व्हाट्सएप में आने वाले दिनों में ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस आईडी को ब्लॉक किया जा सकता है। इसके अलावा स्काइप जैसी सेफ्टी फीचर्स लागू करने और खतरनाक एपीके फाइलों को पहचानकर ब्लॉक करने जैसे फीचर भी लाए जा सकते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय की हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी ने व्हाट्सएप को ये निर्देश दिए हैं। सरकार का तर्क है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम को रोकने के लिए व्हाट्सएप पर इन फीचर्स का आना जरूरी है।

व्हाट्सएप ने भी इन सुझावों को लागू करने पर सहमति जताई है और कुछ फीचर्स पर काम शुरू कर दिया गया है। हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी की तीसरी बैठक इसी महीने की शुरुआत में हुई थी, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।

कुल पांच नए फीचर्स WhatsApp पर आने वाले दिनों में लागू किए जा सकते हैं-

पहला फीचर– डिजिटल अरेस्ट करने वाले आरोपियों की डिवाइस की पहचान करना और उनकी आईडी को ब्लॉक करना होगा।

दूसरा फीचर- स्काइप की तरह कई प्रोटेक्टिव (सुरक्षा) फीचर्स WhatsApp पर लागू करना होगा।

तीसरा फीचर- डिलीट हुए अकाउंट के यूजर डेटा को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित करके रखना होगा।

चौथा फीचर- ऐसा मैकेनिज्म विकसित करना होगा जिससे खतरनाक एपीके फाइलों को पहचानकर ब्लॉक किया जा सके।

पांचवां फीचर- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग सिस्टम को और मजबूत करना होगा ताकि फर्जी कंटेंट की पहचान की जा सके।

व्हाट्सएप को निर्देश दिया गया है कि वह नए फीचर्स को लेकर 30 दिनों के भीतर प्रस्ताव (प्रपोजल) पेश करे। इसके अलावा, डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस आईडी को ब्लॉक करने के लिए नए मैकेनिज्म पर 45 दिनों के भीतर अलग प्रस्ताव देने को भी कहा गया है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को फर्जी पुलिसकर्मी या किसी जांच एजेंसी के अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और फिर पीड़ित को डराकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

इन बढ़ते साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए, पिछले साल 28 नवंबर को दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक नया नियम जारी किया था। इसके तहत व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल और स्नैपचैट जैसे ऐप्स को यूजर्स के अकाउंट को एक एक्टिव सिम से जोड़ने के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि WhatsApp इस नियम को 4 से 6 महीनों के भीतर लागू कर सकता है।