झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जारी है। 5 अगस्त को ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल पब्लिश हुआ था। हालांकि इसके बाद बीजेपी के कई बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) फॉर्म 7 लेकर आ रहे हैं और कुछ वोटरों को हटाने की मांग कर रहे है। सबसे अहम बात यह है कि जिन नामों पर वे आपत्ति जता रहे हैं, उसमे से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय से हैं। इनमें अब्दुल मन्नान खान, मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद शफीक, बीबी बसिलन, मोहम्मद असलम शामिल हैं, जो झारखंड के गोड्डा जिले के हैं। पिछले एक महीने से यही एक पैटर्न सामने आया है।

BLO ने फॉर्म लेने से किया मना

द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में पता चला है कि करीब चार बूथों पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने इन आवेदनों को लेने से मना कर दिया है। BLO ने उन्हें प्रोसेस के हिसाब से सही नहीं बताया है। BLO राज्य सरकार के कर्मचारी हैं और झारखंड में अभी JMM-कांग्रेस गठबंधन की सरकार है।

बीजेपी ने शिकायत की है कि BLO फॉर्म स्वीकार न करने के लिए दोषी हैं, जिससे राजनीतिक हलचल मची हुई है। ऐसे में जमीनी चुनाव अधिकारियों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव पैदा हो गया है, जो अब चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के ऑफिस तक पहुंच गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने कुछ ऐसे मतदाताओं को ट्रैक किया जिनके नाम हटाए जाने थे और पाया कि वे न केवल पीढ़ियों से गांव में मौजूद हैं, बल्कि उनमें से कई 2003 में सूची के इंटेंसिव रिवीजन में वेरिफाइड भी हैं। चुनाव आयोग के अपने नियमों के तहत इससे उन्हें चल रहे SIR में शामिल करना आसान हो जाना चाहिए।

बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट्स ने जताई आपत्ति

उदाहरण के लिए गोड्डा के महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर 9 में अकेले एक बूथ पर बीजेपी के एक BLA संजीव कुमार रोशन ने मतदाताओं के खिलाफ ऐसे 25 फॉर्म फाइल किए थे। इंडियन एक्सप्रेस ने इनमें से 8 मतदाताओं से बात की और उन सभी ने वोट देने से वंचित होने या सरकारी योजनाओं के रोस्टर से कट जाने का डर जताया। पास के एक बूथ पर एक BLA ऐसे 75 फ़ॉर्म लेकर आया और जब बूथ लेवल ऑफ़िसर (BLO) ने उससे पूछताछ की, तो उसने खुद माना कि उसने फॉर्म को तुरंत वहीं जला दिया।

गोड्डा डिवीजन के बसंतराय के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफ़िसर (BDO) श्रीमन मरांडी के तहत ये बूथ आते हैं। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (ERO) के तौर पर उन्हें चार बूथों (महेशटिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बाघाकोल) से शिकायतें मिली थीं। मरांडी ने कहा कि फ़ील्ड वेरिफ़िकेशन के बाद एक जांच रिपोर्ट जमा की जाएगी, साथ ही BLO को फ़ॉर्म पर कार्रवाई न करने के लिए कहा गया था क्योंकि हमें फॉर्म का सोर्स नहीं पता था। उन्होंने कहा, “वे (BLA) पहले SDO को या मुझे जांच करने के लिए कहकर एक लिखित शिकायत दे सकते थे।” इस मामले पर आरजेडी के गोड्डा विधायक संजय प्रसाद यादव ने कहा कि उन्होंने श्रीमन मरांडी से बात की है और उन्हें बताया गया है कि कार्रवाई की जा रही है।

5 अगस्त को ड्राफ़्ट लिस्ट हुई थी पब्लिश

झारखंड में SIR की प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई थी और 5 अगस्त को एक ड्राफ़्ट लिस्ट पब्लिश की गई थी, जिसमें 16.48% वोटर्स (लगभग 43 लाख) के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। क्लेम और ऑब्जेक्शन का राउंड अभी चल रहा है और यह 4 सितंबर को खत्म होगा। फॉर्म 7 के जरिए नाम हटाने के लिए कई वजहों से कहा जा सकता है, जैसे कि एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड, डुप्लीकेट, भारतीय नागरिक न होने की वजह हो सकती है। आवेदक को कोई सबूत जमा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे एक डिक्लेरेशन पर साइन करना होगा जिसमें लिखा हो, “मैं अपनी पूरी जानकारी और विश्वास के अनुसार यह घोषणा करता/करती हूं। मुझे पता है कि ऐसा कोई बयान या डिक्लेरेशन देना जो झूठा हो और जिसके बारे में मुझे पता हो या मुझे विश्वास हो कि वह झूठा है या मुझे विश्वास नहीं है कि वह सच है, सज़ा के लायक है।”

