भारत-पाकिस्तान की टीमें क्रिकेट फील्ड पर जब उतरती हैं तो माहौल हमेशा तनावपूर्ण रहता है। जब 1970, 80 और 90 के दशक में भारत और पाकिस्तान की टीमें एकदूसरे के खिलाफ खेलती थीं तो खिलाड़ियों के बीच भी कई बार गहमागहमी देखने को मिलती थी। 1978 में बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में तो टीम इंडिया ने पड़ोसी मुल्क की बेईमानी से तंग आकर मैदान छोड़ने तक का फैसला लिया था और वॉकआउट कर दिया था।

भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच मैदान पर होने वाली बहसबाजी और लड़ाइयों के भी काफी किस्से हैं। गौतम गंभीर, शाहिद अफरीदी, कामरान अकमल और हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ियों के समय में भी मैदान पर खूब लड़ाइयां देखने को मिलीं। इस लेख में हम ऐसे ही कुछ किस्सों पर प्रकाश डालेंगे जो बताते हैं कि क्रिकेट के मैदान में भारत और पाकिस्तान के बीच अदावत पुरानी है।

क्रिकेट से दूर राजनीतिक मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान दोनों देश हमेशा विपरीत दिशा में रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई युद्ध भी हुए। पाकिस्तान की ओर से आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के कारण भारत से उसके संबंध कभी सामान्य नहीं रहे। हाल ही में पहलगाम घटना, ऑपरेशन सिंदूर और अब बांग्लादेश के विश्व कप से बाहर होने के मुद्दे के कारण माहौल और गर्मा चुका है।

पाकिस्तान की सरकार ने भारत के खिलाफ खेलने से मना किया है। फिलहाल 15 फरवरी को टी20 वर्ल्ड कप 2026 में होने वाले भारत बनाम पाकिस्तान मैच पर सस्पेंस है। इन सभी विवादों के बीच जानेंगे कि वे कौन-कौन से पल थे जब भारत और पाकिस्तान की टीमों और उसके खिलाड़ियों के बीच मैदान पर गहमागहमी देखने को मिली।

1978 में भारतीय टीम ने किया था वॉकआउट

नवंबर 1978 में भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी। दो मैचों के बाद सीरीज 1-1 की बराबरी पर थी। तीसरे मुकाबले में पाकिस्तान ने पहले खेलते हुए सात विकेट खोकर 205 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम ने 37 ओवर्स में दो विकेट गंवाकर 183 रन बना लिए थे। मैच पाकिस्तान के हाथ से फिसल रहा था तभी विपक्षी टीम ने बेईमानी करनी शुरू कर दी। पाकिस्तानी टीम को अंपायर्स (तब आईसीसी की ओर से तटस्थ अंपायर रखने का कोई नियम नहीं था) का भी साथ मिला।

उन दिनों एक ओवर में ना ही दो बाउंसर होती थी और ना ही वाइड को लेकर नियम सख्त थे। पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने जब देखा कि मैच उनके हाथ से निकल रहा है तब विपक्षी टीम के कप्तान ने 38वें ओवर में सरफराज नवाज को गेंद थमाई। सरफराज नवाज ने उस ओवर में अंशुमान गायकवाड़ को लगातार चार बांउसर फेंकी और अंपायर ने एक भी बॉल को वाइड नहीं दिया।

अंपायरों और पाकिस्तान को बेईमानी करता देख तत्कालीन भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी को गुस्सा आ गया। उन्होंने मैदान पर जाकर बल्लेबाजों को ड्रेसिंग रूम में बुला लिया। इससे पाकिस्तान को वॉकओवर मिल गया। भारत ने सीरीज जरूर गंवाई, लेकिन आत्मसम्मान बरकरार रखा। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से बेईमानी की यह पहली घटना नहीं है। इस बार भी वह कुछ ऐसा ही कर रहा है। पाकिस्तान ने पहले मल्टीनेशन टूर्नामेंट में भारत के साथ तटस्थ मैदान पर खेलने को लेकर एमओयू साइन किया, लेकिन अब उसका ईमान डोल गया।

पाकिस्तान ने बांग्लादेश के मुद्दे में बेगानी शादी में अब्दुल्लाह दीवाने की तरह बतने हुए हस्तक्षेप किया और सभी अनुबंधों के खिलाफ जाकर भारत के खिलाफ खेलने से मना कर दिया, जबकि भारत बनाम पाकिस्तान मैच कोलंबो में 15 फरवरी को खेला जाना है। कोलंबो का मैदान दोनों देशों के लिए न्यूट्रल वेन्यू है। इससे पहले भारत ने पाकिस्तान की मेजबानी वाली चैंपियंस ट्रॉफी में दुबई में न्यूट्रल वेन्यू पर जाकर मुकाबला खेला था।

भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बीच मैदान पर हुईं लड़ाइयां

1- जावेद मियांदाद की मेंढक जम्प

1992 विश्व कप के मुकाबले में जावेद मियांदाद भारत के खिलाफ बल्लेबाजी कर रहे थे। भारत ने पाकिस्तान को 217 रन का लक्ष्य दिया था। जवाब में पाकिस्तान ने दो विकेट गंवा दिए थे। सचिन तेंदुलकर के हाथ में गेंद थी और भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे बार-बार अपील कर रहे थे। जावेद मियांदाद को यह बर्दाश्त नहीं हुआ।

इसके बाद दोनों के बीच शब्दों के बाण चले। जावेद मियांदाद ने अंपायर से शिकायत भी की। अगली गेंद पर जब जावेद मियांदाद दो रन दौड़कर पूरे कर रहे थे तो किरण मोरे ने उनके खिलाफ रनआउट की अपील की। इस पर जावेद मियांदाद इतना चिढ़ गए कि वह पिच पर मेंढक की तरह कूदने लगे। उनकी इस जम्प का किस्सा खूब वायरल हुआ और आज भी याद किया जाता है।

2- जब वेंकटेश प्रसाद और आमिर सोहेल उलझे

1996 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जब चिर प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान आमने-सामने थे, उसी वक्त भारतीय गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद और पाकिस्तानी बल्लेबाज आमिर सोहेल के बीच गहमागहमी देखने को मिली। पाकिस्तान 287 के लक्ष्य का पीछा कर रहा था। पाकिस्तानी खिलाड़ी आमिर सोहेल ने वेंकटेश प्रसाद की गेंद पर चौका मारा और वेंकटेश की ओर देखते हुए अंगुली से इशारा किया।

इसको देख वेंकटेश को बहुत गुस्सा आया, लेकिन उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दी और सही समय का इंतजार किया। इंतजार का फल वेंकटेश के लिए मीठा था। वेंकटेश प्रसाद ने अगली ही गेंद पर आमिर सोहेल को क्लीन बोल्ड कर दिया। उसके बाद वेंकटेश प्रसाद ने आमिर सोहेल को उन्हीं के अंदाज में अंगुली दिखाते हुए पवेलियन लौटने का इशारा किया। यह वाकया काफी चर्चा का विषय बना। आज 30 साल बाद भी याद किया जाता है।

3- गौतम गंभीर-शाहिद अफरीदी की भिड़ंत

भारत और पाकिस्तान के बीच 2007 में कानपुर में खेले गए वनडे मैच के दौरान गौतम गंभीर और शाहिद आफरीदी एक दूसरे से भिड़ गए थे। उस वक्त हुआ यह था कि गौतम गंभीर ने शाहिद अफरीदी की एक गेंद पर चौका लगाया और अगली ही गेंद पर सिंगल लेने के लिए दौड़ पड़े। रन लेते वक्त अफरीदी उनके रास्ते में आ गए और दोनों के बीच टक्कर हो गई थी। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच जमकर नोंक-झोंक हुई थी।

4- गौतम गंभीर और कामरान अकमल के बीच नोक-झोंक

2010 एशिया कप में जब भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला हो रहा था, तभी भारतीय बल्लेबाज गौतम गंभीर और पाकिस्तानी विकेटकीपर कामरान अकमल के बीच नोक-झोंक हुई। यह मुकाबला श्रीलंका के दाम्बुला में था। सईद अजमल की एक गेंद गौतम गंभीर के बैट को मिस करते हुए विकेटकीपर कामरान अकमल के हाथों में गई। इसके बाद कामरान अपील करते-करते पिच तक आ पहुंचे।

हालांकि, अंपायर ने अपील को नकार दिया, लेकिन ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान गंभीर और कामरान में झड़प हो गई। दोनों खिलाड़ी एक दूसरे के काफी करीब पहुंच गए थे। साथी खिलाड़ियों और अंपायर्स के बीच-बचाव से मामला शांत हुआ।

गौतम गंभीर वर्तमान में भारत के कोच हैं और एशिया कप के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ मैच में नो हैंडशेक विवाद के बीच भी वह चर्चा में रहे थे। अब टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अगर भारत और पाकिस्तान के बीच मैच खेला जाता है तो गंभीर पर नजरें टिकी रहेंगी।

5- हरभजन सिंह-शोएब अख्तर में बहस

एशिया कप 2010 में भारत और पाकिस्तान मैच के दौरान हरभजन सिंह और शोएब अख्तर के बीच बहस का मुद्दा काफी गर्माया था। हरभजन ने शोएब के ऊपर छक्का लगाया था। इससे शोएब अख्तर खीज उठे और उन्होंने भज्जी को कुछ कहा। इसके बाद दोनों के बीच शब्दों के बाण चले। फिर जब मैच खत्म हुआ उस वक्त हरभजन ने जीत का जश्न आक्रामक तौर पर मनाया। उसके बाद शोएब ने इशारा किया और जाने को कहा।

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