दिल्ली की पहचान सिर्फ लाल किला, इंडिया गेट या चांदनी चौक तक सीमित नहीं है। इस शहर की गलियों में कई ऐसे इलाके भी हैं, जिनका इतिहास समय के साथ धुंधला पड़ गया, लेकिन उनकी कहानी आज भी उतनी ही दिलचस्प है। पश्चिमी दिल्ली में स्थित आनंद पर्वत भी ऐसा ही एक इलाका है, जिसकी पहचान केवल एक रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्र भर नहीं, बल्कि विभाजन, पुनर्वास और दिल्ली के विस्तार की कहानी से भी जुड़ी हुई है। आखिर इस इलाके का नाम ‘आनंद पर्वत’ कैसे पड़ा, इसका इतिहास क्या है और समय के साथ यह कैसे बदलता गया? आइए जानते हैं आनंद पर्वत की अनकही दास्तान।

आनंद पर्वत सेंट्रल दिल्ली में करोल बाग और पटेल नगर के पास एक ऐतिहासिक इलाका है। आज यह मुख्य रूप से अपने इंडस्ट्रियल एरिया और घने रिहायशी इलाकों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसका इतिहास औपनिवेशिक काल से जुड़ा है।

आनंद पर्वत कैसे पड़ा नाम?

आनंद पर्वत नाम को हिल ऑफ हैप्पीनेस भी कहा जाता रहा है। यह इलाका कभी एक चट्टानी रिज या ऊंची जमीन के लिए जाना जाता था जो पुरानी दिल्ली रिज के उत्तरी हिस्से का हिस्सा थी। ब्रिटिश काल के दौरान, यह इलाका दिल्ली की मुख्य शहरी सीमा से बाहर था और इसमें ज्यादातर खुली जमीन और पहाड़ियां थीं।

ब्रिटिश काल और दूसरा विश्व युद्ध

आनंद पर्वत का सबसे अहम ऐतिहासिक जुड़ाव दूसरे विश्व युद्ध से है। वायरलेस एक्सपेरिमेंटल सेंटर के नाम से जानी जाने वाली एक ब्रिटिश इंटेलिजेंस फैसिलिटी आनंद पर्वत की एक पहाड़ी पर थी। यह सेंटर जापानी मिलिट्री कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट और डिकोड करने में शामिल था और एशिया में एलाइड इंटेलिजेंस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाता था।

औद्योगिक विकास

1947 में भारत की आजादी के बाद, दिल्ली तेजी से बढ़ी। आनंद पर्वत एक छोटे लेवल का इंडस्ट्रियल हब बन गया, खासकर 1950-1970 के दशक में। इस इलाके में इंजीनियरिंग वर्कशॉप, ऑटोमोबाइल-पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां और दूसरे कई उद्योग शुरू हुए। यह इलाका दिल्ली का जरूरी औद्योगिक कलस्टर बन गया।

शहरी विकास और माइग्रेशन

जैसे-जैसे उद्योग बढ़ता गए, भारत के अलग-अलग हिस्सों से मजदूर आस-पास बसने लगे। औद्योगिक क्षेत्र के आस-पास थान सिंह नगर जैसी आवासीय कॉलोनियां और आस-पास की बस्तियां बस गईं। इसका नतीजा यह हुआ कि दिल्ली के कई पुराने मोहल्लों जैसा मिला-जुला इंडस्ट्रियल-रेजिडेंशियल माहौल बन गया।

आज आनंद पर्वत

आज भी आनंद पर्वत सेंट्रल दिल्ली का एक अहम इंडस्ट्रियल और रेजिडेंशियल इलाका है। यह न्यू रोहतक रोड से जुड़ा हुआ है और बड़े कमर्शियल इलाकों के पास है। हालांकि आधुनिकीकरण और पुनर्विकास ने इलाके के कुछ हिस्सों को बदल दिया है, फिर भी यह दिल्ली के पारंपरिक छोटे मैन्युफैक्चरिंग सेंटर में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाए हुए है।

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