पुडुचेरी की राजनीति में एन. रंगासामी एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुशासन, लगातार चुनावी सफलता और संगठन निर्माण की क्षमता से भी जुड़ी है। चार दशकों से अधिक समय की उनकी राजनीतिक यात्रा एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर केंद्र शासित प्रदेश के सबसे प्रभावशाली चेहरों में बदलने की कहानी है।

4 अगस्त 1950 को पुडुचेरी में जन्मे रंगासामी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा यहीं से प्राप्त की। उन्होंने टैगोर आर्ट्स कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक किया और इसके बाद डॉ. आंबेडक गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से 1977 में कानून की डिग्री हासिल की। शिक्षा और कानून की यह पृष्ठभूमि बाद में उनके प्रशासनिक फैसलों और नीतिगत समझ में साफ झलकती रही।

रंगासामी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की। 1990 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने थट्टांचावडी सीट से पहली बार चुनाव लड़ा, लेकिन मामूली अंतर से हार गए। हालांकि यह हार उनके राजनीतिक सफर का अंत नहीं बल्कि शुरुआत साबित हुई। 1991 के चुनाव में उन्होंने उसी सीट से वापसी की और जीत दर्ज की। इसके बाद वे लगातार चार बार उसी क्षेत्र से विधायक चुने गए। यह अपने आप में एक मजबूत स्थानीय जनाधार का संकेत था।

मंत्री से मुख्यमंत्री तक का सफर (1991–2001)

1991 से 2001 तक उन्होंने अलग-अलग सरकारों में मंत्री के रूप में काम किया। इस दौरान उन्हें कृषि, पर्यटन, शिक्षा, लोक निर्माण, संस्कृति और नागरिक उड्डयन जैसे कई अहम विभागों की जिम्मेदारी मिली। इस अवधि ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया जो केवल राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक कामकाज में भी दक्ष थे। कई विश्लेषकों के अनुसार, यही समय था जब उनकी छवि एक ‘वर्किंग मिनिस्टर’ के रूप में बनी।

अक्टूबर 2001 में वे पहली बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2006 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद वे फिर से मुख्यमंत्री बने।उनके शुरुआती कार्यकाल में प्रशासनिक सुधार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। तमिल मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें अक्सर एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में देखा गया जो ‘फाइल-वर्क’ और ‘स्कीम इम्प्लीमेंटेशन’ पर विशेष जोर देते थे।

2011 में कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाई थी

2008 में पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ माना जाता है। 2011 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और औपचारिक रूप से राजनीति में नया अध्याय शुरू किया। 2011 में उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई। इसका नाम ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) रखा। यह कदम उनके राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उसी वर्ष उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा और अपनी पार्टी को बड़ी जीत दिलाई। विशेष बात यह रही कि उनकी पार्टी ने कम समय में मजबूत संगठन खड़ा किया और सत्ता में वापसी कर ली।

इस कार्यकाल में उनकी सरकार ने कई सामाजिक योजनाओं पर ध्यान दिया। इसी दौर में उन्हें ‘जूनियर कामराज’ और ‘मक्कल मुधलवर (जनता का मुख्यमंत्री)’ जैसे उपनाम मिले, जो उनकी सादगी और कल्याणकारी छवि को दर्शाते हैं।

तमिल मीडिया में इस दौर की रिपोर्टिंग में एक बात बार-बार सामने आती है। वह यह है कि रंगासामी सार्वजनिक बयानबाजी कम करते थे, लेकिन सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर उनका नियंत्रण मजबूत रहता था। 2016 के चुनाव में उनकी पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और वे सत्ता से बाहर हो गए। इसके बाद वे विधानसभा में विपक्ष के नेता बने।

यह दौर उनके लिए राजनीतिक पुनर्गठन का समय माना जाता है, जिसमें उन्होंने संगठन को फिर से मजबूत किया। 2021 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ मैदान में उतरी और बहुमत हासिल किया। इसके बाद वे चौथी बार मुख्यमंत्री बने। इस कार्यकाल में उन्हें कोविड-19 के बाद की अर्थव्यवस्था, रोजगार और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मिली।

2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी अगुवाई में एआईएनआरसी ने एक बार फिर एनडीए के साथ मिलकर बहुमत हासिल किया और वे पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने। यह उपलब्धि उन्हें पुडुचेरी की राजनीति में सबसे लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले नेताओं में से एक बनाती है।

रंगासामी की सरकारों की सबसे बड़ी पहचान उनकी कल्याणकारी योजनाएं रही हैं। इनमें शामिल हैं:

‘पेरुन्थलाइवर कामराजर हाउसिंग स्कीम’ – गरीबों को पक्के घर देने की योजना
‘राजीव गांधी ब्रेकफास्ट स्कीम’ – सरकारी स्कूलों में बच्चों को नाश्ता और दूध
‘कामराज एजुकेशन असिस्टेंस स्कीम’ – स्कूली छात्रों की फीस सहायता
‘मुफ्त किताबें और शैक्षिक सामग्री वितरण’ – ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल टैंकों और जल आपूर्ति सुविधाओं का विस्तार

इन योजनाओं ने उनकी छवि को ‘वेलफेयर-फोकस्ड लीडर’ के रूप में मजबूत किया। उनकी राजनीतिक शैली संयमित और प्रशासनिक मानी जाती है। वे कम बोलने, ज्यादा काम करने और योजनाओं के क्रियान्वयन पर निगरानी रखने के लिए जाने जाते हैं। तमिल राजनीतिक विश्लेषणों में उन्हें अक्सर ‘शांत रणनीतिकार’ कहा जाता है, जो विवादों से दूर रहकर सत्ता को स्थिर रखते हैं।

एन. रंगासामी की कहानी केवल चुनाव जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह निरंतर वापसी, संगठन निर्माण और प्रशासनिक निरंतरता की कहानी है। शिक्षक से लेकर पांच बार मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर पुडुचेरी की राजनीति में एक दुर्लभ मिसाल है। जहां स्थिरता, रणनीति और जनकल्याण एक साथ दिखाई देते हैं।

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पुडुचेरी के दिग्गज नेता एन रंगासामी ने बुधवार को लगातार पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) के संस्थापक रंगासामी ने एक बार फिर एनडीए सरकार का नेतृत्व संभाल लिया है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। रंगासामी ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक