LPG Crisis in India: ईरान पर अमेरिका-इजरायल के साझा हमले के बाद पिछले दो हफ्ते से मिडिल ईस्ट में भीषण युद्ध चल रहा है। इस युद्ध के चलते ईरान ने ऐलान किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज को गुजरने नहीं देगा। इसके बावजूद कई जहाज गुजरे तो उन पर हमला भी किया गया। इस जलडमरूमध्य से ही कच्चे तेल से लेकर गैस की सप्लाई भी होती है। यह सप्लाई प्रभावित हुई तो असर भारत पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल से ज्यादा दिक्कत एलपीजी गैस की है, जिसके चलते देश में एक पैनिक सा फैल गया है।

एलपीजी की कमी के डर के चलते ही इंडक्शन कुकटॉप की चर्चा होने लगी है, क्योंकि इसकी डिमांड में बढ़ोतरी आई है लेकिन पहले थोड़ा एलपीडी की कमी के विषय को समझ लेते हैं। दरअसल, वैश्विक गैस संकट के बीच के सरकार का कहना है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है। केवल बुकिंग के टाइम को बढ़ाकर 25 दिन किया गया है। एलपीजी की बुकिंग के बाद जल्द से जल्द सिलेंडर उपभोक्ता के घर पर पहुंचाए जा रहे हैं।

ईरान-इजरायल युद्ध अपडेट

सरकार के दावों के बीच परेशान लोग

केंद्र सरकार, अलग-अलग राज्यों की सरकारों को भी दिशा-निर्देश जारी कर रही है। कॉमर्शियल गैस के बिक्री पर पहले एहतियात के तौर पर रोक लगी थीं लेकिन अब सरकार ने राज्यों की सरकारों को कॉमर्शियल गैस उपलब्ध कराने के लिए नियम बनाने की छूट दे दी है। सरकार के दावों के विपरीत हकीकत ये भी है कि एलपीजी की बुकिंग के लिए देश के की शहरों में लोग गैस एजेंसियों के बाहर लाइन लगा रहे हैं। सरकार कालाबाजारी रोकने की बात कर रही है, इसके बावजूद लोगों को मुश्किलों करना पड़ रहा है।

इंडक्शन कुकटॉप की बढ़ती मांग

ऐसे में एक तरफ जहां एलपीजी को लेकर लोग जद्दोजहद कर रहे हैं, तो दूसरी ओर इंडक्शन से जुड़े कुकिंग अपलायंसेज और कुकटॉप की डिमांड बढ़ गई है। जानकारी के मुताबिक, भारत में LPG सिलेंडर की किल्लत, संभावित आपूर्ति संकट और बढ़ती कीमतों के कारण इंडक्शन कुकटॉप की मांग में अचानक भारी उछाल (लगभग 20-30 गुना तक) आया है।

दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में यह अब केवल ‘किचन अपग्रेड’ नहीं, बल्कि ‘जरूरत’ बन गया है। इससे इलेक्ट्रिक केतली और राइस कुकर की बिक्री भी बढ़ गई है। ऑनलाइन शॉपिग प्लेटफॉर्म्स पर इंडक्शन की मांग अचानक बढ़ गई। कई ई-कॉमर्स साइट्स पर ये प्रोडक्ट आउट ऑफ स्टॉक्स होने लगे। हालांकि कुछ ही समय में इनका स्टॉक्स फिर दिखने लगा।

ई-कॉमर्स कंपनियों ने कही बिक्री में उछाल की बात

ई-कॉमर्स कंपनियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन की बिक्री में तेज उछाल आया है। अमेजन पर बिक्री करीब 30 गुना और फ्लिपकार्ट पर बिक्री करीब चार गुना हो गई। इसके अलावा इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स यानी ब्लिंकिट या इंस्टामार्ट पर भी इंडक्शन चूल्हों की बिक्री बढ़ गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर क्रोमा के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की मांग करीब 3 गुना बढ़ गई है।वहीं, किचन अप्लायंस बनाने वाली कंपनी स्टोवक्राफ्ट ने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उनकी साप्ताहिक बिक्री करीब चार गुना तक बढ़ गई है।

एलपीजी से बेहतर है इंडक्शन?

जेब पर असर : अगर बिजली की दर सामान्य है, तो इंडक्शन पर खाना बनाना गैस के मुकाबले 20% से 30% सस्ता पड़ता है। खासकर तब, जब गैस सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही हों। गैस सिलेंडर की कीमत फिक्स नहीं रहती और रिफिल कराने का झंझट हमेशा बना रहता है।

खाना बनाना आसान : इंडक्शन में खाना बनाना ज्यादा तेज और आसान होता है। इंडक्शन चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic waves) से सीधा बर्तन को गर्म करता है, जिससे पानी या दूध एलपीजी के मुकाबले बहुत जल्दी उबल जाता है। बात अगर एलपीजी की करें तो आंच बर्तन के बाहर भी फैलती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी ज्यादा होती है और खाना पकने में अधिक समय लगता है।

खाना बनाते समय सुरक्षा : इंडक्शन में खुली आग नहीं होती, इसलिए जलने या गैस लीक होने का कोई डर नहीं है। अगर आप चूल्हा बंद करना भूल जाएं, तो बर्तन हटाते ही यह अपने आप बंद हो जाता है। गैस लीक या आग लगने का जोखिम हमेशा बना रहता है। साथ ही, यह रसोई का तापमान भी बढ़ा देता है।

बर्तन और सुविधा : इंडक्शन के लिए आपको खास बर्तनों (Induction base) की जरूरत होती है। मिट्टी के बर्तन या साधारण एल्युमीनियम के बर्तन इस पर काम नहीं करते। साथ ही, यह बिजली कटने पर बेकार हो जाता है। दूसरी ओर एलपीजी सिलिंडर के स्टोव से आप किसी भी तरह का बर्तन (लोहा, पीतल, मिट्टी, एल्युमीनियम) इस्तेमाल कर सकते हैं।

बिजली पर बढ़ सकता है दबाव

हालांकि दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि इंडक्शन के इस्तेमाल की वजह से बिजली का इस्तेमाल बढ़ सकता है। नेशनल पावर पोर्टल के अनुसार, देश में रोजाना करीब 2 लाख मेगावाट बिजली की खपत होती है और फिलहाल इसकी सप्लाई सामान्य है। बिजली उत्पादन के लिए आयात किए जाने वाले कोयले का करीब 76% हिस्सा पावर प्लांट्स में इस्तेमाल होता है। इसको लेकर ही एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग बिजली से खाना पकाने लगते हैं तो बिजली की मांग बढ़ेगी और पावर ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा दे रही सरकार

यह सच है कि एलीपीजी से ही देश के ज्यादातर घरों में खाना बनता है और अभी एलपीजी की कमी एक बड़ी समस्या बन सकती है लेकिन केंद्र सरकार 5 साल पहले ही इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने का मिशन लेकर आई थी। केंद्र सरकार का ‘गो इलेक्ट्रिक’ (Go Electric) अभियान, 19 फरवरी 2021 को शुरू हुआ था। इसके तहत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कुकिंग (e-cooking) को बढ़ावा दे रही है।

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा कार्यान्वित इस मिशन के जरिए सरकार इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर के उपयोग से LPG पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। इलेक्ट्रिक कुकिंग (इंडक्शन) LPG की तुलना में अधिक सुरक्षित है, कम कार्बन उत्सर्जन करती है और भविष्य में सौर ऊर्जा से जुड़कर और भी सस्ती हो सकती है।

ऐसे में अब एलपीजी की आपूर्ति में दिक्कत की खबरें आ रही हैं, तो लोग इलेक्ट्रिक कुकिंग की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। हालांकि ये देखना होगा कि आखिर इसका कितना फायदा होता है, और क्या धीरे-धीरे एलपीजी से लोगों की निर्भरता खत्म होती है या नहीं।

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मुंबई के मशहूर होटल और रेस्टोरेंट ने बदला खाना बनाने का तरीका। (इमेज सोर्स- एक्सप्रेस फोटो)

दोपहर का समय है और राम प्रसाद शर्मा स्टाफ के लंच के लिए चने की ग्रेवी बना रहे हैं। शर्मा दादर ईस्ट में 66 साल पुराने नॉर्थ इंडियन रेस्टोरेंट और बार ‘ग्रेट पंजाब’ के हेड शेफ हैं। शर्मा को चने की ग्रेवी बनाने में आम तौर पर लगने वाले समय से लगभग दोगुना समय लग रहा है। अपने करियर में पहली बार, शर्मा एक इलेक्ट्रिक कॉइल वाले स्टोव पर खाना बना रहे हैं। यह एक ऐसा उपकरण है जो कई रेस्टोरेंट के लिए मददगार साबित हुआ है, क्योंकि यह मौजूदा बर्तनों के साथ ही काम करता है। लेकिन शर्मा इससे ज़्यादा प्रभावित नहीं हैं। यह भी पढ़ें