3 फरवरी की दोपहर साहिल दिल्ली के द्वारका सेक्टर-11 की एक सड़क पर बाइक से जा रहा था। उसके आगे एक बस चल रही थी। उसने बस को ओवरटेक करने की कोशिश की, तभी सामने से तेज रफ्तार में आ रही स्कॉर्पियो ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और वो तीन टुकड़ों में बंट गई। साहिल की मौके पर ही मौत हो गई।

साहिल की मां ईना माकन का कहना है, “मेरी जिंदगी खत्म हो चुकी है। मेरे बेटे के सपने, जो कुछ ही दिनों में पूरे होने वाले थे, अब सब खत्म हो गया। साहिल का सपना विदेश में पढ़ाई करने का था, वो बाहर जाकर एमबीए करना चाहता था, अपने परिवार को संभालना चाहता था। मां-बेटे दोनों ने ये सपना देखा था, लेकिन उसके पूरा होने से पहले ही साहिल इस दुनिया से हमेशा के लिए चला गया।

साहिल की मौत के 11 दिन बाद मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से एक लेटर आया। उसमें लिखा था कि वो वहां एमबीए कोर्स के लिए चयनित हो गया है। लेटर तो आ गया, लेकिन उसे पढ़ने और अपने सपने को हकीकत में बदलने वाला साहिल अब इस दुनिया में नहीं था। ये कोई पहली घटना नहीं है। भारत में सड़क हादसों का इतिहास दर्दनाक और भयावह रहा है। नियम चाहे कितने भी सख्त बना दिए जाएं, सजा कितनी भी कड़ी कर दी जाए, लेकिन न तो लापरवाही से गाड़ी चलाने की प्रवृत्ति पूरी तरह खत्म हो पाती है और न ही नियमों का सख्ती दिखाई देती है। इसी वजह से सड़कें बदल जाती हैं, नाम बदल जाते हैं, लेकिन जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ती रहती है, परिवार ऐसे ही उजड़ते रहते हैं।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़े इस पूरे पैटर्न को लेकर भयावह तस्वीर पेश करते हैं। नीचे दी गई टेबल से पिछले पांच सालों के ट्रेंड को आसानी से समझा जा सकता है। भारत सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2019 और 2020 में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में कुछ कमी आई थी, लेकिन उसके बाद से लगातार ये संख्या बढ़ती गई है। 2022 में तो इस देश में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुईं और इजाफा 11.9 प्रतिशत का था। सरकार ने आखिरी बार 2023 में आंकड़ा जारी किया और तब भी हादसों में 4.2 फीसदी की बढ़त देखने को मिली।

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2019 से 2023 के दौरान हादसे के आंकड़े

अब भारत सरकार की परिभाषा कहती है कि अगर किसी सड़क दुर्घटना में एक से ज्यादा शख्स की मौत हो जाए तो भीषण सड़क हादसा कहा जाएगा। अंग्रेजी में इसके लिए शब्द इस्तेमाल हुआ है- Fatal Accident। नीचे दिए गए ग्राफ से समझा जा सकता है कि 2022 में जहां इस प्रकार के हादसे 155781 दर्ज किए गए थे, वहीं 2023 में वहीं आंकड़े बढ़कर 160509 पहुंच गए। दूसरे शब्दों में कहें तो सीधे-सीधे 3.04 फीसद का इजाफा हो गया।

सोर्स: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय

2023 को लेकर एक और चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। असल में मौतें सिर्फ सड़क पर हो रही हैं तो ऐसा नहीं है, यहां भी कुछ कैटेगरी देखने को मिलती हैं। उदाहरण के लिए देश के कुल सड़क नेटवर्क का लगभग 5% हिस्सा रखने वाले राजमार्गों पर कुल दुर्घटनाओं के 53% से अधिक और कुल मौतों के 59 फीसदी मामले दर्ज हैं। इसी तरह से नीचे दी गई टेबल से स्पष्ट होता है कि 2023 में कुल दुर्घटनाओं में से 31.2% और कुल मृतकों में से 36.5% मामले राष्ट्रीय राजमार्गों पर ही सामने आए थे।

सोर्स:सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय

अब हादसे में लोग मर रहे हैं, लेकिन किस तरह के ये हादसे हैं, इसे लेकर भी विश्वनीय डेटा उपलब्ध है। केंद्र सरकार के ही आंकड़े कई सालों का डेटा उपलब्ध करवाते हैं। अगर हस 2022 और 2023 के डेटा की तुलना करें तो इससे भी स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो जाती है। पीछे से टक्कर मारने वाले मामलों में सबसे ज्यादा मौतें देखने को मिली हैं। आंकड़े कहते हैं कि 2023 में पीछे से टक्कर मारने वाले हादसों में 20 फीसदी लोगों ने जान गंवाई है। इसी तरह हिट एंड रन मामलों में 18 फीसदी लोगों ने जान गंवाई है। आमने-सामने की टक्कर की बात करें तो 16 फीसदी लोगों ने ऐसे हादसों में जान गंवाई है। पीछे से टक्कर मारने वाले हादसों में सबसे ज्यादा 21 प्रतिशत लोग अपनी जान हाथ दो बैठे हैं। नीचे दी गई टेबल में सरल शब्दों में इस ट्रेंड को समझाया गया है-