महेशटिकरी की BLO अनीशा बानो ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीजेपी के एक BLA के पास लगभग 25 फॉर्म था, जो उसे लेकर आया था और वह ओरिजिनल नहीं थे। उन्होंने कहा, “BLA ने कहा कि ये फॉर्म उन वोटरों के लिए हैं जो गांव में नहीं हैं और बाद में ऐसे 50 और फॉर्म लाए जाएंगे और सभी फ़ॉर्म मे मुस्लिम वोटर थे। मैंने 25 फॉर्म ले लिए लेकिन बाद में BDO मरांडी ने BLO को बताया कि ऐसे दस्तावेज आधिकारिक फॉर्म नहीं हैं और उन्हें स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए मैंने बाकी फॉर्म लेने से मना कर दिया। जिन वोटरों के खिलाफ आपत्ति उठाई गई, उन सभी को 2003 के इलेक्टोरल रोल से मैप किया गया था।”

BLO का क्या कहना है?

वहीं पचुआ किता BLO मुख्तार ने कहा कि एक BLA उनके पास लगभग 75 फॉर्म 7 लेकर आया था, जो ब्लॉक ऑफिस से उन्हें आधिकारिक मिले फॉर्म से अलग थे। मुख्तार ने कहा, “BLA ने मुझसे पूछा कि फॉर्म किस लिए है और कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह नाम जोड़ने के लिए है। मैंने उनसे कहा कि बल्कि आपको गवाह बनाया जा रहा है कि इस व्यक्ति का नाम हटा दिया जाना चाहिए। मैंने फॉर्म नहीं लिए। 75 फॉर्म में लगभग सभी नाम मुसलमानों के थे और ज़्यादातर 2003 की लिस्ट से जुड़े थे। जिस BLA ने उन्हें 75 फॉर्म देने की कोशिश की थी, उसने सभी को जला दिया।”

परिवार पीढ़ियों से गांव में रह रहा है- वोटर

महेशटिकरी गांव में कई गांववालों ने बूथ नंबर 9 पर उनके खिलाफ एक साथ फॉर्म 7 जमा करने की शिकायत BDO मरांडी से की है। 70 साल के अब्दुल मन्नान खान उनमें से एक हैं। उन्होंने कहा कि वह और उनका परिवार पीढ़ियों से गांव में रह रहा है, और उनका नाम 2003 के रोल में था। उन्होंने कहा, “यह हमारा घर है और हम झारखंडी भी हैं। तो हमारे नाम कैसे हटाए जा सकते हैं? BLO बानो ने हमें भरोसा दिलाया है कि उनके नाम रहेंगे, लेकिन हमें डर है कि सरकारी फ़ायदे नहीं मिलेंगे।”

50 साल के मोहम्मद नौशाद ने कहा कि उनके दादा-दादी का नाम 2003 के इलेक्टोरल रोल में था, जबकि उन्होंने अपना बचपन महेशटिकरी में बिताया और मजदूरी करने के लिए घर छोड़ा था। नौशाद ने कहा कि वह झारखंड में वोट देते रहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं वहीं जाता हूं , जहां मुझे काम मिलता है। क्या होगा अगर हमारे नाम हटा दिए जाएं और हमें सरकारी फ़ायदे न मिलें? क्या होगा अगर हमें भारतीय नागरिक नहीं माना गया?”

