Lok Sabha Security Explained: बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंश पढ़ने के मुद्दे पर नेता विपक्ष राहुल गांधी अड़ गए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें यह नहीं पढ़ने दिया, जिसके चलते विवाद बढ़ गया, और जब पीएम मोदी के बोलने का अवसर आया, तो उससे पहले कथित तौर पर यह बयान सामने आया कि जब राहुल गांधी को नहीं बोलने दिया गया, तो पीएम मोदी को भी नहीं बोलने दिया जाएगा।

पीएम मोदी को लोकसभा में नेता सदन होने के नाते 4 फरवरी को शाम 5 बजे राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलना था लेकिन फिर खबर ये आई कि प्रधानमंत्री नहीं बोलेंगे। इसके दूसरे दिन पीएम मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उनको लेकर तो खूब चर्चा हो रही है लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के एक बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।

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लोकसभा स्पीकर ने क्या कहा?

दरअसल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था। ओम बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी।

स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे। मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है। अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती।”

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बीजेपी ने लगाए थे आरोप

ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं।” गौरतलब है कि बीजेपी नेताओं और सांसदों ने आरोप लगाए थे कि विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, और विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था।

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था। मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया।

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मनोज तिवारी ने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है, लेकिन सवाल यह भी उठने लगे हैं कि क्या संसद के अंदर भी पीएम मोदी की सुरक्षा सच में खतरा हो गया था?

कैसे होती है पीएम मोदी की सुरक्षा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा की बात करें तो ये जिम्मेदारी पूरी तरह से विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के अधीन एक एजेंसी है, जिसका एकमात्र दायित्व भारत के प्रधानमंत्री और कुछ मामलों में उनके परिवार की सुरक्षा करना है। इसका गठन 1988 में भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा किया गया था।

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संसद के बाहर और भीतर सुरक्षा में क्या होता है अंतर?

प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) की होती है। जब पीएम मोदी संसद परिसर में पहुंचते हैं, तो वे एसपीजी के कड़े घेरे में होते हैं लेकिन, संसद की परंपरा के अनुसार, हथियारबंद सुरक्षाकर्मी लोकसभा या राज्यसभा के मुख्य सदन (Chamber) के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते।

पीएम मोदी जैसे ही सदन के दरवाजे के अंदर कदम रखते हैं, उनकी सुरक्षा की कमान संसद सुरक्षा सेवा (Parliament Security Service) और वहां तैनात मार्शलों के हाथ में आ जाती है। सदन के अंदर मार्शल ही सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखते हैं। वे बिना किसी आधुनिक हथियार के केवल अपनी ट्रेनिंग और प्रोटोकॉल के जरिए व्यवस्था संभालते हैं।

सुरक्षा पर होता है स्पीकर का कंट्रोल

राज्यसभा हो या लोकसभा सदन के भीतर जो भी सुरक्षा व्यवस्था होती है, वह पूरी तरह से लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) के अधिकार क्षेत्र में आती है। अगर कोई सदस्य प्रधानमंत्री के करीब जाने की कोशिश करता है या हंगामा करता है, तो स्पीकर के निर्देश पर मार्शल उसे रोकते हैं। भले ही एसपीजी के कमांडो सदन के अंदर नहीं होते, लेकिन वे दरवाजे के ठीक बाहर (लॉबी में) मौजूद रहते हैं। सत्र शुरू होने से पहले एसपीजी और संसद की सुरक्षा टीम के बीच हर छोटी-बड़ी बात पर चर्चा होती है। प्रधानमंत्री के आने-जाने का रास्ता और इमरजेंसी एग्जिट प्लान पहले से ही तय होता है। ‘नेहरू-गांधी परिवार के इतिहास पर बनाएंगे लाइब्रेरी’, निशिकांत दुबे ने की घोषणा