इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में VFS ग्लोबल कंपनी के कामकाज की कई परतें खुलकर सामने आई हैं। डेटा सुरक्षा से लेकर अतिरिक्त शुल्क वसूलने तक कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जहां कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।

इसी कड़ी में एक और मुद्दा सामने आया है जो Value Added Services (VAS) से जुड़ा है। आरोप है कि VFS ग्लोबल अपने आवेदकों से अतिरिक्त सेवाओं के नाम पर अलग से पैसा लेती है। कई लोगों को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाता कि ये सेवाएं पूरी तरह वैकल्पिक हैं और वीजा मंजूरी से इनका कोई सीधा संबंध नहीं है।

इंडियन एक्सप्रेस को अपनी पड़ताल में पता चला कि VFS ग्लोबल के दिल्ली में दो बड़े केंद्र हैं। एक KG Marg पर स्थित है और दूसरा शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के पास।

इन दोनों केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। लोगों की चिंता सिर्फ इस बात को लेकर नहीं थी कि उन्हें वीजा मिलेगा या नहीं बल्कि इस बात को लेकर भी थी कि उन्हें अतिरिक्त पैसे देने पड़ रहे हैं।

लोगों ने बातचीत में क्या बताया?

इंडियन एक्सप्रेस ने इन दोनों केंद्रों पर 85 आवेदकों से बातचीत की। ज्यादातर लोगों ने स्वीकार किया कि प्रीमियम लाउंज, SMS अलर्ट और कूरियर जैसी अतिरिक्त सेवाएं लेने के लिए उन पर दबाव बनाया जाता है। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित VFS कार्यालय में भी 60 से ज्यादा लोगों से बातचीत की गई। वहां भी अधिकांश लोगों ने इसी तरह के अनुभव साझा किए।

पूर्व कर्मचारी भी अब कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उनका दावा है कि कर्मचारियों पर सेल्स टारगेट पूरा करने का दबाव रहता है और इसी वजह से उन्हें प्रीमियम सेवाएं बेचने के लिए कहा जाता है। कुछ कर्मचारियों ने तो यहां तक दावा किया कि आवेदकों को ऐसा महसूस कराया जाता है कि इन सेवाओं को लेने से वीजा मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

यूरोपीय निरीक्षकों की जांच में भी इसी तरह की चिंताएं सामने आई थीं। वहां भी सवाल उठाया गया था कि क्या VAS को वास्तव में वैकल्पिक सेवाओं के रूप में पेश किया जा रहा है या नहीं।

इन आरोपों पर VFS ग्लोबल ने जवाब दिया था। कंपनी का कहना है कि वह पूरी तरह पारदर्शी तरीके से काम करती है, उसका नियमित ऑडिट होता है और वह सरकारी एजेंसियों की कड़ी निगरानी में काम करती है।

आंकड़े क्या कहानी बता रहे?

Registrar of Companies (RoC) के रिकॉर्ड के अनुसार, वित्त वर्ष 2015-16 में VAS से कंपनी को 25.7 करोड़ रुपये की आय हुई थी। उस समय कंपनी की कुल आय 408 करोड़ रुपये थी, यानी कि VAS की हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत थी।

लेकिन वित्त वर्ष 2019-20 तक VAS से आय बढ़कर 114.7 करोड़ रुपये हो गई। उस समय कंपनी की कुल आय 673 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी,यानी कि VAS की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 17 प्रतिशत हो गई थी।

सिर्फ 2016 से 2024 के बीच कंपनी के मुनाफे में 20 गुना तक की बढ़ोतरी हुई। 2016 में कंपनी का लाभ 7.7 करोड़ रुपये था, जो 2024 तक बढ़कर 155 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि के दौरान कंपनी की कुल आय 411 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,125 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट में यह खुलासा भी किया गया है कि 2017 के बाद से कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट चार गुना बढ़ चुका है। 2024 में यह 172 मिलियन यूरो तक पहुंच गया था। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ कंपनी का मुनाफा तेजी से बढ़ रहा था जबकि इसी अवधि में प्रोसेस किए गए वीजा की संख्या केवल 15 प्रतिशत बढ़ी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 के बाद कंपनी ने VAS से होने वाली आय को अलग से दिखाना बंद कर दिया। इसके बजाय राजस्व को अलग-अलग व्यावसायिक श्रेणियों में बांटकर दिखाया जाने लगा।

VFS ग्लोबल ने क्या सफाई दी है?

भारत के आंकड़ों की बात करें तो लगभग 17 प्रतिशत लोगों ने VFS ग्लोबल की प्रीमियम लाउंज सेवा ली थी, लेकिन इससे कंपनी की 21 प्रतिशत आय आई। इसी तरह 55 प्रतिशत लोगों ने कूरियर सर्विस ली जिससे कंपनी की 12 प्रतिशत आय हुई। 46 प्रतिशत लोगों ने SMS सर्विस ली जिससे कंपनी को 6 प्रतिशत आय प्राप्त हुई।

इन आरोपों पर VFS ग्लोबल का कहना है कि वह आवेदकों को स्पष्ट रूप से बताती है कि ये सभी सेवाएं वैकल्पिक हैं और वीजा मंजूरी में इनकी कोई भूमिका नहीं होती। कंपनी का यह भी कहना है कि इन सेवाओं की कीमत सरकार की मंजूरी के बाद तय की जाती है और किसी को भी गलत जानकारी नहीं दी जाती।

