scorecardresearch

Muharram 2022: महात्मा गांधी को कर्बला की कुर्बानियों से मिली थी प्रेरणा, हुसैन से सीखा मज़लूमियत में कैसे पा सकते हैं जीत

स्वतंत्रता संग्राम के पुरोधा गांधी ने कहा था, ”अगर मेरे पास हुसैन जैसे 72 साथी होते तो मैं 24 घंटे में भारत को अंग्रेजों से मुक्त करा देता।”

Muharram 2022: महात्मा गांधी को कर्बला की कुर्बानियों से मिली थी प्रेरणा, हुसैन से सीखा मज़लूमियत में कैसे पा सकते हैं जीत
गांधी के अलावा हुसैन की शहादत को नेहरू, टैगोर और राजेंद्र प्रसाद भी याद कर चुके हैं। (Photo Credit – Express Archive)

गम का महीना मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार साल का पहला महीना होता है। इस महीने की 10 तारीख को आशूरा (मातम) का दिन कहते हैं। इसी रोज पैगंबर हज़रत मोहम्‍मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन कर्बला (इराक) की जंग में 71 साथियों के साथ शहीद हो गए थे। इसमें उनके दोस्त और परिवार के कई सदस्यों समेत 6 माह के बेटे अली असगर भी शामिल थे। मारे गए सभी लोग 3 रोज से भूखे प्यासे थे।

गांधी को मिली प्रेरणा!

इमाम हुसैन और उनके साथियों ने क्रूर शासक यज़ीद की जुल्म और तानाशाही के आगे झुकने के बजाए शहीद होना चुना था। सर्वोच्च बलिदान तक इंसानियत और सच के रास्ते पर चलने के इसी आत्मविश्वास ने महात्मा गांधी को गहरा प्रभावित किया था। कर्बला की त्रास्दी और हुसैन के बलिदान की छाप गांधी के ‘करो या मरो’ के नारे में नजर आती है। गांधी खुद कहते हैं, ”मैंने हुसैन से सीखा कि मज़लूमियत में किस तरह जीत हासिल की जा सकती है।” स्वतंत्रता संग्राम के पुरोधा गांधी ने कहा था, ”अगर मेरे पास हुसैन जैसे 72 साथी होते तो मैं 24 घंटे में भारत को अंग्रेजों से मुक्त करा देता।”

इतना ही नहीं गांधी दुनिया भर में इस्लाम के प्रसार को हुसैन के बलिदान का एक नतीजा मानते हैं। हुसैन को महान संत बताते हुए वह कहते हैं, ”इस्लाम की बढ़ोतरी तलवार पर निर्भर नहीं करती बल्कि हुसैन के बलिदान का एक नतीजा है जो एक महान संत थे”

गांधी के अलावा हुसैन की शहादत को नेहरू, टैगोर और राजेंद्र प्रसाद भी याद कर चुके हैं। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो यहां तक मानते हैं कि हुसैन की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी सदियों पहले थीं। साल 2021 में कर्बला के बलिदान को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा था, ”हम हज़रत इमाम हुसैन (अस) के बलिदानों को याद करते हैं और उनके साहस और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को याद करते हैं। उन्होंने शांति और सामाजिक समानता को बहुत महत्व दिया।”

कर्बला के जंग की वजह

सीरिया के गवर्नर यजीद ने खुद को खलीफा घोषित करने के बाद बेगुनाहों पर ज़ुल्म बरसाना शुरू किया। अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी इंसान का कत्ल करा देना उसके लिए बहुत आसान था। बेजुर्म लोगों का हक छीनकर उनका शिकार करना यजीद शौक बनता जा रहा था। हुसैन के लिए यजीद की हरकतें गैर-इस्लामिक थीं, यही वजह थी उन्होंने उसे खलीफा मानने से भी इनकार कर दिया था।

तानाशाह यजीद ने पहले तो हुसैन को आदेश का पालन करने का फरमान भेजा। जब वह नहीं माने तो 680 ईसवी में इराक के कर्बला में हुसैन और उनके 71 साथियों की हत्या करवा दी।

पढें विशेष (Jansattaspecial News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

अपडेट