नौशाद के पिता 80 साल के मोहम्मद शफीक ने कहा कि वह भी अपनी पत्नी 65 साल की बीबी बसीलन के साथ महेशटिकरी में रजिस्टर्ड वोटर हैं। उन्होंने कहा, “मैं 18 साल की उम्र से यहां वोट दे रहा हूं। हम इतने सालों से यहां हैं। हमारे पास खतियान (झारखंडी होने का ज़मीन का सबूत), हर रिकॉर्ड और कागज़ात हैं। अब अचानक एक रुकावट आ गई है।”

65 साल के मोहम्मद असलम, जो खुद भी एक मज़दूर हैं, उन्होंने कहा कि मैने और मेरे परिवार के सभी योग्य सदस्यों ने हमेशा गांव में वोट दिया है। फॉर्म 7 एप्लीकेशन पर उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि हम यहां के नहीं हैं। हम इतने पढ़े-लिखे नहीं हैं कि इसके नतीजे समझ सकें।”

वोटरों में डर

61 साल के मिर्ज़ा गालिब, जो दिल्ली के पास गाजियाबाद में काम करते हैं, लेकिन घर वापस आ गए हैं। उन्होंने कहा कि उनका जन्म महेशटिकरी में हुआ था और उन्होंने अपनी ज़्यादातर ज़िंदगी गांव में बिताई है। उन्होंने कहा कि सब कुछ यहीं है। करीब 45 साल के मजदूर शमीम ने कहा कि उन्हें अपने खिलाफ फॉर्म 7 एप्लीकेशन के बारे में तब पता चला जब एक आंगनवाड़ी वर्कर ने उन्हें बताया। उन्होंने कहा, “मेरे एप्लीकेशन के साथ ऑनलाइन सब कुछ ठीक है। मेरे पास रसीद भी है।”

शमीम ने कहा कि वह काम के लिए झारखंड से बाहर जाते हैं, लेकिन उनका परिवार राज्य में ही रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे पुरखे यहीं रहते थे। मेरे पिता और तीन भाई यहीं हैं। एक भाई बिहार में रहता है और उसका वोटर ID वहीं है। उसके अलावा हमारे आधार कार्ड, पते और सब कुछ झारखंड का है।”

मोहम्मद हसमुद्दीन करीब 60 साल के हैं और एक दिहाड़ी मजदूर हैं। उन्होंने कहा कि उनका बचपन महेशटिकरी में बीता, जहां उनके परिवार की जमीन है और खतियान भी है। उन्होंने कहा कि उनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में भी था और पहले गोड्डा में वोट दिया था। हसमुद्दीन ने कहा, “मेरे पिता, दादा और परदादा सभी इसी घर में रहे हैं। हमने अपना घर भी नहीं बदला है। दिल्ली में काम करने वाला बेटा भी वोट देने के लिए गांव आता है।”

बीजेपी का क्या है तर्क?

27 अगस्त को बीजेपी के झारखंड SIR कन्वीनर राकेश प्रसाद ने एडिशनल CEO को एक मेमोरेंडम दिया, जिसमें राज्य में खासकर साहिबगंज और गोड्डा ज़िलों में SIR प्रोसेस में गड़बड़ियों की शिकायत की गई थी। गोड्डा के मामले में बीजेपी ने दो बूथों के BLO पर अपने BLA द्वारा जमा किए गए फॉर्म 7 एप्लीकेशन को स्वीकार करने से मना करने का आरोप लगाया। बीजेपी ने पूछा कि बूथ नंबर 9, महेशटिकरी की BLO बानो ने अपने BLA की डिटेल्स कैसे पब्लिक कीं। बीजेपी ने दावा किया कि इससे BLA पर दबाव बना और उसे धमकियां मिलीं। बीजेपी BLA द्वारा जमा किए गए फॉर्म 7 के बारे में BLO की शिकायतों के बारे में पूछे जाने पर गोड्डा के पूर्व बीजेपी विधायक अमित कुमार मंडल ने कहा कि यह उनकी ज़िम्मेदारी का हिस्सा है और उन्हें इसकी ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें फॉर्म 6 (नए वोटर्स के लिए) और फॉर्म 8 (एंट्री में बदलाव या सुधार रिकॉर्ड करने के लिए) का इस्तेमाल शामिल है।

अमित मंडल ने कहा, “अगर किसी का नाम दो जगहों पर दिख रहा है, तो BLA नाम हटाने के लिए ऑब्जेक्शन उठा सकता है।” इस आरोप पर कि फॉर्म 7 डॉक्यूमेंट्स बल्क में बांटे जा रहे हैं, जिसमें एक BLA 75 फॉर्म तक जमा कर रहा है। अमित मंडल ने कहा कि एक BLA कितने एप्लीकेशन जमा कर सकता है, इसकी कोई तय लिमिट नहीं है और ऑब्जेक्शन को वेरिफाई करना इलेक्शन अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है।

