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गोवा चुनाव के दौरान TMC-AAP में आई खटास क्या मिटा पाएगी ममता-केजरीवाल की मीटिंग?

गोवा चुनाव के जरिए दोनों पार्टियों में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में कमजोर नजर आ रही कांग्रेस की जगह लेने की होड़ मची थी।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (दाएं) – फोटो (इंडियन एक्सप्रेस- अनिल शर्मा)

दिल्ली के दौरे पर पहुंचीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। ममता बनर्जी शनिवार को मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंची थीं, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

सीएम केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के बीच लगभग 30 मिनट तक चली बैठक टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साउथ एवेन्यू स्थित आवास पर हुई। यहां टीएमसी प्रमुख आमतौर पर अपने दिल्ली दौरे के वक्त ठहरती हैं। जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पिछली बार नवंबर 2021 में दिल्ली के दौरे पर आई थीं, तो विभिन्न नेताओं के साथ उनकी बातचीत से बड़ी खबर वह थी, जिनके साथ उनकी मीटिंग्स नहीं हुई। दिल्ली के सीएम के साथ उनकी मुलाकात का कोई नतीजा नहीं निकलना दोनों नेताओं के बीच सबंधों में खटास की चर्चाएं जोरों पर थीं।

2015 में, जब अरविंद केजरीवाल सीएम बनने के बाद पहली बार संसद पहुंचे थे, उस वक्त ममता बनर्जी ने एक गाइड की भूमिका निभाई थी। बाद के वर्षों में दोनों नेताओं की कई बार मुलाकात हुई, इसमें जुलाई 2021 का वह दौरा भी शामिल है जब ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की शानदार जीत के बाद दिल्ली पहुंची थीं। लेकिन, सितंबर 2021 में जब टीएमसी ने गोवा विधानसभा चुनावों में उतरने का ऐलान किया, उसके बाद से दोनों नेताओं के बीच समीकरण बिगड़ने लगे।

यहां से टीएमसी और आप के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। इसके पीछे वजह थी कि दोनों पार्टियों में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में कमजोर नजर आ रही कांग्रेस की जगह लेने की होड़ मची थी। हालांकि, इन सबके बाद एक बार फिर दोनों मुख्यमंत्रियों की शनिवार को दिल्ली में मुलाकात हुई। राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ी सरगर्मियों के बीच, इस मुलाकात को लेकर कोई ये सामने नहीं आया है कि दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई।

ये बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि एक महीने पहले ममता बनर्जी ने अरविंद केजरीवाल सहित सभी गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था, जिसमें भाजपा शासित केंद्र सरकार की कथित ज्यादतियों के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। यह अलग बात है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि संयुक्त विपक्षी मोर्चे के विचार को लेकर उनकी पार्टी बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं है।

हाल के वर्षों में आम आदमी पार्टी दिल्ली के बाहर अपना पैर फैलाने में सफल होती दिखाई दी है। पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। जबकि राज्यसभा में टीएमसी के 13 सदस्यों के मुकाबले पार्टी के सदस्यों की संख्या 8 पहुंच गई है। एक टीएमसी नेता ने कहा, “गोवा चुनाव ने समीकरणों को बदल दिया था क्योंकि दोनों पार्टियां राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने करने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन ऐसी कोई कड़वाहट नहीं है। हाल ही में टीएमसी ने संसद में दिल्ली नगरपालिका संशोधन विधेयक के खिलाफ मुखर होकर अपनी बात की थी।”

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