Rahul Gandhi vs Modi Govt: संसद के बजट सत्र के पहले हिस्से में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खूब टकराव देखने को मिला। यह सत्र इसलिए भी खास रहा क्योंकि पहली बार ऐसा लगा कि विपक्ष मोदी सरकार पर हावी हो रहा है। सरकार के खिलाफ कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला और उनका आक्रामक रुख मोदी सरकार के लिए परेशानी बनता भी नजर आया, क्योंकि सरकार और बीजेपी अपने ही फैसलों को बदलती नजर आई।

दरअसल, बजट सत्र की शुरुआत तो आर्थिक सर्वे और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट पेश करने के साथ हो लेकिन राजनीतिक टकाराव इसके बाद शुरू हुआ। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्तवा पर चर्चा के दौरान बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर कई गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद जब नेता विपक्ष राहुल गांधी बोलने के लिए खड़े हुए तो राजनीतिक बवाल शुरू हो गया।

पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब से शुरू हुआ विवाद

तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस पर आरोप लगाए तो उनको जवाब देने के बहाने से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत पूर्व सेनाप्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny के कुछ हिस्से पढ़कर करनी चाही। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय संसदीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नियमों का हवाला दिया, जिसके चलते स्पीकर ने राहुल गांधी को किताब के हिस्से पढ़ने से रोक दिया।

राहुल गांधी किताब के अंश पढ़ने के लिए अड़ गए, जिसके चलते विवाद बढ़ता चला गया। राहुल गांधी अपने पूरे 45-50 मिनट किताब के अंश पढ़ने के लिए स्पीकर से मांग करते रहे लेकिन नियमों में बंधे स्पीकर भी नहीं मानें, तो नहीं माने। नतीजा ये धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी बोल ही नहीं पाए। इसके बाद कांग्रेस की तरफ से रणनीति बनाई गई और साफ कहा गया कि जब नेता विपक्ष को नहीं बोलने दिया गया तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी नहीं बोलने दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को लेकर बवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा में बोलना था, लेकिन वे अगले दिन राज्यसभा में बोले। उन्होंने राज्यसभा में कांग्रेस और समूचे विपक्ष पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। दूसरी ओर प्रधानमंत्री के लोकसभा में संबोधन न देने को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “बुधवार को सदन के कुछ सदस्यों ने ऐसा आचरण किया जो लोकसभा की स्थापना के बाद कभी नहीं हुआ। अध्यक्ष का गरिमामय पद संविधान में निहित है।”

उन्होंने कहा, ”ऐतिहासिक रूप से, राजनीतिक मतभेद कभी भी अध्यक्ष के कार्यालय तक नहीं लाए गए। अध्यक्ष के कार्यालय में विपक्षी सांसदों का व्यवहार उचित नहीं था। यह एक काला धब्बा था। सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए हम सभी को सहयोग करना चाहिए।” ओम बिरला ने कहा, “जब सदन के नेता प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देने वाले थे, तब मुझे विश्वसनीय जानकारी मिली कि कांग्रेस पार्टी के कई सदस्य प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंच सकते हैं और कुछ अप्रत्याशित घटनाएं कर सकते हैं। मैंने प्रधानमंत्री को अगले दिन न आने की सलाह दी थी।”

स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

दूसरी ओर जिस तरह से लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया था, उसके चलते स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के 7 सांसदों को सस्पेंड कर दिया था। इनमें कांग्रेस के मणिक्कम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजिला, हिबी ईडन, डीन कुरियकोज, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और सीपीएम के एस वेंकटेशन शामिल हैं।

इसको लेकर विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया। कांग्रेस का कहना यही रहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी को ओम बिरला ने पक्षपात करते हुए सदन में बोलने नहीं दिया गया। विपक्ष का कहना है कि जो किताब बिक रही है, उसके हिस्से सदन में क्यों नहीं पढ़ने नहीं दिए जा रहे।

इतना ही नहीं, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कई किताबों का उल्लेख करते हुए लोकसभा में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। अहम बात यह भी रही कि स्पीकर ओम बिरला उन्हें उनके इस व्यवहार के लिए रोक रहे थे। विपक्षी दलों का कहना है कि ओम बिरला सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के साथ भेदभाव करते हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाए राहुल गांधी जब किताब के पन्नों को पढ़ने के लिए खड़े हुए थे, तो स्पीकर ने उन्हें रोका और उनके माइक को बंद कर दिया।

