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भारत के कानून मंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक को झेलना पड़ा है जातिगत भेदभाव, जानें किसके साथ क्या-क्या हुआ?

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को प्रदेश का मुखिया रहते हुए छुआछूत का सामना करना पड़ा था।

भारत के कानून मंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक को झेलना पड़ा है जातिगत भेदभाव, जानें किसके साथ क्या-क्या हुआ?
डॉ अंबेडकर अपने जीवन के अंतिम क्षण तक छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करते रहे। (Photo Credit- Express archive)

राजस्थान में 13 अगस्त को क्लास तीन के स्टूडेंट इंद्र की मौत हो गई थी। आरोप है कि स्कूल के शिक्षक ने पानी का घड़ा छूने पर दलित छात्र को इतना पीटा की उसकी मौत हो गई। सोशल मीडिया पर इस घटना के खिलाफ लोगों में गुस्सा और क्षोभ देखा जा रहा है। इस मामले पर ट्वीट करते हुए  लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने अपने पिता और पूर्व उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम के साथ हुए छुआछूत की घटना को याद किया।

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उन्होंने लिखा, ”100 साल पहले मेरे पिता बाबू जगजीवन राम को स्कूल में उस सुराही से पानी पीने से रोका गया था जो सवर्ण हिंदुओं के लिए हुआ करती थी। यह चमत्कार था कि वह जिंदा रहे। आज, नौ साल के दलित लड़के को उसी वजह से मार दिया गया। आजादी के 75 साल बाद जाति व्यवस्था हमारी सबसे बड़ी दुश्मन है।” एक इंटरव्यू में मीरा कुमार ने बताया कि लंदन में जाति के आधार पर उनके साथ भी भेदभाव हो चुका है।

आइए जानते है भारत उन दलित नेताओं के बारे में जिन्हें ऊंचा पद हासिल करने के बाद भी जातिगत भेदभाव और छुआछूत का शिकार होना पड़ा:

नौकर ने अंबेडकर को खाना देने से किया इनकार

डॉ भीमराव अंबेडकर अपने जमाने में संभवत भारत के सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति थे। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स दोनों से पीएचडी की थी। जब भारत आजाद हुआ तो वह संविधान की ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष और कानून मंत्री बने। हालांकि उनकी ये उपलब्धियां उन्हें जातिगत भेदभाव और छुआछूत से नहीं बचा पायीं।

डॉ अंबेडकर का जन्म महाराष्ट्र के महार जाति में हुआ था। हिंदू वर्ण व्यवस्था के मुताबिक यह जाति अछूतों की श्रेणी में आती है। आजादी के 10 साल पहले ही अंबेडकर का नाम देश के चर्चित और प्रभावशाली लोगों में शामिल हो गया था। बावजूद इसके उन्हें साल 1945 में ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश से रोक दिया गया था। उसी साल कोलकाता में जब वह एक व्यक्ति के यहां मेहमान के तौर पर पहुंचे तो, नौकर ने उनकी जाति की वजह से खाना परोसने से मना कर दिया। अंबेडकर अपने जीवन के अंतिम क्षण तक छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करते रहे।

मंदिर में राष्ट्रपति कोविंद के साथ हुई बदसलूकी

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ भी भेदभाव का मामला सामने आ चुका है। कोविंद भारत के दूसरे दलित राष्ट्रपति हैं। मामला 18 मार्च 2918 का है, जब तत्कालीन राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के लिए गए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति के साथ मंदिर के सेवादारों ने कथित तौर बदसलूकी की थी। राष्ट्रपति और उनकी पत्नी यानी फर्स्ट लेडी जब मंदिर के गर्भ गृह में जा रही थी, तब उन्हें रोकने का प्रयास किया गया। जब राष्ट्रपति ने जगन्नाथ के सिंहासन के पास माथा टेकने की कोशिश की तो, वहाँ मौजूद सेवकों ने उनके लिए रास्ता नहीं छोड़ा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने 20 मार्च की बैठक में यह स्वीकार किया कि सेवादारों के एक समूह द्वारा मंदिर के गर्भगृह के पास धक्का-मुक्की की गई थी।

जीतन राम मांझी के साथ मंदिर में छुआछूत

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी महादलित समुदाय से आते हैं। मांझी को मुख्यमंत्री रहते हुए छुआछूत का सामना करना पड़ा था। उन्होंने मीडिया को बताया कि जब वह मुख्यमंत्री रहते हुए मधुबनी के एक मंदिर में पूजा के लिए गए थे, तो उनके पूजा करने के बाद मंदिर और मूर्ति को धो दिया गया था। साथ ही उस घर को भी धो दिया गया, जहां वो कुछ वक्त के लिए ठहरे थे।

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