी मुश्किल बन चुकी है।

सजग देशभक्त

कभी जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं की देशभक्ति पर खूब सवाल उठाए जाते थे। किसी पर अलगाववादी होने के आरोप लगते थे तो किसी को पाकिस्तान परस्त बताया जाता था। यहां तक कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से भी कई अवसरों पर देशभक्ति के सबूत मांगने वालों की कमी नहीं रही। लेकिन बुधवार को सूबे के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान की अनोखी बानगी पेश कर संदेश दिया कि वे अपने देश और उसके राष्ट्रीय प्रतीकों से कितना प्रेम करते हैं। श्रीनगर के कश्मीर हाट में आयोजित एक कार्यक्रम ह्यअपने दस्तकारों को जानेंह्ण का उमर को फीता काटकर उद्घाटन करना था। लेकिन राष्ट्रध्वज तिरंगे जैसा फीता देख उमर ने कैंची रख दी। काटने के बजाय फीते को लपेटकर उद्घाटन कर दिया। फीता आयोजकों को थमाते हुए कहा कि यह तिरंगा है इसका निरादर नहीं देख सकता। जल्द ही उमर का यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोगों ने उनकी सजगता और सतर्कता को भी सराहा।