ईरान-इजरायल युद्ध में अमेरिका की भूमिका व्यापक है। अमेरिका ने ना सिर्फ इजरायल के साथ इस जंग में हिस्सा लिया है बल्कि उसकी सहायता ने जमीन पर समीकरण बदले हैं। जानकार मानते हैं कि अमेरिका ने ही इस युद्ध की दिशा को बदल दिया है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर है, उसके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं। यही वजह है कि पिछले कई दशकों में जब दुनिया ने भीषण युद्ध देखे, अमेरिका ने उनमें अपनी अहम भूमिका अदा की। उन युद्ध में अमेरिका ने अरबों-खरबों डॉलर खर्च किए। जनसत्ता की विशेष सीरीज ‘आंकड़े बोलते हैं’ में आज समझने की कोशिश करते हैं, अमेरिका एक युद्ध की कितनी कीमत चुकाता है?
पहले विश्व युद्ध में अमेरिकी खर्च
पहला विश्व युद्ध 1914 से 1918 के बीच लड़ा गया था। दो गुटों के बीच ये युद्ध छिड़ा था- एक रहा Allied Powers जिसमें ब्रिटेन, फ्रांस, रूस शामिल थे। दूसरा रहा Central Powers जिसमें जर्मनी, ऑस्ट्रिया-हंगरी, तुर्की, बुल्गारिया जैसे देश थे। तीन साल तक इस युद्ध से अमेरिका ने दूरी बना रखी थी, लेकिन 6 अप्रैल 1917 को उसने इस युद्ध का हिस्सा बनने का फैसला किया। असल में जब जर्मनी के हमलों में अमेरिकी नागरिकों ने भी अपनी जान गंवानी शुरू कर दी, तब अमेरिका को मजबूरन इस युद्ध में शामिल होना पड़ा।
National Bureau Of Economic Research के मुताबिक पहले विश्व युद्ध में अमेरिका का खुल खर्च 32 अरब डॉलर रहा था। उस जमाने में अमेरिका की कुल राष्ट्रीय उत्पादन यानी कि जीएनपी का यह 52 फीसदी हिस्सा था। दूसरे शब्दों में कहें तो अमेरिका ने अपनी आधे से भी ज्यादा आर्थिक क्षमता उस समय इस युद्ध में झोक दी थी। इस युद्ध में अमेरिका ने तीन तरीकों से पैसा जुटाया था- 22 फीसदी टैक्स के जरिए, 58 फीसदी जनता से ही उधार लेकर और 20 फीसदी नए नोट छापकर। यहां भी अमेरिका का रक्षा खर्च कुल जीडीपी का 14.1 फीसदी रहा था।
युद्धों में अमेरिकी खर्च
दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिकी खर्च
द्वितीय विश्व युद्ध 1939 से 1945 के बीच लड़ा गया था। यह महायुद्ध दो गुटों के बीच था। एक तरफ एलाइड पावर्स थे, जिनमें ब्रिटेन, सोवियत संघ, अमेरिका, फ्रांस और चीन शामिल थे। दूसरी तरफ एक्सिस पावर्स थे, जिनमें जर्मनी, इटली और जापान शामिल थे। यह युद्ध जर्मनी की विस्तारवादी नीति की वजह से शुरू हुआ। एडोल्फ हिटलर यूरोप के कई देशों पर कब्जा करना चाहता था। इसी वजह से 1939 में जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया, जिसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।
1941 में अमेरिका भी इस युद्ध में शामिल हो गया। इसकी वजह यह थी कि 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर हमला कर दिया, जिसमें हजारों अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। पहले विश्व युद्ध में अमेरिका की सक्रिय भागीदारी लगभग एक साल की थी, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध में यह बढ़कर करीब चार साल तक रही। नॉर्विच यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध में लगभग 4.1 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए थे। उस समय कुल जीडीपी में रक्षा खर्च बढ़कर 37.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने करीब 1.22 करोड़ सैन्य कर्मियों को युद्ध में उतारा था। इस युद्ध में अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों की कुल मौतों की संख्या लगभग 4,18,500 दर्ज की गई थी। नॉर्विच यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने लगभग 1.3 करोड़ हथियार बनाए। इनमें गन, हॉवित्जर, राइफल और कार्बाइन शामिल थे। इसके अलावा फैक्ट्रियों में करीब 1 लाख टैंक और 3 लाख विमान भी तैयार किए गए।
