लोकसभा अध्यक्ष या कहें स्पीकर के खिलाफ विपक्ष कांग्रेस की अगुवाई में मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। विपक्ष ने यह फैसला राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने की इजाजत नहीं देने और कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ सदन में अनुचित स्थिति पैदा करने के आरोपों पर लिया गया है।

पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि सोमवार शाम तक प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर 102 सांसदों ने साइन किए हैं, हालांकि विपक्ष के एक प्रमुख दल टीएमसी के सदस्यों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। विपक्षी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कांग्रेस, सपा, डीएमके और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने नोटिस पर साइन किए हैं। सूत्रों ने बताया कि यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को सौंपा जा सकता है।

क्यों लाया जा रहा यह प्रस्ताव?

नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने, BJP सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लोकसभा में की गई टिप्पणियों को लेकर उन पर कार्रवाई न करने और कांग्रेस की महिला सांसदों पर बिना सबूत के आरोप लगाये जाने के मामले में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव के लिए नोटिस देने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस नोटिस पर अधिक से अधिक विपक्षी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर लेने का प्रयास किया जा रहा है।

सूत्रों ने बताया कि सोमवार सुबह संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में विपक्ष के कई दलों ने इस बारे में विचार किया है और मंगलवार को यह प्रस्ताव सदन के पटल में रखा जा सकता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के क्या नियम है, साथ ही पूर्व में क्या अध्यक्ष या कहें स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आए हैं?

स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के क्या नियम है?

भारतीय संविधान के आर्टिकल 94 C में इसे लेकर जिक्र है। साथ ही लोकसभा के नियमों, परंपराओं में इसका जवाब दिया गया। इस रिमूवल मोशल या स्पीकर (अध्यक्ष) को पद से हटाने का प्रस्ताव कहा गया।

संविधान के आर्टिकल 94 सी के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर एक रेजुलेशन (संकल्प) द्वारा लोकसभा के बहुमत से पारित होने पर पद से हटाए जा सकते हैं। अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा का सक्रिय सदस्य ही ला सकता है। प्रस्ताव के नोटिस की प्रक्रिया और चर्चा का समय लोकसभा के नियमों में बताया गया है। नोटिस की अवधि 14 दिन की होती है और नोटिस केलिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए।

प्रस्ताव कैसे दिया जाता है?

अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा सदस्य पहले लोकसभा के सचिव-सामान्य (Secretary General) को लिखित सूचना देता है। इस पत्र में स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव स्पष्ट लिखा जाता है। फिर जब यह प्रस्ताव सदन में रखा जाता है तो नोटिस में लाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन होना चाहिए, अगर इससे कम सदस्यों का समर्थन होता है तो वह प्रस्ताव रद्द हो जाता है।

प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद क्या होता है?

स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद लोकसभा का उप-सभापति (Deputy Speaker) सदन की अध्यक्षता करता है। कारण है कि स्पीकर खुद अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। इसके बाद इस प्रस्ताव पर सदन में चर्चा होती है, फिर सदस्यों के बहुमत से इस पर फैसला लिया जाता है। प्रस्ताव पास होने के लिए कुल सदस्यों के बहुमत से पास होना जरूरी है, इसे पास करने के लिए 50 फीसदी से अधिक सदस्यों के हामी भरने की जरूरत होती है। अब सवाल आता है कि अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो क्या?

प्रस्ताव पास होने के बाद क्या?

अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो स्पीकर (अध्यक्ष) तुरंत पद से हट जाते हैं और फिर नए स्पीकर चुने जाने तक उप-सभापति कार्यभार संभालते हैं। इसके बाद नए स्पीकर का चुनाव होता है।

क्या इसे महाभियोग कहना सही है?

इस प्रक्रिया को महाभियोग (Impeachment) नहीं कहा जा सकता, बल्कि इसे निष्कासन प्रस्ताव (Removal Motion) कहा जाता है। साथ ही यह भी अहम है कि स्पीकर को हटाने का अधिकार सिर्फ लोकसभा को है, यहां तक की स्पीकर को राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री भी नहीं हटा सकते।

क्या कहती है लोकसभा की नियमावली?

इसके अतिरिक्त अध्यक्ष को हटाने के लिए लोकसभा नियमावली में नियमों का जिक्र किया गया है, इसके लिए नियमावली में नियम नंबर 179 से 184 तक बताए गए हैं।

  1. नोटिस देने के लिए 179 में लिखा गया है कि किसी भी सदस्य को स्पीकर को हटाने के लिए 14 दिन का लिखित नोटिस देना होता है। प्रस्ताव में साफ लिखा होना चाहिए कि सदन स्पीकर को उनके कार्यालय से हटाना चाहता है।
  2. नियम 180 में अनुमति लेना अहम है। नोटिस मिलने के बाद सदन से अनुमति ली जाती है, इसके लिए मोशन फॉर लीव सदन में पेश होता है और कम से कम 50 सदस्य खड़े होकर इसका समर्थन करें तभी यह आगे बढ़ेगा।
  3. नियम 181 में प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय होती है और यह तारीख 14 दिन की अनिवार्य अवधि पूरी होने के बाद ही हो सकती है।
  4. नियम 182 में लिखा है कि जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा होती है तो स्पीकर अध्यक्षता नहीं करेंगे बल्कि उनकी जगह उपाध्यक्ष या पैनल ऑफ चेयरमैन का कोई सदस्य करता है।
  5. नियम 183 और 184 में वोटिंग बताए गए हैं जिसमें कहा गया है कि प्रस्ताव पर चर्चा के बाद वोटिंग यानी मतदान होता है। प्रस्ताव तभी पास होता है कि जब उसे लोकसभा की कुल सदस्य की संख्या के बहुमत का समर्थन मिले।

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