टक्कर का प्रकार2022 हादसे2022 मौतें2022 घायल2023 हादसे2023 मौतें2023 घायल2023 में 2022 की तुलना में % बदलाव (हादसे)% बदलाव (मौतें)% बदलाव (घायल)
हिट एंड रन67,38730,48654,72668,78331,20954,5742.12.4-0.3
रुके हुए वाहन से टक्कर14,1396,01212,66613,8105,63612,575-2.3-6.3-0.7
पीछे से टक्कर98,66832,90795,2411,10,65636,8041,07,16112.111.812.5
साइड से टक्कर71,14620,35772,19073,80520,62374,0173.71.32.5
सड़क से नीचे गिरना (Run off Road)20,5909,86220,17021,52710,19620,7194.63.42.7
स्थिर वस्तु से टक्कर15,3687,30714,82917,4518,29116,41613.613.510.7
वाहन पलटना20,0709,82721,13818,9059,12421,216-5.8-7.20.4
आमने-सामने टक्कर77,88626,41383,58084,34828,98989,8678.39.47.5
अन्य76,05825,32068,82671,29822,10966,280-6.3-12.7-3.7
कुल4,61,3121,68,4914,43,3664,80,5831,72,8904,62,8254.22.64.4
सोर्स: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय

अब ये तो पता चल गया कि किन कारणों से सड़क हादसे हो रहे हैं, डेटा राज्यों को लेकर भी उपलब्ध है। नीचे दी गई टेबल से ये समझने की कोशिश करते हैं कि कौन से राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में कितने लोगों ने जान गंवाई है। ये आंकड़ा 2022 और 2023 का है जो भारत सरकार ने ही जारी किया है-

राज्य20232024
उत्तर प्रदेश23,65224,118
तमिलनाडु18,34718,449
महाराष्ट्र15,36615,715
मध्य प्रदेश13,79814,791
कर्नाटक12,32112,390
राजस्थान11,76211790
बिहार8,8739,347
आंध्र प्रदेश8,1378,346
तेलंगाना7,6607,949
ओडिशा5,7396,142
सोर्स: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय

भारत सरकार के आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश में सड़क हादसे किन कारणों से होते हैं। यदि वर्ष 2023 की बात करें, तो ओवरस्पीडिंग सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण रही। कुल हादसों में से 72.4 प्रतिशत और कुल मौतों में से 72.5 प्रतिशत मामले तेज रफ्तार की वजह से दर्ज किए गए। इसके अलावा शराब पीकर गाड़ी चलाना, रेड लाइट जंप करना और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना भी हादसों के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इन वजहों से भी बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं और मौतें हुईं। गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में वाहन चलाने के मामलों में भी इजाफा देखा गया।

यातायात नियम उल्लंघनहादसे (2022)मौतें (2022)हादसे (2023)मौतें (2023)% बदलाव (हादसे)% बदलाव (मौतें)
तेज रफ्तार (ओवर-स्पीडिंग)1,10,02745,9281,08,76845,774-1.1-0.3
% हिस्सा72.475.272.472.5
शराब/नशीले पदार्थ का सेवन कर ड्राइविंग3,2681,5032,6901,442-17.7-4.1
% हिस्सा2.22.51.82.3
गलत दिशा में वाहन चलाना7,3303,5447,5963,3583.6-5.2
% हिस्सा4.85.85.15.3
लाल बत्ती कूदना707271529229-25.2-15.5
% हिस्सा0.50.40.40.4
मोबाइल फोन का उपयोग2,4791,1322,2411,047-9.6-7.5
% हिस्सा1.61.91.51.7
अन्य28,1868,66028,35311,2620.630
% हिस्सा18.514.218.917.8
कुल (संपूर्ण भारत)1,51,99761,0381,50,17763,112-1.23.4
सोर्स: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय

अब ऊपर दिए गए इन आंकड़ों स्पष्ट हो जाता है कि देश में सड़क हादसों में विस्फोटक इजाफा हुआ है। इसमें सिस्टम की लापरवाही से लेकर लोगों की नियमों को लेकर बेरुखी तक शामिल है। साहिल धनेशरा भी ऐसी ही एक लापरवाही का शिकार हुआ है जहां बिना ड्राइविंग लाइसेंस के नाबालिग ने गाड़ी चलाई और मौत किसी और की।

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