BLO को स्वीकार करने होंगे फॉर्म- बीजेपी नेता

अमित मंडल ने यह भी कहा कि BLO को उस व्यक्ति के बारे में गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए जिसके खिलाफ ऑब्जेक्शन फाइल किए गए हैं। साथ ही संबंधित BLA के बारे में भी ऐसा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर BLO ने ऐसी जानकारी दी है, तो यह रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट का उल्लंघन हो सकता है।

झारखंड में 2024 के विधानसभा चुनाव में अमित मंडल गोड्डा से आरजेडी (JMM-कांग्रेस अलायंस का हिस्सा) के संजय यादव से 20,000 से ज़्यादा वोटों से हार गए थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में अमित मंडल ने संजय यादव को हराया था। हालांकि तब लगभग 4,500 वोटों के मामूली अंतर से फैसला हुआ था।

बीजेपी BLA संजीव कुमार रोशन ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें अमित मंडल ने करीब 25 फॉर्म 7 दिए और उन्हें BLO के पास जमा करने को कहा। रोशन के मुताबिक, “मंडल ने कहा कि अगर BLO फॉर्म ले लेता है, तो ठीक है। अगर नहीं, तो वापस ले आओ। महेशटिकरी के BLO के रिजेक्ट करने के बाद कुछ फॉर्म वापस मिले थे।”

वहीं मुख्तार को 75 फॉर्म 7 एप्लीकेशन जमा करने वाले BLA गनोरी मंडल ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें मुश्किल से ही पता था कि फॉर्म क्या है, और उन्होंने कन्फर्म किया कि जब उन्हें पता चला कि कुछ गड़बड़ है, तो उन्होंने सारे फॉर्म जला दिए। उन्होंने कहा, “हम मासूम और अनपढ़ लोग हैं। हमें BLO को जमा करने के लिए बीजेपी कैडर से फॉर्म मिले थे। मुझे लगा कि यह नाम जोड़ने का फॉर्म है।”

BDO मरांडी ने एक साथ ऑब्जेक्शन जमा करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “कोई भी ऑब्जेक्शन संबंधित परिवार को उठाना चाहिए या ठोस सबूत होने चाहिए।” श्रीमन मरांडी ने कहा कि शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि जिन वोटरों के नाम हटाने की मांग की गई है, उनमें से कुछ अपने रजिस्टर्ड पते पर रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर हटाने की रिक्वेस्ट के लिए फील्ड वेरिफिकेशन करेगा।

CEO ने क्या कहा?

झारखंड के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) के रवि कुमार ने कहा कि उन्होंने गोड्डा के असिस्टेंट ERO और डिप्टी कमिश्नर से बात की है और कोई गैर-कानूनी काम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि फॉर्म 7 के ज़रिए ऑब्जेक्शन फाइल किए गए थे और इन्हें एक साथ भी जमा किया जा सकता है।

CEO रवि कुमार ने कहा कि अगर BLA को लगता है कि कोई वोटर कई राज्यों में रजिस्टर्ड है, तो वे ऑब्जेक्शन फाइल कर सकते हैं। ऑब्जेक्शन फाइल करने में कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि BLO को फॉर्म रिजेक्ट नहीं करने चाहिए। उन्होंने कहा, “सबसे पहले, आपको AERO को बताना होगा। वे तय करेंगे कि क्या करना है। उसके बाद, आप ऑब्जर्वेशन रिपोर्ट में अपनी सिफारिश दें।”

बीजेपी पर जेएमएम का निशाना

पूरे मामले पर जेएमएम के लोकल ब्लॉक अध्यक्ष सुल्तान अहमद ने इन फॉर्म को मुस्लिम वोटरों को हटाने की BJP की साज़िश का हिस्सा बताया। कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि पार्टी झारखंड में SIR पर कड़ी नज़र रख रही है, ताकि फॉर्म 7 के ज़रिए नाम हटाने की किसी भी कोशिश पर नज़र रखी जा सके। उन्होंने कहा कि हम टारगेटेड नाम हटाने की किसी भी कोशिश की निंदा करते हैं।

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महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची सोमवार को जारी कर दी गई। हालांकि मतदाताओं ने ऑनलाइन सूची देखने और उसमें अपना नाम खोजने में दिक्कतों की शिकायत की। इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि नाम खोजने की सुविधा पर अभी काम चल रहा है और इसे मंगलवार शाम या बुधवार तक उपलब्ध करा दिया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर