उत्तर प्रदेश में हादसों में कमी लाने के मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद गाजियाबाद की सड़कों पर होने वाले हादसों में कमी नहीं आ रही है। शासन द्वारा जारी ताजा आंकड़े जिले की यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, सड़क हादसों के मामले में गाजियाबाद प्रदेश में 15वें पायदान पर पहुंच गया है, जो न केवल चिंताजनक है बल्कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा करता है।

आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति बेहद भयावह नजर आती है। इस वर्ष की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च तक के आंकड़ों में पिछले साल के मुकाबले सड़क हादसों और उनमें जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में 16 फीसद तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल के शुरुआती तीन महीनों में जिले में कुल 252 सड़क हादसे हुए, जिनमें 105 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यदि इसकी तुलना पिछले वर्ष की समान अवधि से की जाए, तो बीते साल जनवरी से मार्च के बीच हादसों की संख्या 248 थी, लेकिन उस वक्त मौतों का आंकड़ा 90 था।

इस बार मौतों की संख्या का 90 से बढ़कर 105 तक पहुंच जाना यह दर्शाता है कि हादसे न केवल बढ़े हैं, बल्कि वे अब और अधिक जानलेवा हो चुके हैं। एक ओर जहां प्रदेश सरकार सड़क सुरक्षा माह और विभिन्न जागरूकता अभियानों के माध्यम से हादसों में कमी लाने का प्रयास कर रही है।

वहीं, गाजियाबाद के जिम्मेदार अधिकारी इन लक्ष्यों को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पड़ोसी जिले गौतमबुद्धनगर ने जहां इस सूची में 53वें स्थान पर रहकर बेहतर स्थिति दर्शाई है। वहीं, राजधानी लखनऊ पांचवें स्थान पर है और वहां 495 हादसों में 195 मौतें दर्ज की गई हैं।

प्रदेश की राजधानी लखनऊ की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नहीं है, जो पांचवें स्थान पर काबिज है और वहां 495 हादसों में 195 मौतें दर्ज की गई हैं। गाजियाबाद में मौतों के आंकड़ों में आया उछाल यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या जिले में दुर्घटना संभावित क्षेत्र की पहचान, तेज रफ्तार पर लगाम व यातायात नियमों का पालन महज कागजों तक ही सीमित है।

यह भी पढ़ें – गाजियाबाद का लोनी बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर, PM2.5 स्तर WHO सीमा से 22 गुना ज्यादा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी इलाके का उल्लेख रामायण में उस स्थान के तौर पर किया गया है जहां लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पणखा की नाक काटी थी, लेकिन इन दिनों यह शहर दुनिया का सबसे प्रदूषित स्थान होने की वजह से चर्चा में है। आईक्यूएयर द्वारा जारी विश्व वायु गुणवत्ता रपट-2025 में 143 देशों के 9,400 से अधिक शहरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि लोनी में पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित सुरक्षित सीमा से 22 गुना अधिक है। कागजों पर यह आंकड़ा चिंताजनक प्रतीत होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोनी में सब कुछ सामान्य है। पूरी खबर पढ़ें…