तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। 2024 के लोकसभा चुनावों में अलग-अलग लड़ने के बाद, 2026 के लिए BJP और AIADMK फिर से साथ आए हैं। NDA इस बार DMK गठबंधन के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है लेकिन क्या वह डीएमके गठबंधन को सत्ता से बाहर कर पाएगा, यह अभी भी एक कठिन सवाल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में चेन्नई के पास एक रैली के साथ एनडीए के तमिलनाडु चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा तमिलनाडु में चुनाव जीत जाने का दावा कर रहे हैं और आश्वासन दे रहे हैं कि NDA सरकार बनाएगा। यह प्रयास भारतीय जनता पार्टी के लिए एक तरह से दिशा बदलने जैसा प्रतीत होता है, जिसने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) से अलग होकर स्वतंत्र रूप से विकास करने का स्पष्ट लक्ष्य रखा था। देश के सभी प्रमुख राज्यों में से तमिलनाडु में एनडीए का प्रदर्शन सबसे खराब रहा और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सभी 39 संसदीय क्षेत्रों में जीत हासिल की। क्या एनडीए को इस साल होने वाले चुनावों में इस एकता का लाभ मिलेगा? आइए देखते हैं।
एआईएडीएमके का मजबूत कैडर और बीजेपी का बढ़ता ग्राफ
एआईएडीएमके का अपना मजबूत कैडर और बीजेपी का बढ़ता ग्राफ मिलकर डीएमके के ‘अजेय’ होने के नैरेटिव को चुनौती दे रहे हैं। EPS (पलानीस्वामी) ने दावा किया है कि यह गठबंधन 210 सीटें जीत सकता है। पीएमके, डीएमडीके और एएमएमके जैसे दलों के जुड़ने से एनडीए का वोट शेयर 35-40% के करीब पहुंच सकता है जो जीत के लिए जरूरी है। भाजपा और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए ने अपने आधार को मजबूत करने, अपनी पहुंच का विस्तार करने और एकता को प्रदर्शित करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं।
पढ़ें- डिप्टी सीएम के समर्थन में नारे लगाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भड़के सिद्धारमैया
दिसंबर 2025 में चेन्नई स्थित एआईएडीएमके मुख्यालय में एक निर्णायक पल आया, जब एआईएडीएमके के महासचिव के पलानीस्वामी और भाजपा के वरिष्ठ नेता पीयूष गोयल ने सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों को लेकर व्यापक चर्चा की। यह बैठक मात्र प्रतीकात्मक नहीं थी बल्कि इसने दिखाया कि नेतृत्व चुनाव के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। कभी विभाजित रहे बूथ स्तर के कार्यकर्ता भी अब चुनाव प्रचार में एक-दूसरे के साथ सहयोग कर रहे हैं और एकजुट मोर्चा पेश कर रहे हैं। पीएमके के औपचारिक रूप से गठबंधन में शामिल होने से एनडीए को और मजबूती मिली। 6 जनवरी, 2026 को सलेम में ईपीएस और भाजपा नेताओं के एकता प्रदर्शन ने विशेष रूप से उत्तरी तमिलनाडु में एक सशक्त संदेश दिया।
अमित शाह का तामिलनाडु दौरा
भाजपा का 2026 के चुनाव में आक्रामक रूप से लड़ने का इरादा कई बड़े नेताओं के दौरों से स्पष्ट हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जनवरी की शुरुआत में चेन्नई और त्रिची में किए गए रोड शो और समीक्षा बैठकों ने कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया और तमिलनाडु के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन भी हाल ही में तमिलनाडु गए थे। जनवरी में विभिन्न जिलों में आयोजित कई कार्यक्रमों में युवाओं और महिलाओं की भारी भागीदारी रही जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को उजागर करती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में भाजपा की सदस्यता पिछले एक वर्ष में लगभग दोगुनी हो गई है जो इसकी जमीनी स्तर पर विस्तार को दर्शाती हैं।
इस सबसे अलग आंकड़े क्या कहते हैं वो देखते हैं-
2024 के लोकसभा चुनावों में विधानसभा क्षेत्रों के रुझानों के अनुसार, जब एनडीए के घटक दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे, तब डीएमके+ गठबंधन ने 221 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई जबकि एआईएडीएमके, भाजपा और अन्य दलों को केवल 13 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली। वहीं, जब एनडीए के सभी घटक दलों ने जब एक साथ चुनाव लड़ा तो डीएमके+ की बढ़त घटकर 150 विधानसभा क्षेत्रों तक सिमट गयी और एआईएडीएमके, भाजपा और अन्य दलों की बढ़त बढ़कर 84 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंच गयी। (यह आंकड़े चुनाव आयोग (ECI) के स्रोत पर आधारित हैं)।
क्या कहते हैं 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के आंकड़े?
