नोएडा प्राधिकरण शहर के गोलचक्करों और हरित पट्टियों के सौंदर्यीकरण व रखरखाव के लिए निजी कंपनियों और संस्थाओं को ‘गोद लेने’ की नीति अपनाने की तैयारी में है। इस योजना का उद्देश्य रखरखाव का खर्च कम करना और विज्ञापन से राजस्व बढ़ाना बताया गया है।
हाल ही में हुई बैठक में कृष्णा करुणेश की अध्यक्षता में यह तय किया गया कि गोलचक्करों और हरित पट्टियों को निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा। इसके तहत कंपनियां हरियाली और रखरखाव का खर्च उठाएंगी, जबकि बदले में उन्हें सीमित विज्ञापन की अनुमति और उससे आय अर्जित करने का अधिकार मिलेगा।
हालांकि, करीब डेढ़-दो साल पहले ग्रेनो प्राधिकरण क्षेत्र में भी इस प्रयोग को अपनाया गया था। लेकिन उसके परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के 34 गोलचक्करों में से ज्यादातर गोद दिए जा चुके हैं। गोद दिए गए अधिकतर गोलचक्कर और सेंट्रल वर्ज बदहाल हालत में हैं। कई स्थानों पर पौधों की देखभाल नहीं होने और भीषण गर्मी में पानी न दिए जाने से हरियाली सूख रही है।
वहीं, गोद लेने वाली संस्थाओं द्वारा हरित रखरखाव की बजाय बड़े पैमाने पर विज्ञापन बोर्ड लगाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सेक्टर बीटा-1, डेल्टा-1 और अन्य क्षेत्रों में गोलचक्करों की स्थिति खराब होती जा रही है। एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य आलोक सिंह के मुताबिक, गोलचक्कर और हरित क्षेत्र को गोद लेकर उसे हरा-भरा बनाने का वायदा करने वाली ज्यादातर संस्थाएं इस काम में लापरवाही बरत रही हैं।
इसकी वजह से गोद देने के बाद भी गोलचक्कर और हरित क्षेत्र बदहाल पड़े हैं। सेक्टर बीटा-1 निवासी हरेंद्र भाटी का कहना है कि गोलचक्कर और हरित क्षेत्र को गोद देने का कोई फायदा नहीं दिख रहा है।
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आजकल की शादियों में डीजे की बुकिंग आम बात है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में एक परिवार को बेटे की शादी में डीजे बजवाना भारी पड़ गया। शादी के बाद गांव की पंचायत ने एक मत से इस परिवार का हुक्का-पानी बंद करने का फरमान जारी किया और गांव में मुनादी भी करा दी। ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए इस गांव की पंचायत ने पूर्व में फैसला लिया था कि अब किसी भी शादी में डीजे नहीं बजेगा, लेकिन आरोप है कि इस परिवार ने पंचायत के पुराने आदेश का उल्लंघन किया है। पूरी खबर पढ़ें…
