दुनिया ने कई शहरों को बनते, बिखरते और मिटते देखा है। सभ्यताएं आती हैं, खत्म हो जाती हैं और इतिहास के पन्नों में उनकी दास्तान कैद रह जाती है। लेकिन कुछ शहर ऐसे भी होते हैं जो बार-बार मिटते हैं और फिर दोबारा खड़े हो जाते हैं। दुनिया का सबसे पुराना शहर अपने साथ ऐसी ही कहानी लेकर आता है। इतिहासकारों के मुताबिक यह शहर 11 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। लेकिन आज भी इसे ‘जिंदा शहर’ कहा जाता है क्योंकि हजारों सालों में सभ्यताएं बदलीं, साम्राज्य बदले, लेकिन इस शहर ने हर बार खुद को फिर से खड़ा कर लिया। हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे पुराने शहर जेरिको की।

जेरिको वर्तमान में फिलिस्तीन के वेस्ट बैंक में स्थित है। यह समुद्र तल से करीब 850 फीट नीचे बसा हुआ है। कई इतिहासकार इसे दुनिया का सबसे निचला शहर भी मानते हैं।

इतिहासकार बताते हैं कि दुनिया के सबसे गर्म शहरों में जेरिको का नाम शामिल किया जाता है। चारों तरफ फैले सूखे रेगिस्तान के बीच यह शहर किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिस रेगिस्तान में इंसानी बसावट की कल्पना करना भी मुश्किल था, वहां कुदरत का एक करिश्मा मौजूद था- एन एस-सुल्तान (Ein as-Sultan) का झरना। इस एक झरने ने बेजान से पड़े जेरिको को जीवित कर दिया यही झरना हजारों साल पहले इस इलाके की जिंदगी बन गया।

यह बात भी करीब 11 हजार साल पुरानी है जब इंसान लगातार इधर-उधर भटकता रहता था और उसका कोई स्थायी ठिकाना नहीं था। लेकिन जेरिको में पानी मिलने की वजह से स्थायी बसावट को पहली बार मौका मिला।

उस दौर में इंसान शिकार कर और जंगलों से भोजन जुटाकर जीवन चलाता था। लेकिन जेरिको में लोगों ने पहली बार खेती शुरू की, भोजन को जमा करना सीखा और स्थायी घर बनाए। कहा जा सकता है कि इंसानी सभ्यता की यात्रा में जेरिको वो जगह थी जिसने इंसानों को भटकाव से रोका और बसना सिखा दिया।

जेरिको को जिंदा शहर इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि 11 हजार साल पहले ही यहां व्यापार की नींव भी पड़ गई थी। ये शहर समय से आगे सोचता था। इसका कारण सिर्फ रेगिस्तान में पानी होना नहीं था। प्राचीन काल से व्यापार ने भी जेरिको को जिंदा बनाए रखा। इतिहासकार बताते हैं कि जेरिको व्यापारिक रास्तों का एक अहम चौराहा था जहां नमक, गंधक और दूसरे पत्थरों का बड़े स्तर पर व्यापार होता था।

पुरातत्व विभाग की खुदाई में ऐसे कई सबूत मिले हैं जिन्होंने जेरिको की प्राचीन कहानी को दुनिया के सामने रखा। जमीन के नीचे करीब 70 प्राचीन घरों के अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों से यह साफ होता है कि जेरिको कई बार बसा और कई बार उजड़ा, लेकिन हजारों साल तक आबाद रहा। इतिहासकार बताते हैं कि उस दौर में यहां गोल आकार के घर बनाए जाते थे। इन्हें मिट्टी और भूसे से तैयार किया जाता था।

तकनीक के मामले में भी जेरिको अपने समय से आगे माना जाता है। पुरातत्वविदों को खुदाई में प्रागैतिहासिक मिट्टी के बर्तन मिले हैं। इससे पता चलता है कि यहां एक संगठित समाज विकसित हो चुका था। लोग भोजन को सुरक्षित रखने और पकाने की तकनीक सीख चुके थे।

इतिहासकार मानते हैं कि जेरिको पहुंची मानव सभ्यता धार्मिक और आध्यात्मिक विश्वासों से भी जुड़ी हुई थी। खुदाई में हजारों साल पुरानी ऐसी खोपड़ियां मिली हैं जिन पर जिप्सम प्लास्टर चढ़ाया गया था और आंखों की जगह सीपियां लगाई गई थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि इंसान उस समय भी मृत्यु के बाद के जीवन के बारे में सोचता था और पूर्वजों की पूजा जैसी मान्यताएं मौजूद थीं।

इसके बाद करीब 3000 BCE से 1500 BCE के बीच जेरिको में कनानी सभ्यता ने आकार लिया। इतिहासकार मानते हैं कि इस कालखंड तक जेरिको व्यापार का बड़ा केंद्र बन चुका था। इसके बाद फारसी और हेलेनिस्टिक दौर आया जब यहां पानी के लिए नहरें और चैनल बनाए गए।

जेरिको का एक और बड़ा इतिहास बाइबल से जुड़ा हुआ है। बहस इस बात को लेकर है कि यहां हुई तबाही को प्राकृतिक आपदा माना जाए या फिर बाइबल में वर्णित घटनाओं से जोड़ा जाए।

बाइबल के मुताबिक जब इस्राएली जोशुआ के नेतृत्व में जॉर्डन नदी पार कर केनान पहुंचे तो उनके रास्ते में जेरिको सबसे बड़ा शहर था। शहर के चारों ओर ऊंची और मजबूत दीवारें थीं। बाइबल के अनुसार, ईश्वर ने जोशुआ को आदेश दिया था कि इस्राएली सेना छह दिनों तक शहर की दीवारों के चारों ओर चक्कर लगाए और सातवें दिन मेढ़ों के सींग से बनी तुरहियां बजाए। ऐसी मान्यता है कि तुरहियों की आवाज और लोगों के शोर के बाद जेरिको की विशाल दीवारें गिर गई थीं।

जोशुआ 6:26 में लिखा है: ईश्वर के सामने वो शख्स शापित होगा जो इस शहर को दोबारा से बसाने का प्रयास करेगा

बाइबल के अनुसार, जो व्यक्ति इसकी नींव रखेगा उसका पहला बेटा मरेगा और जो इसके दरवाजे खड़े करेगा उसका सबसे छोटा बेटा मर जाएगा। इसी वजह से जेरिको को ‘शापित शहर कहकर भी संबोधित किया गया है।

हालांकि इतिहासकारों को खुदाई के दौरान जेरिको में गिरी हुई दीवारें, जली हुई लकड़ी और भीषण भूकंप के निशान मिले हैं। कुछ लोग इन घटनाओं को बाइबल की कहानी से जोड़ते हैं जबकि कई इतिहासकार इसे प्राकृतिक आपदा मानते हैं।

जेरिको की दीवारें भी अपने भीतर अलग कहानी समेटे हुए हैं। इतिहासकारों के मुताबिक, 8000 BCE तक यह बस्ती करीब 40 हजार वर्ग मीटर में फैल चुकी थी। पूरी बस्ती 3.6 मीटर ऊंची और 1.8 मीटर चौड़ी पत्थर की दीवारों से घिरी हुई थी। इसके भीतर 8.5 मीटर ऊंचा और 9 मीटर चौड़ा पत्थर का टावर भी मौजूद था। लंबे शोध के बाद इतिहासकार इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि जेरिको को बाढ़ से बचाने के लिए इन दीवारों का निर्माण किया गया था।

इतिहास में दर्ज दुनिया का सबसे पुराना शहर आज आधुनिक रूप ले चुका है। UNESCO ने भी इसकी ऐतिहासिक विरासत को मान्यता दी है। पुराने मिट्टी के घरों के अवशेष आज भी लोगों को यहां का इतिहास याद दिलाते हैं, लेकिन उनके बीच आधुनिक इमारतें और नई जिंदगी भी सांस ले रही है।