उत्तराखंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (UTDB) ने जून 2023 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को जमीन उपलब्ध कराई थी। यह कंपनी पतंजलि के को-फाउंडर आचार्य बालकृष्ण से जुड़ी बताई जाती है।
अब एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कंपनी ने संबंधित जमीन खाली नहीं की है। UTDB की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई, लेकिन कार्रवाई से पहले ही इस मामले में नया मोड़ आ गया।
जमीन के मालिकाना हक पर विवाद
पिछले साल सितंबर में यह जानकारी सामने आई कि 2023 में जो जमीन राजस एयरो स्पोर्ट्स को दी गई थी, वह कथित तौर पर उत्तराखंड सरकार की थी ही नहीं। जब UTDB पायलट प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी कर रहा था, उसी दौरान उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग (Irrigation Department) ने दावा किया था कि हरिद्वार का बैरागी कैंप क्षेत्र उनकी अधिकार-सीमा में आता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राजस को लगभग 1200 मीटर × 200 मीटर भूमि दी गई थी। वहां 1 किलोमीटर × 30 मीटर की एयरस्ट्रिप विकसित करने की योजना थी।
कंपनी का पक्ष
इंडियन एक्सप्रेस ने जब राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर की प्रवक्ता से संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमीन पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं किया गया है। कंपनी के अनुसार, वह उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार कर रही है। उनका कहना है कि स्थिति स्पष्ट होते ही इन्फ्रास्ट्रक्चर समय रहते हटा लिया जाएगा। कंपनी का यह भी तर्क है कि भारी निवेश तभी किया गया, जब UTDB की ओर से आधिकारिक ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ जारी हुआ था।
प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि
29 अप्रैल 2020 को UTDB ने एक वर्ष का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका उद्देश्य बैरागी कैंप में 700 मीटर की एयरस्ट्रिप तैयार करना और जायरोकॉप्टर, माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट तथा छोटे फिक्स्ड-विंग विमान की व्यवहार्यता का परीक्षण करना था। 1 जून 2023 को राजस कंपनी ने UTDB को पत्र लिखकर पायलट प्रोजेक्ट आवंटित करने की मांग की। 14 जून को बोर्ड ने कंपनी से पूंजी निवेश, भारतीय और विदेशी पर्यटकों की संभावित संख्या तथा तिमाही स्टेटस रिपोर्ट देने संबंधी जानकारी मांगी।
बताया गया कि 2023–24 में इस प्रोजेक्ट के लिए 40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। अस्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने को कहा गया था, जबकि अन्य खर्च कंपनी को वहन करना था। प्रॉफिट-शेयरिंग एग्रीमेंट के तहत कंपनी को 90 प्रतिशत और बोर्ड को 10 प्रतिशत हिस्सा मिलना था।
नोटिस और कानूनी चेतावनी
4 सितंबर 2024 को UTDB के अतिरिक्त सीईओ अश्विनी पुंडीर ने कंपनी को पत्र लिखकर बताया कि पायलट प्रोजेक्ट की अवधि जून 2024 में ही समाप्त हो चुकी है, लेकिन जमीन विभाग को वापस नहीं सौंपी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समझौते के तहत बोर्ड को मिलने वाला 10 प्रतिशत लाभांश भी नहीं दिया गया और पर्यटकों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
पत्र में कंपनी को तत्काल प्रभाव से प्री-फैब्रिकेटेड हैंगर हटाने का निर्देश दिया गया। राजस कंपनी ने जवाब में दावा किया कि उसने 8 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। कंपनी के अनुसार, जर्मनी से जायरोकॉप्टर और स्पेन से हॉट एयर बैलून मंगाए गए थे, तथा हैंगर का निर्माण भी अपने खर्च पर किया गया।
7 अक्टूबर 2024 को कंपनी ने 45 दिन का अतिरिक्त समय मांगा, ताकि हैंगर को हटाया जा सके। उसने यह भी कहा कि जायरोकॉप्टर की री-पोजिशनिंग के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की अनुमति आवश्यक होगी। 21 नवंबर को 45 दिन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी जमीन खाली नहीं की गई। 28 नवंबर को बोर्ड ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी जारी की।
जमीनी स्थिति क्या है?
इंडियन एक्सप्रेस की टीम जब मौके पर पहुंची, तो हैंगर में जायरोकॉप्टर बंद अवस्था में पाए गए। हालांकि, मेटल स्ट्रक्चर अब तक नहीं हटाया गया था। दो सुरक्षा गार्ड वहां मौजूद थे। इस मामले में उत्तराखंड टूरिज्म सचिव धीरज गर्बियाल और एडवेंचर स्पोर्ट्स अधिकारी सीमा नौटियाल से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
उत्तर प्रदेश की एंट्री
मामले की तीसरी कड़ी उत्तर प्रदेश से जुड़ती है। 30 सितंबर 2024 को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने पत्र जारी कर दावा किया कि संबंधित जमीन उनकी है और वह कुंभ मेले के लिए आरक्षित क्षेत्र का हिस्सा है। विभाग ने कहा कि बिना अनुमति कोई भी निर्माण अवैध माना जाएगा। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश विभाग ने उत्तराखंड बोर्ड से टेंडर रद्द करने की मांग की। 9 अक्टूबर को उत्तराखंड बोर्ड के डायरेक्टर (इन्फ्रास्ट्रक्चर) ने हरिद्वार के डीएम से भूमि स्वामित्व पर स्पष्टीकरण मांगा। 6 नवंबर को कहा गया कि उत्तराखंड सिंचाई विभाग या उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) प्राप्त होने तक टेंडर रद्द रखा जाए।