आय दिखाने के तरीके में बदलाव को लेकर भी कंपनी ने सफाई दी है। कंपनी का तर्क है कि भारतीय लेखा मानकों के अनुसार अब कंपनियों को उत्पाद के आधार पर नहीं बल्कि ऑपरेशनल सेगमेंट के आधार पर वित्तीय जानकारी देनी होती है।

हालांकि कंपनी की इस सफाई के बीच इंडियन एक्सप्रेस ने कई आवेदकों से बात की। उनके अनुभवों ने कंपनी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। दिल्ली के शिवाजी स्टेडियम केंद्र के बाहर 26 वर्षीय एक युवक से बातचीत की गई। उसने कहा कि कंपनी ने उससे प्रीमियम लाउंज के नाम पर 3,000 रुपये से ज्यादा वसूल लिए। उसका दावा था कि उससे कहा गया, ‘इसके बिना आप अंदर प्रवेश नहीं कर सकते।’

इंडियन एक्सप्रेस ने उसकी रसीद भी देखी। उसमें कूरियर एश्योरेंस के लिए 1,260 रुपये, प्रीमियम लाउंज के लिए 3,360 रुपये, SMS शुल्क के लिए 420 रुपये और इंटरव्यू फी के लिए 1,575 रुपये दर्ज थे। यानी लगभग 15 हजार रुपये के कुल बिल में करीब 5 हजार रुपये केवल VAS सेवाओं पर खर्च हुए थे।

इसी तरह KG Marg केंद्र के बाहर पंजाब के एक 35 वर्षीय व्यक्ति ने भी अपना अनुभव साझा किया। उसने बताया कि कई बार लोगों से सिर्फ दूसरी लाइन में जाने के लिए कह दिया जाता है। पहले तो यह भी साफ नहीं बताया जाता था कि फीस ज्यादा होगी। उसके मुताबिक, प्रीमियम सेवाएं लेना पूरी तरह वैकल्पिक होना चाहिए।

पंजाब की एक छात्रा जो जर्मनी के छात्र वीजा के लिए आवेदन कर रही थी, उसने भी अपनी आपबीती बताई। उसने कहा कि उसने इस कंपनी को लगभग 2,800 रुपये दिए थे। उसका दावा था कि वह कई ऐसे छात्र वीजा आवेदकों को जानती है जिन्होंने इसी तरह की स्थिति का सामना किया।

कंपनी के पूर्व कर्मचारी भी अलग-अलग दावे कर रहे हैं। दिल्ली में काम कर चुके एक पूर्व VFS कर्मचारी ने कहा कि कर्मचारियों पर SMS और कूरियर सर्विस बेचने के लक्ष्य होते थे। उसने दावा किया कि अगर कोई आवेदक मना भी कर देता था, तब भी उसे मनाने की पूरी कोशिश की जाती थी।

उसके मुताबिक, लोगों को ऐसा महसूस कराया जाता था कि VFS कर्मचारी दूतावास के प्रतिनिधि हैं और उनकी बात मानना जरूरी है।एक वर्तमान कर्मचारी ने भी इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की। उसका कहना था कि Value Added Services बेचने पर कर्मचारियों को इंसेंटिव मिलता है। उसने दावा किया कि उसे हर महीने औसतन 7,000 से 8,000 रुपये तक इंसेंटिव मिल जाता है।

मुंबई के लोगों ने क्या खुलासे किए?

इंडियन एक्सप्रेस की यह पड़ताल मुंबई भी पहुंची थी। वहां VFS केंद्र पर कई लोगों से बातचीत की गई। इटली वीजा के लिए आवेदन करने वाले एक युवक ने बताया कि उसकी वीजा प्रक्रिया में SMS, कूरियर और लाउंज जैसी सेवाएं जोड़ दी गईं। उसका कहना था कि वह अपने दस्तावेजों और समयसीमा को लेकर पहले से ही चिंतित था। ऐसे में जब उसे बताया गया कि इन सेवाओं से प्रक्रिया तेज हो जाएगी तो उसने उन्हें स्वीकार कर लिया। उसके मुताबिक, इसी वजह से उसका 9 हजार रुपये का बिल बढ़कर 15 हजार रुपये तक पहुंच गया।

इसी तरह कनाडा वीजा के लिए आवेदन करने वाले 35 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि उसका कुल खर्च करीब 13,500 रुपये रहा। उसके अनुसार पहले SMS, फिर कूरियर और उसके बाद लाउंज सर्विस जोड़ी गई।

नॉर्वे वीजा के लिए आवेदन करने वाले 30 वर्षीय IT प्रोफेशनल की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी। उसने कुल 18 हजार रुपये खर्च किए। इसमें प्रीमियम लाउंज पर 3,500 रुपये और कूरियर व SMS सेवाओं पर लगभग 4,000 रुपये खर्च हुए। उसने बताया कि अंदर जाने के बाद प्रोसेसिंग समय में कोई अंतर महसूस नहीं हुआ। उसने कहा कि मुझे उसी कतार के आधार पर बुलाया गया, जिस तरह बाकी लोगों को बुलाया जा रहा था। यह एहसास दिलाया जाता है कि प्रीमियम सेवा लेने से काम तेजी से होगा जबकि वास्तव में यह सिर्फ बैठने की अलग व्यवस्था होती है।

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