विदेशी टैक्स हेवन में छिपाई गई अघोषित संपत्तियों पर आयकर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes-CBDT) ने पहली बार Panama Papers, Paradise Papers और Pandora Papers से जुड़े मामलों में कुल 14,601 करोड़ रुपये की रकम को ‘टैक्स के दायरे में’ लाया है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में इन ऑफशोर संपत्तियों का खुलासा किया था।

CBDT ने एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी है कि 2021 में पैंडोरा पेपर्स (Pandora Papers) के पब्लिश होने के बाद 686 करोड़ रुपये की राशि भी ‘टैक्स के दायरे’ में लाई गई है।

इन्वेस्टिगेशन में क्या खुलासा हुआ था?

आपको बता दें कि पनामा पेपर्स, पैराडाइज पेपर्स और पैंडोरा पेपर्स इन्वेस्टिगेशन को क्रमशः 2016, 2017 और 2021 में पब्लिश किया गया था। इंडियन एक्सप्रेस ने इंटरनेसनल कॉन्जोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (ICIJ) और दुनिया भर के मीडिया पार्टनर्स के साथ मिलकर कई सालों तक यह इन्वेस्टिगेशन की।

पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने विदेशी संपत्तियों की जांच के जरिए पता चले ‘अघोषित टैक्स(undisclosed tax detected)’ के आंकड़े जारी किए थे। लेकिन अब 30 जनवरी 2026 को The Indian Express को दिए आरटीआई के जवाब में ‘टैक्स के दायरे में लाई गई अघोषित निवेश राशि’ का भी खुलासा किया गया है।

‘टैक्स के दायरे में लाए गए’ आंकड़े तब तय किए गए जब हर एक टैक्स मामले की जांच (असेसमेंट) पूरी हो गई, संबंधित टैक्सपेयर्स को नोटिस भेजे गए और उनके जवाब मिल गए। इसलिए यह केवल अघोषित राशि का अनुमान नहीं है बल्कि भारतीय कर कानूनों के तहत कार्रवाई, जुर्माना और अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की दिशा में एक कदम है। हालांकि, ये आंकड़े अभी उन फाइनल टैक्स रकम को नहीं दिखाते जो विदेशी संपत्तियों का पता चलने के बाद वास्तव में वसूल की गई हैं।

CBDT के जवाब के अनुसार:
पनामा पेपर्स (Panama Papers) में 13,800 करोड़ रुपये टैक्स के दायरे में लाए गए।

पैराडाइस पेपर्स (Paradise Papers) में 115 करोड़ रुपये।

पैंडोरा पेपर्स (Pandora Papers) में 686 करोड़ रुपये।

इससे पहले CBDT ने आरटीआई के जवाब में बताया था कि इन तीनों ग्लोबल ऑफशोर इन्वेस्टिगेशन में कुल 1255 टैक्स मामले दर्ज हुए। इनमें 426 पनामा पेपर्स में, 494 पैराडाइस पेपर्स और 335 पैंडोरा पेपर्स में फाइल किए गए।

पैंडोरा पेपर्स की जांच में 14 ऑफशोर सर्विस प्रोवाइडर्स के 1.19 करोड़ (11.9 मिलियन) सीक्रेट दस्तावेजों की जांच की गई। इन दस्तावेजों में 29,000 ऑफशोर कंपनियों के मालिकों की जानकारी थी जिन्हें अमीर लोग टैक्स बचाने के लिए टैक्स हेवन के रूप में इस्तेमाल करते थे।

यह डेटा International Consortium of Investigative Journalists (ICIJ) को मिला था जिसने इसे 150 मीडिया पार्टनर्स के साथ शेयर किया जिनमें The Indian Express भी शामिल था।

इसके तुरंत बाद सरकार ने पैंडोरा पेपर्स की जांच की निगरानी के लिए एक मल्टी एजेंसी ग्रुप (Multi Agency Group) बनाने की घोषणा की।

वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (Financial Intelligence Unit) ने भी पैंडोरा पेपर्स में नामित 482 लोगों से जुड़ी जानकारी विदेशी ज्यूरिस्डिक्शन से मांगी है।

अपने लेटेस्ट आरटीआई जवाब में CBDT ने बताया कि पैंडोरा पेपर्स मामले पर मल्टी एजेंसी ग्रुप सात बैठक कर चुका है। हालांकि, CBDT ने इन बैठकों की डिटेल साझा नहीं की। उसने कहा कि यह जानकारी ‘गोपनीय है (confidential in nature)… और इसका खुलासा करने से जांच, अपराधियों की गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है।”