दुनिया की सबसे बड़ी वीजा आउटसोर्सिंग कंपनी VFS Global पर गंभीर आरोप लगे हैं। इंडियन एक्सप्रेस और Lighthouse Reports की पड़ताल में उसके कामकाज पर कई सवाल उठे हैं। अब कंपनी ने इंडियन एक्सप्रेस को एक विस्तृत जवाब भेजा है।

जारी बयान में VFS Global ने कहा है कि उसकी सभी सेवाएं पूरी तरह पारदर्शी तरीके से चलती हैं। उनका लगातार ऑडिट होता रहता है और कंपनी का काम सरकारी एजेंसियों की कड़ी निगरानी में होता है।

VFS Global ने जानकारी दी कि वर्तमान में उसकी सेवाएं 160 से ज्यादा देशों में चल रही हैं और 71 देशों की सरकारों की वह भरोसेमंद पार्टनर है। कंपनी दावा कर रही है कि उसने 2001 से अब तक 50 करोड़ से ज्यादा वीजा एप्लिकेशन प्रोसेस किए हैं।

अपनी सफाई में वीएफएस ग्लोबल ने इस बात पर भी जोर दिया है कि उसके कॉन्ट्रैक्ट किसी सीधे समझौते के तहत नहीं होते बल्कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय टेंडर प्रक्रिया के जरिए दिए जाते हैं। कंपनी के मुताबिक, इन टेंडर्स की 12 से 18 महीने तक जांच होती है। इसमें नियमों का पालन, डेटा सुरक्षा, ऑपरेशनल क्षमता और वित्तीय मजबूती जैसे पहलुओं को परखा जाता है।

VFS Global ने अपनी सफाई में इस बात पर भी जोर दिया है कि उसके कामकाज का कई स्तरों पर ऑडिट होता है। कंपनी ने जानकारी दी है कि हर साल 10 हजार से ज्यादा ऑडिट और जांच होती हैं। इनमें आंतरिक ऑडिटर्स, बाहरी एजेंसियां और अलग-अलग सरकारों द्वारा नियुक्त ऑडिटर्स को भी शामिल किया जाता है।

कंपनी ने इंडियन एक्सप्रेस को यह भी बताया कि अगर उसकी प्रक्रिया में कभी कोई समस्या सामने आती है या किसी तरह की शिकायत मिलती है तो सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाते हैं।

पड़ताल में Value Added Services यानी VAS को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोप था कि VFS Global यह साफ तरीके से नहीं बता पा रही थी कि प्रीमियम लाउंज और कूरियर जैसी सेवाएं पूरी तरह वैकल्पिक हैं या नहीं। इस पर भी कंपनी ने जवाब दिया है।

VFS Global ने जारी बयान में कहा कि ऑनलाइन और वीजा आवेदन केंद्रों पर कई जगहों पर साफ बताया जाता है कि इस प्रकार की सेवाएं वैकल्पिक हैं। इनका वीजा मंजूरी या प्रोसेसिंग समय पर कोई असर नहीं पड़ता है। कंपनी ने स्पष्ट कहा कि उसकी फीस व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है।

कंपनी ने इस बात पर भी जोर दिया कि ये सेवाएं संबंधित सरकारों से चर्चा के बाद ही तैयार की जाती हैं। इनकी कीमत सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होती है। कंपनी के मुताबिक, वह किसी भी प्रकार की गलत जानकारी नहीं देती और ऐसे मामलों जीरो टॉलरेंस की नीति रखती है।

इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में ‘वीजा शॉपिंग’ का मुद्दा भी सामने आया था। इस पर भी VFS Global ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी का कहना है कि यह काफी हद तक उसके नियंत्रण से बाहर का मामला है। कंपनी ने कहा कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत है। वह OTP ऑथेंटिकेशन और CAPTCHA सिस्टम का इस्तेमाल करती है। इसके अलावा #DoNotFallForFraud नाम से जागरूकता अभियान भी चलाया गया है।

कंपनी ने आगे कहा कि अपॉइंटमेंट की उपलब्धता, प्रोसेसिंग समय, दस्तावेजों की जरूरत और वीजा मंजूरी जैसे फैसले संबंधित सरकारें तय करती हैं। VFS Global ने इस बात पर भी जोर दिया है कि अगर कोई गलत गतिविधि सामने आती है तो उसके प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाती है।

कंपनी ने कहा कि अगर उसे कोई ठोस सबूत मिलता है तो वह स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करती है। साथ ही संबंधित सरकारों को विस्तृत और पारदर्शी रिपोर्ट भी भेजी जाती है। कंपनी ने यह भी बताया कि उसके सभी कर्मचारियों का भर्ती से पहले बैकग्राउंड चेक किया जाता है।

जांच में VFS Global पर रिश्वतखोरी से जुड़े आरोप भी लगे थे। इसका जवाब भी कंपनी ने दिया है। कंपनी के मुताबिक, उसने ‘Whistleblower Hotline’ शुरू कर रखी है। ऐसे में अगर किसी भी प्रकार की रिश्वतखोरी या गलत काम की शिकायत मिलती है तो तुरंत उसकी जांच शुरू कर दी जाती है।

इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में यह भी सामने आया था कि VFS Global डेटा सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सतर्क नहीं है। कंपनी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वह GDPR और दूसरे स्थानीय नियमों के अनुरूप डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए काम करती है। कंपनी के मुताबिक, डेटा को कितने समय तक रखना है और कब डिलीट करना है, यह संबंधित सरकारों के नियमों और अनुबंधों के आधार पर तय होता है। हर देश के अपने अलग नियम होते हैं।

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