दिल्ली की कहानी… कश्मीरी गेट एक ऐसा इलाका है, जो लंबे समय से इतिहास और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। यह जगह समय के साथ कई बदलाव देख चुकी है और दिल्ली के बदलते रूप की कहानी भी बताती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस इलाके का नाम कश्मीरी गेट क्यों पड़ा। इस सीरीज में आपको बताते हैं कि कश्मीरी गेट इलाके के नाम की दिलचस्प कहानी।
कश्मीरी गेट का इलाका पुरानी दिल्ली में आता है। पुरानी दिल्ली को शाहजहानाबाद भी कहा जाता था। मुगल बादशाह शाहजहां ने शाहजहानाबाद की स्थापना की थी। इसी शहर का उत्तरी दरवाजा कश्मीरी गेट कहलाया। इस गेट का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह उत्तर की ओर यानी कश्मीर जाने वाली सड़क की तरफ था, जो उस समय मुगल साम्राज्य का हिस्सा था। यह गेट यमुना नदी के पास था और इसके आस-पास का इलाका शाही परिवार के सदस्यों के बागों और घरों का केंद्र बन गया था।
कुदसिया बेगम ने कश्मीरी गेट के बाहर बनवाया कुदसिया बाग
बादशाह अहमद शाह की मां कुदसिया बेगम ने कश्मीरी गेट के बाहर कुदसिया बाग बनवाया था। यह मुगल शैली का चारबाग था। वहीं बादशाह शाहजहां के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह ने कश्मीरी गेट के ठीक अंदर अपना महल बनवाया था।
सहपीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में 1803 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठों से दिल्ली पर कब्जा कर लिया, तो डेविड ऑक्टरलोनी, विलियम फ्रेजर और थॉमस मेटकाफ जैसे ब्रिटिश अधिकारियों ने यहां अपने घर बनवाए। मशहूर एंग्लो-इंडियन सैनिक कर्नल जेम्स स्किनर ने 1836 में इसी इलाके में दिल्ली का सबसे पुराना चर्च, सेंट जेम्स बनवाया था।
1857 के विद्रोह के दौरान विद्रोहियों ने कश्मीरी गेट पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने गेट के दोनों दरवाजों को बंद कर दिया और उसके आस-पास के बुर्जों को मजबूत किलेबंदी से सुरक्षित कर लिया। ब्रिटिश सैनिकों ने रिज पर अपनी मजबूत स्थिति से कश्मीरी गेट के आस-पास के बुर्जों, दरवाजों और दीवारों पर लगातार गोलाबारी की। इससे कश्मीरी गेट को काफी नुकसान पहुंचा।
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का किया गया निर्माण
19वीं सदी के आखिरी सालों में कश्मीरी गेट के आसपास के क्षेत्र में ओल्ड सेंट स्टीफंस कॉलेज, बंगाली क्लब और कश्मीरी गेट मार्केट की स्थापना की गई। अंग्रेजों ने कश्मीरी गेट के उत्तर में सिविल लाइंस नाम का एक नया इलाका विकसित किया। फिर साल पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया। इससे शहर में रेलवे की सेवा शुरू हो गई।
आजादी के बाद कश्मीरी गेट और उसके आसपास का इलाका तेजी से बदलने लगा। इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) के निर्माण के साथ कश्मीरी गेट के आस-पास का इलाका एक प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब बन गया। साथ ही मेट्रो स्टेशन के निर्माण से लोगों को काफी फायदा मिला है।
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दिल्ली की पहचान सिर्फ लाल किला, इंडिया गेट या चांदनी चौक तक सीमित नहीं है। इस शहर की गलियों में कई ऐसे इलाके भी हैं, जिनका इतिहास समय के साथ धुंधला पड़ गया, लेकिन उनकी कहानी आज भी उतनी ही दिलचस्प है। पश्चिमी दिल्ली में स्थित आनंद पर्वत भी ऐसा ही एक इलाका है, जिसकी पहचान केवल एक रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्र भर नहीं, बल्कि विभाजन, पुनर्वास और दिल्ली के विस्तार की कहानी से भी जुड़ी हुई है। आखिर इस इलाके का नाम ‘आनंद पर्वत’ कैसे पड़ा, इसका इतिहास क्या है और समय के साथ यह कैसे बदलता गया? आइए जानते हैं आनंद पर्वत की अनकही दास्तान। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
