भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ दिनों बाद, बांग्लादेश ने मंगलवार को अमेरिका की कई कड़ी मांगों को मान लिया है।इन समझौतों में गेहूं, सोया, कपास और मक्का जैसे 3.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद, 15 सालों में 15 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पादों की खरीद और कुछ वस्त्र और परिधान वस्तुओं पर जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ के बदले विमानों की खरीद शामिल है। अमेरिका ने बांग्लादेश पर रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 19% कर दिया है जबकि भारत पर उसका शुल्क घटाकर 18% कर दिया गया है।
बांग्लादेश में आम चुनाव के बीच भारत द्वारा ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ किए गए कई व्यापार समझौतों के बाद हलचल मच गई है। इन समझौतों से कपड़ा और जूता जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष रूप से लाभ होगा। यह बांग्लादेश के लिए चिंता का विषय है क्योंकि चीन के बाद बांग्लादेश विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है। यह क्षेत्र ढाका के लिए विदेशी मुद्रा का प्रमुख स्रोत भी है। अमेरिका से कच्चे माल, विशेष रूप से कपास का अधिक आयात, भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है जो वर्तमान में बांग्लादेश का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।
बांग्लादेश और अमेरिका के बीच समझौता
व्हाइट हाउस की ओर से एक घोषणा की गयी जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश और अमेरिका के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत वस्त्रों के संबंध में अमेरिका कोटा की शर्त पर रेसिप्रोकल टैरिफ को जीरो कर देगा। यह कोटा कितना होगा फिलहाल इसकी जानकारी नहीं दी गयी है। अमेरिका-बांग्लादेश समझौते के बाद मंगलवार को गोकलदास एक्सपोर्ट्स, केपीआर मिल, अरविंद पर्ल ग्लोबल इंडस्ट्रीज सहित कपड़ा निर्यातकों के शेयरों में 5% तक की गिरावट आई।
बांग्लादेश-अमेरिका के संयुक्त बयान में कहा गया है, “अमेरिका एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है जिसके तहत बांग्लादेश से आयातित कुछ वस्त्रों और परिधानों पर जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ लागू होगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत बांग्लादेश से आयातित वस्त्रों और परिधानों की एक निश्चित मात्रा इस कम शुल्क दर पर अमेरिका आ सकेगी लेकिन यह मात्रा अमेरिका से निर्यात किए जाने वाले वस्त्रों, जैसे कि अमेरिका में उत्पादित कपास और मानव निर्मित फाइबर वस्त्रों की मात्रा के आधार पर निर्धारित की जाएगी।” अमेरिका से कच्चे माल, विशेष रूप से कपास का अधिक आयात, भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है जो वर्तमान में बांग्लादेश का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।
बांग्लादेश भी यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए प्रयासरत
भारत द्वारा यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते के बाद बांग्लादेश भी यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए प्रयासरत है। 2024 में, यूरोपीय संघ के वस्त्र और परिधान आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 5% थी जबकि चीन सबसे आगे (28%), उसके बाद बांग्लादेश (22%), तुर्की (11%), वियतनाम (6%) और भारत का स्थान था। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने 1 फरवरी को, सबसे कम विकसित देश (LDC) का दर्जा समाप्त होने के बाद, यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वार्ता को जल्द शुरू करने का आह्वान किया।
बांग्लादेश और भारत के बीच हुए व्यापार समझौते ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं जब पिछले कुछ महीनों में नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंध बिगड़ गए हैं। पिछले साल अप्रैल में, भारत ने बांग्लादेश के निर्यात माल के लिए ट्रांसशिपमेंट सुविधा समाप्त कर दी थी। 2020 में, भारत ने बांग्लादेश से तीसरे देशों को निर्यात माल के ट्रांसशिपमेंट की अनुमति दी थी जिसके तहत भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों तक जाने वाले भारतीय भूमि सीमा शुल्क केंद्रों का उपयोग किया जाता था। इससे भूटान, नेपाल और म्यांमार जैसे देशों को बांग्लादेश के निर्यात के लिए आसान रास्ता मिला था।
भारत-बांग्लादेश संबंध
यह घटना मुहम्मद यूनुस के उस बयान के बाद घटी जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्वोत्तर भारत चारों ओर से भू-भाग से घिरा हुआ है इसलिए ढाका ही इस पूरे क्षेत्र के लिए समुद्र का एकमात्र संरक्षक है। इस बयान को व्यापक रूप से ढाका द्वारा पूर्वोत्तर तक पहुंच पर अपना दबदबा कायम करने के प्रयास के रूप में देखा गया जो दिल्ली के लिए चिंता का विषय था। यूनुस द्वारा बीजिंग को एक नए रणनीतिक साझेदार के रूप में पेश करने के प्रयासों ने पहले से ही तनावपूर्ण भारत-बांग्लादेश संबंधों को और जटिल बना दिया था।
पिछले डेढ़ दशक में, भारत ने बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर तक पहुंचने के लिए ढाका में शेख हसीना सरकार के साथ बातचीत करने का प्रयास किया। हालाँकि, हसीना के सत्ता से बेदखल होने और यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद, ये योजनाएं विफल हो गईं।
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