राजनीति में हर बड़ी हलचल मंच से नहीं, कई बार परदे के पीछे से शुरू होती है। कहीं एक अधिकारी की मुस्कान राजनीतिक विवाद का कारण बन जाती है, तो कहीं चुनाव लड़ने की महज अटकलें पूरे राज्य का सियासी तापमान बढ़ा देती हैं। कांग्रेस में राज्यसभा को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं, भाजपा केरल में अपनी रणनीति बदल रही है और सोशल मीडिया पर एक नेता के बेटे की शिकायत सुर्खियां बटोर रही है। सत्ता, रणनीति और संकेतों से भरे ऐसे ही पांच दिलचस्प राजनीतिक किस्से इस सप्ताह चर्चा के केंद्र में हैं।
हंसे तो फंसे
कालका में अवैध खनन को लेकर बैठक चल रही थी। बैठक में राज्यसभा के दो सांसद रेखा शर्मा और कार्तिकेय शर्मा थे। बैठक में में वहां की विधायक और एक केंद्रीय राज्य मंत्री भी मौजूद थे। एक छोटी सी बैठक में दो सांसद और एक मंत्री होने का तात्पर्य यही है कि यह क्षेत्र उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य के लिए उर्वर दिखता है। बैठक के दौरान रेखा शर्मा ने सहायक खनन अधिकारी से कहा कि खेड़ावाला में अवैध खनन हो रही है। अवैध खनन की बात सुन कर अधिकारी मुस्कुराने लगे। अधिकारी को लगा होगा कि शायद खनन करवाने वालों के बारे में सांसद महोदया को पता होगा। सवाल का जवाब देने के बजाय जब खनन अधिकारी मुस्कुराने लगे तो रेखा शर्मा खफा हो गईं।
रेखा शर्मा ने सवाल किया कि एक तो आपने जवाब नहीं दिया और दूसरे आप मुस्कुरा रहे हैं। इसके बावजूद अधिकारी ने जवाब देने के बजाय मुस्कुराना जारी रखा। अब कार्तिकेय शर्मा ने भी उनकी हंसी पर सवाल उठा दिए। अधिकारी को कहना पड़ गया कि वे हंस नहीं रहे, उनकी शक्ल ही ऐसी है। इस पूरी कवायद के दौरान मंत्री जी सब कुछ सहजता से देखते-सुनते रहे। जवाब के बजाय अधिकारी की मुस्कान से इतनी असहज स्थिति बनी कि अंतत: मौके पर ही उनके निलंबन के आदेश दे दिए गए। अधिकारी तो निलंबित हो गए लेकिन फंसने के बाद भी हंसते रहने के रहस्य को और गहरा कर गए।
लड़ेंगे पीके?
प्रशांत किशोर ने पटना का अपना घर छोड़ दिया और वे नव निर्माण आश्रम में चले गए हैं। अचानक उनके बांकीपुर सीट का उपचुनाव लड़ने की अटकलें शुरू हो गई हैं। बांकीपुर सीट भाजपा विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई है। पीके ने फिलहाल अपनी उम्मीदवारी की तो बात नहीं कही है, पर बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के पूरी ताकत से उपचुनाव लड़ने का एलान जरूर कर दिया है। पीके ने विधानसभा चुनाव के वक्त तेजस्वी के मुकाबले राघोपुर से खुद लड़ने की बात कही थी लेकिन फिर वे पीछे हट गए थे और चुनाव नहीं लड़ा था। बांकीपुर सीट 40 साल से भाजपा के कब्जे में है। संभावना है कि भाजपा यहां से किसी कायस्थ को ही उम्मीदवार बनाएगी। क्या प्रशांत चुनाव लड़ेंगे या चर्चा कराकर छोड़ देंगे? खुद तभी लड़ना चाहेंगे जब समूचा विपक्ष समर्थन दे। लेकिन तेजस्वी के समर्थन की संभावना कम लगती है।
दिग्गी नहीं तो कौन?
कांग्रेस को मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट मिलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दो बार से राज्यसभा जा रहे हैं। इस बार उन्होंने कहा है कि वे राज्यसभा नहीं जाएंगे। चर्चा तो यह भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजर भी राज्यसभा सीट पर है। इस बीच कांग्रेस के एक नेता प्रदीप अहिरवार ने कह दिया कि कांग्रेस को चाहिए कि वह किसी दलित को राज्यसभा भेजे। माना जा रहा है कि कांग्रेस के ही बड़े नेता इस तरह की बातें चलवा रहे हैं क्योंकि उनको मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का रास्ता रोकना है। दिग्विजय सिंह खुद नहीं जा रहे हैं तो किसी दलित को भेजा जाए यह धारणा अगर बनती है तो कमलनाथ और जीतू पटवारी दोनों का रास्ता रुक सकता है।
वाम पर वार
भाजपा को लगता है कि जब तक केरलम में वाम मोर्चे का वजूद रहेगा वह तीसरे नंबर की पार्टी ही बनी रहेगी। केरलम विधानसभा में उसे तीन सीटें मिली हैं। लोकसभा की एक सीट भी उसने 2024 में जीती थी। विजेता सुरेश गोपी को पार्टी ने केंद्र में मंत्री बना रखा है। पश्चिम बंगाल में भाजपा तभी सत्ता में आ पाई जब कांग्रेस और वाम मोर्चा कमजोर हो गए। यह भाजपा के लिए एक रणीतिक सबक है।पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ही पार्टी ने अब आपरेशन केरलम शुरू कर दिया है। त्रिकोणीय लड़ाई में पिछले दो चुनाव में भाजपा ने देख लिया कि उसका वोट 12 फीसद से आगे नहीं बढ़ा। पार्टी जानती है कि राज्य में हिंदू मतदाता 55 फीसद हैं, पर ज्यादातर माकपा के असर में हैं। लिहाजा सोच-समझ कर आपरेशन केरलम के तहत माकपा को निशाना बनाया गया है। दो बार मुख्यमंत्री रह चुके माकपा के सबसे कद्दावर नेता पी विजयन के यहां प्रवर्तन निदेशालय के छापों से पार्टी की रणनीति का संकेत मिलता है। मामला उनकी बेटी की कंपनी से जुड़ा है। विजयन पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी बेटी वीणा के पति को अपनी सरकार में मंत्री बनाया था। फिर वीणा की कंपनी को बिना काम भुगतान का आरोप लगा था। भ्रष्टाचार और वंशवाद के आरोप में वाम मोर्चा अगर कमजोर होगा तो भाजपा के लिए जगह बनेगी। हिंदू वोट अगर वाम से टूटकर भाजपा के साथ आए तो भाजपा कांग्रेस के साथ सीधे मुकाबले में आ जाएगी।
एक प्यारी शिकायत
सोशल मीडिया पर भाजपा के एक बड़े नेता की शिकायत खूब वायरल हो रही है। शिकायत प्रधानमंत्री से की गई है और करने वाला भाजपा नेता का बेटा ही है। ‘एक्स’ पर की गई शिकायत वायरल हो गई है। ये नेता हैं राजस्थान प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया, जो विधायक भी रहे हैं। विधानसभा का पिछला चुनाव पूनिया हार गए थे। इस समय वे हरियाणा भाजपा के प्रभारी हैं। शिकायत उनके बेटे महीप पूनिया ने की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा वर्ग से अपील की थी कि जब भी समय मिले, अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य प्रियजनों को फोन करके उनका हालचाल पूछें। उन्हें पर्याप्त पानी पीने, दोपहर की तेज धूप में बाहर न निकलने और जितना हो सके आराम करने की सलाह दें। पूनिया के बेटे महीप ने तुरंत अपने पिता की एक तस्वीर पोस्ट कर दी, जिसमें वे तेज धूप और भीषण गर्मी के बीच पार्टी के काम में व्यस्त दिख रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी को टैग करते हुए महीप ने शिकायत भरे अंदाज में लिखा-सर, मेरे पिता आपकी बात नहीं मान रहे हैं। वे हरियाणा भाजपा की बैठक ले रहे हैं, आप उन्हें समझाइए।
