दिल्ली की कहानी… पुरानी दिल्ली का दरियागंज एक ऐसा इलाका है, जो लंबे समय से इतिहास और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। यह जगह समय के साथ कई बदलाव देख चुकी है और दिल्ली के बदलते रूप की कहानी भी बताती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस इलाके का नाम दरियागंज क्यों पड़ा। इस सीरीज में आपको बताते हैं कि इलाके का नाम दरियागंज कैसे पड़ा।

दरियागंज दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला तो दरिया यानी नदी और दूसरा गंज यानी बाजार। यह नाम मुगल बादशाह शाहजहां के दौर से जुड़ा है, जब 17वीं सदी में शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) की नींव रखी गई। उस समय यमुना नदी इस इलाके के बेहद करीब बहती थी और दरियागंज का क्षेत्र नदी के तट पर एक हलचल भरा व्यापारिक केंद्र था। यमुना के किनारे होने की वजह से इस जगह को ‘दरियागंज’ नाम मिला। आज भले ही नदी का रास्ता बदल गया हो, लेकिन यह नाम उस ऐतिहासिक जुड़ाव की याद दिलाता है।

शाहजहां ने शाहजहांबाद बसाया

17वीं सदी में जब मुगल बादशाह शाहजहां ने शाहजहांबाद बसाया (जो आज पुरानी दिल्ली कहलाती है), तब शहर की दीवारों के भीतर बाजार में कई और रिहाइशी इलाके बसाए गए। दरियागंज उसी समय विकसित हुआ। मुगल साम्राज्य काल के दौरान, कुलीन वर्ग और रईसों के महल दरियागंज में थे। कुछ उदाहरणों में झज्जर के नवाब की प्रसिद्ध उत्तर मुगल काल की कोठी और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के ससुर वलीदाद खान की हवेली शामिल हैं।

शाहजहानाबाद का दक्षिणी प्रवेश द्वार, दिल्ली गेट, सम्राट शाहजहां द्वारा 1638 में बनवाया गया था। यह बलुआ पत्थर की इमारत चारदीवारी वाले शहर को दिल्ली के ज्यादा आधुनिक इलाकों से जोड़ती थी और हाथियों की पत्थर की नक्काशी से सजी हुई थी। यह अब शहर के समृद्ध वास्तुशिल्प इतिहास की याद दिलाता है। 1803 के बाद, दिल्ली गैरीसन की एक देशी रेजिमेंट तैनात की गई थी। इसे बाद में रिज क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। अब दरियागंज के नाम से जाना जाने वाला यह क्षेत्र कभी ब्रिटिश दरियागंज कैंटोनमेंट का हिस्सा था, जो पुरानी दिल्ली में अंग्रेजों की सबसे शुरुआती बस्तियों में से एक थी।

दरियागंज किताबों की मार्केट के लिए फेमस

1947 के बाद, दरियागंज (विशेष रूप से अंसारी रोड ) भारत के प्रकाशन उद्योग का मुख्यालय बन गया, जहां ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस और एस. चंद एंड कंपनी जैसी दिग्गज कंपनियां स्थित थीं। दरियागंज अपने सदाबहार बाजारों के लिए भी मशहूर है। लगभग 1964 में स्थापित यह बाजार करीब 2 किलोमीटर तक फैला हुआ था और यहां लगभग हर विषय पर किताबें बहुत कम दामों में मिल जाती थी। हालांकि, ट्रैफिक समस्याओं का हवाला देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद, 2019 में इस बाजार को महिला हाट में ट्रांसफर कर दिया गया, जो दिल्ली गेट के पास मौजूद है।

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दिल्ली में कई ऐसे इलाके हैं जो टूरिस्ट और लोगों के लिए बहुत ही फेमस हैं। उनमें से एक है तीस हजारी इलाका। यहां एक बड़ी अदालत है, जिसे तीस हजारी कोर्ट कहा जाता है। लोग दिल्ली-एनसीआर में रहते हों या आते-जाते हों, शायद कभी न कभी यहां जरूर गए होंगे। अब सभी के मन में एक सवाल आता है कि आखिर इस इलाके का नाम तीस हजारी ही क्यों पड़ा। आइए जानते हैं इसके पीछे की रोचक दास्तां क्या है। पढ़ें पूरी खबर…