2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA-DMK) को 37.7 प्रतिशत वोट शेयर मिला और उसे कुल 56.84 प्रतिशत सीटें हासिल हुईं। वहीं, एनडीए में शामिल एआईएडीएमके को कुल 33.29 प्रतिशत वोट मिले और सीट शेयर 28.21 प्रतिशत तक रहा। कांग्रेस को कुल 4.27 प्रतिशत वोट शेयर मिला और उसे 7.69 प्रतिशत सीटें मिलीं। एनडीए की सहयोगी पीएमके को 3.8 प्रतिशत वोट मिले और सीट शेयर 2.14 प्रतिशत रहा।
भाजपा को राज्य स्तर पर 2.62 प्रतिशत वोट मिले और उसे 1.71 प्रतिशत सीटें मिलीं। सीपीएम को 0.85 प्रतिशत वोट शेयर और 0.85 प्रतिशत सीट शेयर मिला जबकि सीपीआई को 1.09 प्रतिशत वोट शेयर और 0.85 प्रतिशत सीटें प्राप्त हुईं। (ये आंकड़े TCPD-IED के स्रोत पर आधारित हैं)।
DMK गठबंधन की स्थिति
मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के नेतृत्व में DMK गठबंधन फिलहाल सबसे आगे माना जा रहा है लेकिन उसके सामने कुछ चुनौतियां हैं।
सत्ता विरोधी लहर: भ्रष्टाचार के आरोप और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेर रहा है।
गठबंधन में दरार: कांग्रेस द्वारा कैबिनेट में हिस्सेदारी की मांग और कुछ सीटों पर खींचतान से गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
एनडीए की बढ़ती एकजुटता के बिल्कुल विपरीत, डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में तनाव के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ गया है और ऐसी खबरें हैं कि डीएमके कांग्रेस को आवंटित 40 सीटों को घटाकर लगभग 25-30 कर सकती है। कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी व्यक्त करते हुए डीएमके पर उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। डीएमके नेताओं के एकदलीय शासन की अनिवार्यता पर दिए गए बयानों ने सहयोगियों को और भी नाराज कर दिया है। जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है कि युवाओं का समर्थन जिसे कभी डीएमके की ताकत माना जाता था, अब कमजोर होता दिख रहा है।
पढ़ें- राज्यपाल रवि vs सीएम स्टालिन: अभिभाषण पढ़ने से इनकार पर भड़के मुख्यमंत्री
क्या कहता है इंडिया टुडे-सी वोटर सर्वे?
इंडिया टुडे-सी वोटर के मूड ऑफ द नेशन सर्वे से संकेत मिलता है कि तमिलनाडु में इंडिया ब्लॉक का गढ़ बने रहने की संभावना है और अगर जनवरी 2026 में चुनाव होते हैं तो गठबंधन को राज्य की 39 लोकसभा सीटों में से 38 पर जीत हासिल करने का अनुमान है। जनवरी 2026 के चुनाव सर्वे के अनुसार, NDA को तमिलनाडु में केवल एक सीट मिलने की संभावना है जबकि अन्य पार्टियों के लिए कोई सीट जीतने का अनुमान नहीं है। इसके विपरीत, इंडिया ब्लॉक अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनावों में उसकी अनुमानित सीटों की संख्या 39 से घटकर अगस्त 2025 में 35-36 और अब जनवरी 2026 में 38 रह गई है।
अनुमानित वोट शेयर के आंकड़े भी इसी तरह का रुझान दर्शाते हैं। सर्वे के अनुसार, जनवरी 2026 में इंडिया ब्लॉक का अनुमानित वोट शेयर 45% रहने का अनुमान है, जो अगस्त 2025 के सर्वेक्षण के 48% से कम है। वहीं, NDA का वोट शेयर जनवरी 2026 के सर्वे में घटकर 33% रहने का अनुमान है जबकि अगस्त 2025 में यह 37% और 2024 के चुनावों में 41% था। अन्य दलों के वोट शेयर में लगातार बढ़ोत्तरी देखी गई है जो 2024 के लोकसभा चुनावों में 12% से बढ़कर अगस्त 2025 के सर्वे में 15% और जनवरी 2026 के सर्वे में 22% हो गया।
किसका नुकसान करेंगे अभिनेता विजय?
अभिनेता विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेट्ट्री कज़गम) इस चुनाव में ‘एक्स-फैक्टर’ साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि विजय 10-15% वोट काट सकते हैं। ऐसे में अगर विजय डीएमके के युवा वोटर्स में सेंध लगाते हैं तो इसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है।
NDA, DMK को सत्ता से बाहर कर सकता है अगर:
AIADMK और BJP के बीच वोटों का पूरी तरह ट्रांसफर हो। सत्ता विरोधी लहर इतनी तेज हो कि वह DMK के मजबूत संगठनात्मक ढांचे को हिला दे। TVK और NTK जैसे तीसरे पक्ष DMK के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाएं।
ऐसे में आंकड़ों को देखते हुए कहा जा सकता है कि वर्तमान में मुकाबला ‘कांटे की टक्कर’ का है और पलड़ा किसी भी तरफ झुक सकता है।
पढ़ें- तिरुपति प्रसाद विवाद: लड्डू में नहीं था गोमांस वाला घी, CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा
