लाइटहाउस जर्नलिज्म को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा एक वीडियो मिला। इस वीडियो में कई लोग सड़कों पर रैली निकालते हुए दिखाई दे रहे थे। यह दावा किया गया कि यह विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए ‘इक्विटी रेगुलेशन (2026)’ के खिलाफ था।
इन नियमों को यूजीसी द्वारा अधिसूचित किया गया था। हालांकि, भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने 29 जनवरी, 2026 को ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026’ पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने इन नियमों के अस्पष्ट और इनका दुरुपयोग होने की चिंता जताई है। इस बीच 2012 के भेदभाव विरोधी नियम लागू रहेंगे ।
जांच के दौरान हमने पाया कि शेयर किया जा रहा यह वीडियो यूजीसी विरोध प्रदर्शनों से संबंधित नहीं था। वायरल दावा भ्रामक है ।
क्या है दावा?
X यूजर आशीष व्यास ने अपने प्रोफाइल पर भ्रामक दावे के साथ वायरल वीडियो शेयर किया ।
अन्य यूजर्स भी इसी तरह के दावों के साथ वही वीडियो साझा कर रहे हैं।
जांच पडताल:
हमने वायरल वीडियो को डाउनलोड किया और की-फ्रेम्स प्राप्त करने के लिए इसे ‘InVid’ टूल पर अपलोड किया। इन की-फ्रेम्स का बारीकी से निरीक्षण करने पर वीडियो में एक ट्रक और उस पर लगा एक बैनर दिखाई दिया।
इसके बाद, हमने वीडियो से प्राप्त की-फ्रेम्स पर ‘गूगल रिवर्स इमेज सर्च’ चलाया ।

इससे हमें कई ऐसे ही वीडियो और फोटो मिले जिनमें वही की-फ्रेम्स मौजूद थे।

हमें 14 जनवरी की एक पोस्ट मिली, जिसके कैप्शन में लिखा था: “आज धोरीमन्ना में, मैंने बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना और गुड़ामालानी उपखंडों को बालोतरा जिले में शामिल करने के निर्णय के खिलाफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री हेमाराम चौधरी के नेतृत्व में आयोजित एक विशाल जन विरोध रैली में भाग लिया और जनता को संबोधित किया” ।
इस जन आंदोलन में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सचिन पायलट और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
हमें फेसबुक पर भी ऐसा ही एक वीडियो मिला:

इसका कैप्शन था: पुनर्गठन के विरोध में भारी भीड़ उमड़ी; धोरीमन्ना की सड़कें भी सभा को संभालने के लिए छोटी लगने लगीं।
हमें ऐसी कई पोस्ट मिलीं जिनमें वायरल वीडियो में दिखने वाले ट्रक को देखा जा सकता है और उस पर 3 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की तारीख का उल्लेख है ।
निष्कर्ष: वायरल वीडियो यूजीसी (UGC) नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नहीं है। यह एक पुराना वीडियो है जो बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना और गुड़ामालानी उपखंडों को बालोतरा जिले में शामिल करने के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को दिखाता है। वायरल दावा भ्रामक है।