सिर्फ यही नहीं, उस दौर में अमेरिका ने 40 अरब से ज्यादा गोलियां भी तैयार कीं। चूंकि यह युद्ध समुद्र में भी लड़ा गया था, इसलिए अमेरिका ने इस दौरान 10 युद्धपोत, 27 विमानवाहक पोत और लगभग 200 पनडुब्बियां भी बनाई थीं। द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका पर आया कुल आर्थिक बोझ बहुत बड़ा था। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 63 प्रतिशत खर्च अमेरिका ने वॉर बॉन्ड के जरिए जुटाया था।
वियतनाम युद्ध पर अमेरिकी खर्च
अमेरिकी इतिहास में वियतनाम युद्ध को एक काले अध्याय के तौर पर याद किया जाता है। कई इतिहासकार इसे आज भी अमेरिका की हार के रूप में देखते हैं। यह युद्ध 1955 से 1975 के बीच चला, जबकि 1965 से अमेरिका की इसमें सीधी सैन्य भागीदारी शुरू हो गई।
यह युद्ध मुख्य रूप से उत्तर वियतनाम और दक्षिण वियतनाम के बीच था। उत्तर वियतनाम को सोवियत संघ और चीन का समर्थन प्राप्त था, जबकि दक्षिण वियतनाम को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का समर्थन मिल रहा था। उस समय उत्तर वियतनाम में कम्युनिस्ट सरकार थी, जबकि दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थित सरकार सत्ता में थी। अमेरिका हर कीमत पर वियतनाम को कम्युनिस्ट बनने से रोकना चाहता था। वह दक्षिण वियतनाम की सरकार को बचाना चाहता था, इसी वजह से युद्ध और ज्यादा तेज हो गया।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपनी सेना पर लगभग 828 अरब डॉलर खर्च किए। 1965 के बाद से अमेरिका हर साल 50 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर रहा था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस युद्ध की वजह से अमेरिका को 111 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा था। इस युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ। करीब 58,000 अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि लगभग 1,53,000 सैनिक घायल हो गए।
पेंटागन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1961 से 1973 के बीच वियतनाम युद्ध में अमेरिका के 3,699 फिक्स्ड-विंग विमान पूरी तरह नष्ट हो गए थे। वहीं 4,865 हेलीकॉप्टर भी बर्बाद हो गए। अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स आर. श्लेसिंगर ने उस समय अमेरिकी संसद में बताया था कि दक्षिण वियतनाम में इस्तेमाल किए गए अमेरिकी सैन्य उपकरणों की कीमत लगभग 3 अरब से 4 अरब डॉलर के बीच थी। हालांकि, इन उपकरणों का बड़ा हिस्सा युद्ध में नष्ट हो चुका था। इसके अलावा, जब अमेरिका और दक्षिण वियतनाम की सेना कुछ इलाकों से पीछे हटी, तो वहां 800 मिलियन डॉलर से ज्यादा के सैन्य उपकरण पीछे छोड़ दिए गए थे।
अफगानिस्तान युद्ध पर अमेरिकी खर्च
अमेरिका ने अफगानिस्तान में भी एक लंबी जंग लड़ी, लेकिन इस युद्ध को अमेरिकी इतिहास में सफलता से ज्यादा असफलताओं के लिए याद किया जाता है। ब्राउन यूनिवर्सिटी के “कॉस्ट ऑफ वॉर प्रोजेक्ट” की रिपोर्ट बताती है कि अफगानिस्तान युद्ध पर अमेरिका ने लगभग 2.26 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए। इसमें से अमेरिका ने रक्षा विभाग के बजट से करीब 933 अरब डॉलर खर्च किए थे। इसके अलावा 530 अरब डॉलर उस कर्ज पर खर्च हुए, जो अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिका ने लिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, 443 अरब डॉलर का अतिरिक्त रक्षा खर्च भी सामने आया था। इसके अलावा घायल सैनिकों और पूर्व सैनिकों के इलाज तथा मेडिकल देखभाल पर अमेरिका ने लगभग 296 अरब डॉलर खर्च किए। इतना ही नहीं, अमेरिका ने अफगान सेना को प्रशिक्षण देने और उसे सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने पर करीब 88.3 अरब डॉलर भी खर्च किए थे। हालांकि इतने प्रयासों और भारी खर्च के बावजूद तालिबान ने अफगानिस्तान में दोबारा सत्ता हासिल कर ली, और अब वहां उसकी सरकार चल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान युद्ध की वजह से अमेरिका को जान-माल का भारी नुकसान भी उठाना पड़ा। करीब 2,500 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई, जबकि लगभग 4,000 अमेरिकी नागरिक ठेकेदार भी मारे गए। दूसरी ओर अफगानिस्तान को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा। उन वर्षों में करीब 69,000 अफगान सैन्य और पुलिसकर्मी मारे गए, जबकि लगभग 47,000 आम नागरिकों की भी मौत हुई।
ईरान युद्ध पर अमेरिकी खर्च
इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर जो हमला किया है, उसकी आर्थिक कीमत बहुत बड़ी मानी जा रही है। वॉशिंगटन की थिंक टैंक Center for Strategic and International Studies की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका इस युद्ध में रोज़ करीब 891.4 मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ हवाई ऑपरेशन पर ही अमेरिका रोज़ करीब 30 मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। वहीं नौसैनिक ऑपरेशन पर लगभग 15 मिलियन डॉलर और जमीनी ऑपरेशन पर करीब 1.6 मिलियन डॉलर प्रतिदिन खर्च हो रहे हैं।
अगर अलग-अलग सैन्य संसाधनों की बात करें तो टैंकर और कार्गो विमानों पर अमेरिका रोज़ करीब 9 मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। इसके अलावा एयरक्राफ्ट कैरियर पर रोज़ लगभग 6 मिलियन डॉलर और डिस्ट्रॉयर युद्धपोतों पर करीब 5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन खर्च किए जा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस युद्ध के सिर्फ पहले 100 घंटों में ही अमेरिका करीब 3.7 बिलियन डॉलर खर्च कर चुका है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने पिछले साल जून में भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर ऑपरेशन मिडनाइट हैमर चलाया था। यह ऑपरेशन करीब ढाई घंटे तक चला था। ब्राउन यूनिवर्सिटी के Costs of War Project की रिपोर्ट के मुताबिक, उस छोटे से ऑपरेशन में भी अमेरिका ने करीब 2.04 से 2.26 बिलियन डॉलर तक खर्च कर दिए थे। हालांकि अभी तक पेंटागन की तरफ से इस युद्ध के लिए कोई आधिकारिक बजट घोषित नहीं किया गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अमेरिका के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ साबित हो सकता है, जिसकी असली कीमत अनुमान से भी कहीं ज्यादा हो सकती है।
खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान युद्ध पांच हफ्तों तक खिच सकता है। अगर एक दिन खर्च 9 मिलियन डॉलर आ रहा है, उस लिहाज से 35 दिनों के अंदर अमेरिका 2900 करोड़ से भी ज्यादा खर्च कर चुका होगा। ऐसे में इस युद्ध का आर्थिक बोझ अमेरिका पर काफी ज्यादा रहेगा।
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