दूसरी ओर निशिकांत दुबे जब बोल रहे थे और तो स्पीकर उन्हें रोक तो रहे थे, लेकिन उनका माइक बंद नहीं था। नतीजा ये राहुल गांधी की कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने की बात कह दी और उनके 118 सांसदों के हस्ताक्षर वाला रिमूवल मोशन पेश कर दिया। इसके जरिए सीधे तौर पर राहुल गांधी ने स्पीकर और मोदी सरकार को चुनौती दी है।

ट्रेड डील और एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा

राहुल गांधी जिस दिन लोकसभा में बोल नहीं पाए थे, उसी रात काफी वक्त से लंबित भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते का ऐलान हो गया। इसके बाद नरवणे की किताब को लेकर आक्रामक रहे राहुल गांधी ने ट्रेड डील पर भी मोदी सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया। कई दिनों के सत्ता पक्ष और विपक्ष के टकराव के बाद जब बजट पर सहमति बनी तो लोकसभा में बजट पर बोलने के लिए राहुल गांधी भी खड़े हुए। इसमें राहुल गांधी ने मार्शल आर्ट का जिक्र किया और आरोप लगाया कि अमेरिका ने बिजनेसमैन गौतम अडानी पर केस कर रखा है, और उन्हें बचाने के लिए भारत सरकार ने अमेरिका की शर्तों को मानते हुए ट्रेड डील कर ली।

राहुल गांधी ने आरोप यह तक लगाया कि मोदी सरकार ने देश को ही बेच दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार तेल खरीदने की पॉलिसी अमेरिका की शर्तों पर क्यों तय हो रही है। इसको लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब दिया लेकिन उनके जवाब से ज्यादा चर्चा राहुल गांधी के आरोपों की हो रही है।

एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा

बजट पर चर्चा के दौरान ही राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर एपस्टीन फाइल्स को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “हरदीप पुरी और अनिल अंबानी का नाम अमेरिकी न्याय विभाग की जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों में मौजूद हैं।” राहुल गांधी ने यह तर्क दिया कि हरदीप पुरी का नाम इस फाइल में होने के कारण ही प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए मजबूर होना पड़ा। इस मुद्दे पर हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि दो मीटिंग किसी के साथ होने से कोई गलती नहीं होती। तब मैं सरकार का हिस्सा भी नहीं था राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि वे राई का पहाड़ बना रहे हैं।

बैकफुट पर नजर आई सरकार

बजट सत्र के पहले हिस्से के दौरान लगातार मोदी सरकार पर राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाए। एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर बवाल के बीच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी की धाराओं में केस दर्ज किया। बीजेपी दावा कर रही है कि राहुल गांधी बेवजह का मुद्दा बना रहे हैं। बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी के आरोपों का सरकार की तरफ से जवाब भी दिया गया लेकिन चर्चा में राहुल गांधी ही रहे।

इतना ही नहीं, जब राहुल गांधी पर किरेन रिजिजू ने सदन के अंदर झूठ बोलने के आरोप लगाए तो उसके बाद मीडिया में बात करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि वे लोकसभा में राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी लाएंगे। शाम होते-होते ये कहा गया कि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव सरकार की तरफ से नहीं लाया जाएगा। इसके बाद यह नजर आया कि सरकार राहुल के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने में हिचक रही है लेकिन फिर अगले दिन ही बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में सब्सटेंसिव मोशन पेश किया।

क्या पिछड़ रही मोदी सरकार?

निशिकांत दुबे ने राहुल पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। दुबे ने राहुल की संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर लाइफटाइम बैन लगाने की मांग की है। इसके बाद किरेन रिजिजू की तरफ से कहा गया कि हम पहले विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की ही प्लानिंग कर रहे थे, लेकिन निशिकांत दुबे ने प्राइवेट मेंबर मोशन पेश कर दिया तो सरकार उसके तहत ही आगे कार्यवाही करेगी।

मतलब ये कि सरकार राहुल के खिलाफ किसी भी एक्शन में बैकफुट पर ही नजर आ रही है। राहुल के आरोपों को काउंटर किया जा रहा है लेकिन सरकार के जवाबों से ज्यादा चर्चा राहुल गांधी के सवालों की हैं, जिसके चलते पूरे संसद सत्र में राहुल गांधी ने देश की राजनीति का एजेंडा सेट किया। जो मोदी सरकार ऑफेंसिव कदमों के लिए जानी थी, वो पूरे संसद सत्र में डिफेंसिव ही नजर आई। इसके चलते ही सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या मोदी सरकार राहुल के खिलाफ सियासी टकराव में पिछड़ रही है? आंकड़े बोलते हैं: लोकसभा स्पीकर हो या सरकार, आजाद भारत ने कितने देखे अविश्वास प्रस्ताव