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झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने 77 प्रतिशत सरकारी नौकरियां SC, ST, EBC और OBC को देने वाले प्रस्ताव को मंजूर किया

Jharkhand Raises OBC Reservations: अब तक राज्य की सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण मिलता रहा है।

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने 77 प्रतिशत सरकारी नौकरियां SC, ST, EBC और OBC को देने वाले प्रस्ताव को मंजूर किया
सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सीएम हेमंत सोरेन ने यह कदम आदिवासी और ओबीसी समुदाय को साधे रखने के लिए उठाया है? (Photo Credit- Twitter/@JharkhandCMO)

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने बुधवार को आरक्षण से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। सीएम सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक (Cabinet meeting) में ओबीसी का कोटा बढ़ा दिया गया है। अब तक राज्य की सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण मिलता रहा है। सोरेन सरकार ने अपने फैसले में उसे बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है।

सरकार के फैसले पर अमल होने के साथ राज्य में SC, ST, OBC और EWS का कुल आरक्षण 77 प्रतिशत हो जाएगा। इसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग की 15% , पिछड़ा वर्ग की 12%, अनुसूचित जाति की 12%, अनुसूचित जनजाति की 28% और EWS की 10% हिस्सेदारी होगी।

झारखंड सरकार की मंत्रिमंडल सचिव वंदना डाडेल ने प्रेसवार्ता में बताया कि आरक्षण और खतियान से संबंधित विधेयक को विधानसभा से पारित कराने और राज्यपाल की स्वीकृति के बाद केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। मंत्रिमंडल केंद्र सरकार से दोनों कानूनों को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने का अनुरोध करेगा। इससे कानूनों को किसी अदालत में चुनौती नहीं दिया जा सकेगा।

केंद्र सरकार के पास अटका है सरना धर्म कोड

हेमंत सरकार ने 11 नवंबर 2020 को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर ‘सरना आदिवासी धर्म कोड’ का विधेयक पारित किया था। दरअसल आदिवासी खुद को हिंदू या किसी भी संगठित धर्म का हिस्सा नहीं मानते हैं। इसलिए उनके द्वारा लंबे समय से अलग धर्म कोड की मांग हो रही थी। वह इसके जरिए जनगणना में अपनी वास्तविक स्थिति और सही आंकड़े भी पाना चाहते हैं।

सरना धर्म कोड को विधानसभा में पारित करने के बाद प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा गया था, जिस पर केंद्र ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। आदिवासी समुदाय से आने वालीं द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद सरना धर्म कोड लागू होने की उम्मीद बढ़ी थी। लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है।

ऐसे में हेमंत सरकार का आरक्षण से जुड़ा बदलाव भी अधर में लटक सकता है। अगर केंद्र कानूनों को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल नहीं करता और इस दौरान मामला कोर्ट में चला जाता है, तो सुनवाई तक आरक्षण का नया प्रावधान लागू नहीं हो पाएगा।

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