नवंबर, 2024 में हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने वाली बीजेपी की नजर अब इसके पड़ोसी राज्य पंजाब पर है। पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव होने हैं और पार्टी की कोशिश पंजाब में एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में खुद को स्थापित करने की है।

पंजाब के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी की तैयारियों में जो सबसे बड़ी बात दिखाई दे रही है, वह यह कि बीजेपी हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को लगातार पंजाब में घुमा रही है।

नायब सिंह सैनी को पंजाब की राजनीति में सक्रिय करने के पीछे बीजेपी की क्या रणनीति है, आइए इस बारे में बात करते हैं।

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हरियाणा के पिछले विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी के लिए चुनावी लड़ाई बेहद मुश्किल मानी जा रही थी तब भी पार्टी ने वहां सरकार बनाई थी। यह माना गया था कि इसके पीछे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का भी बहुत बड़ा योगदान है। इससे सैनी पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा बढ़ा है।

नायब सिंह सैनी पगड़ी पहनकर पंजाब में कई कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और इस दौरान उन्होंने थोड़ा पंजाबी और थोड़ा हरियाणवी भाषा का मिला-जुला इस्तेमाल कर लोगों के बीच पहुंचने की कोशिश की है। सैनी पिछले कुछ महीनों में पंजाब के कई गांवों और कस्बों में गए हैं और उन्होंने मंदिरों और गुरुद्वारों का दौरा किया है। अब तक वे गुरुद्वारा हरमंदिर साहिब, गुरुद्वारा आनंदपुर साहिब, माछीवाड़ा में गुरुद्वारा चरण कंवल साहिब और गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब जा चुके हैं।

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मजबूत हैं दोनों प्रदेशों के रिश्ते

पंजाब और हरियाणा के बीच एक लंबा बॉर्डर है। दोनों प्रदेशों के बीच शादी-विवाह, नाते-रिश्तेदारी के साथ ही व्यापार और राजनीतिक संबंध भी काफी मजबूत हैं। हालांकि पानी के बंटवारे, स्थायी राजधानी जैसे मुद्दों को लेकर दोनों प्रदेश आमने-सामने भी हैं।

किसान आंदोलन के दौरान दोनों प्रदेशों के किसानों ने एकजुटता दिखाई थी। हरियाणा के सिरसा, अंबाला, कुरुक्षेत्र आदि इलाकों में पंजाबी समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है।

उधम सिंह के जन्मस्थान पहुंचे थे सैनी

जुलाई, 2025 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी संगरूर जिले के सुनाम आए थे। उनका यह दौरा बहुत अहम था क्योंकि सुनाम शहीद उधम सिंह का जन्मस्थान है। कहा जाता है कि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने सैनी से पंजाब के ज्यादा से ज्यादा दौरे करने के लिए कहा है।

पंजाब को बताया हरियाणा का ‘बड़ा भाई’

पंजाब में अपने कार्यक्रमों में सैनी ने आम आदमी पार्टी की सरकार और उसके मुख्यमंत्री भगवंत मान के कामकाज की आलोचना की है। सैनी ने पंजाब को हरियाणा का ‘बड़ा भाई’ बताया है। उन्होंने यह भी कहा है कि पंजाब हरियाणा का सिर्फ पड़ोसी राज्य नहीं है बल्कि हरियाणा के साथ उसका खून का रिश्ता है। सैनी का कहना है कि पंजाब में बीजेपी की सरकार बनने पर लोगों से किए गए वादों को पूरा किया जाएगा।

ओबीसी समुदाय से आते हैं सैनी

नायब सिंह सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं। पंजाब की राजनीति में ओबीसी एक ताकतवर समुदाय है। पंजाब में इस वर्ग की आबादी 31% के आसपास है। एक अहम बात यह भी है कि नायब सिंह सैनी की मां कुलवंत कौर सिख समुदाय से हैं।

सैनी पंजाब में बड़े पैमाने पर मनाए जाने वाले माघी मेलों में शामिल हुए थे। बीजेपी उनके जरिए राज्य में अपनी राजनीतिक जड़ों को मजबूर करने की कोशिश कर रही है। बीजेपी को पंजाब में राजनीतिक चमत्कार की उम्मीद इसलिए भी है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में उसका वोट फीसद बढ़ा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में 9.63% वोट मिले थे जबकि 2024 में यह आंकड़ा लगभग दो गुना- 18.56% हो गया था।

पंजाब में बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग

बीजेपी पंजाब में सोशल इंजीनियरिंग के जरिए दूसरे तबकों पर भी फोकस कर रही है। जैसे- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में जालंधर के डेरा सचखंड बल्लां में गए थे। डेरा सचखंड बल्लां पंजाब में दलित समुदाय में आने वाले रविदासिया समुदाय का एक बड़ा धार्मिक केंद्र है।

हाल ही में नायब सिंह सैनी को लेकर एक विवाद तब सामने आया जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की विधायक नरेंद्र कौर भराज ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें बीजेपी के साथ आने और टिकट देने के लिए कहा। हालांकि सैनी ने ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया लेकिन इससे पता चलता है कि सैनी पंजाब बीजेपी के लिए राजनीतिक जमीन बनाने में जुटे हैं।

सिख समुदाय में सैनी बिरादरी के भी लोग हैं। पंजाब में ऐसे सैनी बहुल इलाके- डेरा बस्सी, राजपुरा और पटियाला ग्रामीण आदि हैं। बीजेपी की नजर खासकर हरियाणा से लगते हुए पंजाब के जिलों पर है। बीजेपी को उम्मीद है कि वहां वह कुछ राजनीतिक बढ़त हासिल कर सकती है और सैनी के रूप में उसे एक बड़ा चेहरा मिल गया है।

पंजाब में ‘अकेली’ है बीजेपी

बात पंजाब में बीजेपी की मुश्किल की करें तो उसके पास राज्य में कोई मजबूत सहयोगी दल नहीं है। पंजाब में लंबे वक्त तक बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन रहा। कृषि कानूनों के चलते दोनों अलग हो गए थे। पिछले कुछ महीनों में बीजेपी और अकाली दल के भीतर इस बात की मांग उठी है कि दोनों दलों को फिर से एक साथ आ जाना चाहिए लेकिन ताजा हालात में इसकी कोई संभावना नहीं दिखाई देती।

सीधी बात यह है कि बीजेपी को अगर पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करना है तो उसे सोशल इंजीनियरिंग के साथ ही कुछ नए प्रयोग भी करने होंगे। बीजेपी सैनी को पंजाब में इसलिए भी आगे कर रही है क्योंकि ऐसा करने से उसके पाले में ओबीसी वोट, गैर-जाट सिख और हिंदू वोट तो आएं ही, उसे हरियाणा से लगते जिलों में भी फायदा मिले।

देखना होगा कि क्या बीजेपी को नायब सिंह सैनी को पंजाब में आगे करने से कोई राजनीतिक फायदा मिलेगा?

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