ईरान-इजरायल की जंग पिछले 18 दिनों से जारी है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध में अमेरिका ने अब तक 12 बिलियन डॉलर खर्च कर डाले हैं। भारतीय रुपयों में यह आंकड़ा लगभग 1 लाख करोड़ के आसपास बैठता है। अब अमेरिका के पास पैसों की कोई कमी नहीं है, वो दुनिया की सुपरपावर है। राष्ट्रपति ट्रंप भी ऐसे ही दावे युद्ध के बीच लगातार कर रहे हैं। लेकिन जितने रुपये अमेरिका ने इस युद्ध पर लगा दिए हैं, कभी सोचा है उतने रुपयों में क्या-क्या काम हो सकता था?
भारत में बन जाएं कितने एक्सप्रेसवे
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: भारत सरकार इस समय कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इनमें सबसे प्रमुख है दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात होते हुए महाराष्ट्र तक जाएगा। करीब 800-875 किमी हिस्सा चालू भी हो चुका है, दिल्ली-दौसा, राजस्थान, एमपी के कुछ हिस्सों पर गाड़ियां भी चल रही हैं। इस परियोजना की लागत लगभग 1 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। सरकार के अनुसार, यह भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है जिसकी कुल लंबाई करीब 1,350 किलोमीटर है।
दिलचस्प बात यह है कि जितने खर्च में यह एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो रहा है, उससे ज्यादा रकम अमेरिका ने महज 18 दिनों में ईरान युद्ध पर खर्च कर दी है।
गंगा एक्सप्रेसवे: उत्तर प्रदेश में भी इस समय एक बड़ा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट तेजी से बन रहा है, जिसका नाम गंगा एक्सप्रेसवे है। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाएगा। इस परियोजना की लागत करीब 40,000 करोड़ रुपये है। यानी जितनी रकम अमेरिका ने युद्ध पर खर्च की, उतने में भारत कम से कम दो गंगा एक्सप्रेसवे बना सकता है।
चेन्नई-सूरत एक्सप्रेसवे: भारत सरकार सूरत–नासिक–चेन्नई कॉरिडोर पर भी काम कर रही है। शुरुआत में यह एक्सप्रेसवे सीधे सूरत से चेन्नई तक प्रस्तावित था, लेकिन जमीन अधिग्रहण की चुनौतियों को देखते हुए इसके कुछ हिस्सों में बदलाव किया गया है। इस परियोजना पर करीब 50,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यानी अमेरिका ने ईरान युद्ध पर जितनी राशि खर्च की, उतने में भारत ऐसे दो बड़े एक्सप्रेसवे तैयार कर सकता है।
भारत कितने एलपीजी सिलेंडर दे सकता है?
वर्तमान में भारत में एक 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग एक हजार रुपये चल रही है। इसका मतलब है अमेरिका ने अब तक जो एक लाख करोड़ के करीब ईरान युद्ध पर खर्च किए हैं, इतने रुपये में भारत सरकार कम से कम 100 करोड़ एलपीजी सिलेंडर अपने लोगों के लिए उपलब्ध करवा सकती है। भारत सरकार का एक और डेटा कहता है कि 2025 तक भारत में एलपीजी के 33 करोड़ उपभोक्ता हैं। यानी कि एक लाख करोड़ में तो भारत के 33 करोड़ उपभोक्ताओं को करीब 3 सिलेंडर फ्री दिए जा सकते हैं।
| # | परियोजना / मद | राशि (₹ Cr) | देश | युद्ध खर्च % | समतुल्य |
|---|---|---|---|---|---|
| — | US Iran युद्ध खर्च | ₹1,00,000 | अमेरिका | 100% | 18 दिन · $12B |
| 1 | दिल्ली–मुंबई Expressway | ₹1,00,000 | भारत | 100% | 1,350 km हाईवे |
| 2 | LPG सिलेंडर | ₹1,00,000 | भारत | 100% | 100 Cr सिलेंडर |
| 3 | चेन्नई–सूरत Expressway | ₹50,000 | भारत | 50% | ऐसे 2 बन सकते |
| 4 | नमामि गंगे | ₹42,500 | भारत | 42.5% | 2+ बार परियोजना |
| 5 | गंगा Expressway | ₹40,000 | भारत | 40% | मेरठ–प्रयागराज · 2× |
| 6 | Pakistan — कुपोषित आबादी | ₹1,00,000 | पाकिस्तान | 100% | 57 माह · 4.2 Cr लोग |
दो बार शुरू हो जाए नमामि गंगे प्रोजेक्ट
मोदी सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गंगा को साफ करने के लिए 42,500 करोड़ का बजट रखा है। साल 2014 में 20 हजार करोड़ के साथ इस परियोजना की शुरुआत हुई थी। अब इस प्रोजेक्ट को मार्च 2026 तक एक्सटेंड किया गया। बजट में 22,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए। इस लिहाज से देखें तो अमेरिका ने 18 दिनों में जितना खर्च कर दिया है, उतने में भारत आराम से दो से ज्यादा ‘नमामि गंगे’ जैसी बड़ी परियोजनाएं चला सकता है। बड़ी बात यह है कि भारत सरकार तो 12 साल से इस योजना पर काम कर रही है, वहीं उससे ज्यादा अमेरिका ने 18 दिनों में ईरान युद्ध में खर्च कर दिया है।
पाकिस्तान को मिल जाएगा कितना अनाज?
पाकिस्तान इस समय महंगाई की मार झेल रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वहां चक्की का आटा 130–145 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो और गेहूं 75–110 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है। वहीं 10 किलो आटे के एक बैग की कीमत 890 से 1500 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच चुकी है। चावल की कीमत भी तेजी देखने को मिल रही है, रेट बढ़कर 180–340 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो तक हो गया है।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान की 16.5% आबादी कुपोषण का शिकार है। देश की कुल आबादी करीब 25.5 करोड़ है, यानी लगभग 4.2 करोड़ लोग कुपोषित हैं। अगर इन 4.2 करोड़ लोगों को हर महीने औसतन 10 किलो आटा भी दिया जाए, तो कुल जरूरत 42 करोड़ किलो प्रति महीने की होगी। (FAO के मुताबिक विकासशील देशों में प्रति व्यक्ति सालाना अनाज खपत लगभग 173 किलो होती है)
अब अगर अमेरिका द्वारा ईरान युद्ध पर खर्च किए गए करीब एक लाख करोड़ पाकिस्तान को मिल जाएं, तो औसत ₹41.5 (130–145 PKR) प्रति किलो के हिसाब से यह राशि लगभग 2,400 करोड़ किलो आटा उपलब्ध करा सकती है। इसका अर्थ है कि पाकिस्तान अपनी 4.2 करोड़ कुपोषित आबादी को करीब 57 महीने या फिर 4.5 से 5 साल तक आटा उपलब्ध करा सकता है।
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