सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से बने एक पेज ने अचानक ‘कॉकरोच’ को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक्स से लेकर इंस्टाग्राम तक हर जगह सिर्फ कॉकरोच की चर्चा हो रही है। लेकिन विवाद से अलग, जनसत्ता आपको उस जीव की कहानी बताने जा रहा है जिसने डायनासोर का दौर भी देखा, परमाणु हमलों की दहशत भी झेली और आज 4000 से ज्यादा प्रजातियों के साथ अब भी इस धरती पर टिका हुआ है।

कॉकरोच की उत्पत्ति कब हुई?

कॉकरोच की उत्पत्ति कब हुई, इसका कोई एक जवाब नहीं है। अलग-अलग वैज्ञानिकों ने अलग-अलग तर्क देकर उनकी उत्पत्ति पर अपने दावे किए हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती पर कॉकरोच 32 करोड़ साल से मौजूद हैं। इसका मतलब है कि कार्बोनिफेरस काल से ही कॉकरोच धरती पर मौजूद हैं। कार्बोनिफेरस काल का अर्थ है वो प्राचीन दौर जब विशाल जंगल मौजूद थे और कीड़े-मकोड़े तेजी से फैल रहे थे।

Marianne C. Dominguez का ‘The Cockroach- Prized Writing’ के नाम से एक रिसर्च पेपर है जहां उन्होंने कॉकरोच के बारे में काफी कुछ बताया है। उनके मुताबिक कुछ वैज्ञानिक कॉकरोचों को Paleozoic काल से जोड़कर देखते हैं, इसका मतलब है कि 30 करोड़ साल पहले यह जीव धरती पर आए। वहीं कुछ एंटोमोलॉजिस्ट ऐसे हैं जो कॉकरोचों को Silurian काल का मानते हैं। उनके अनुसार 40 करोड़ साल पहले उनकी उत्पत्ति हुई।

वीडियो के जरिए कॉकरोच की कहानी

चार प्रकार के कॉकरोच

कॉकरोच की कई प्रजातियां हैं, वैज्ञानिक 3000 से लेकर 4000 तक आंकड़ा देते हैं। मुख्य रूप से चार सबसे ज्यादा चर्चा में आती हैं-

जर्मन कॉकरोच- दुनिया में सबसे ज्यादा जर्मन कॉकरोच ही देखने को मिलता है। जानकार इसकी उत्पत्ति भारत-म्यांमार से जोड़कर देखते हैं। घरों में, होटलों, रेस्टोरेंट में जो कॉकरोच देखने को मिलते हैं, वो इसी प्रजाति के हैं।

अमेरिकन कॉकरोच- कॉकरोच की यह प्रजाति आकार में काफी बड़ी होती है, सीवर और नालियों में यह सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इन कॉकरोचों में उड़ने की क्षमता भी होती है।

ओरिएंटल कॉकरोच- कॉकरोज की यह प्रजाति ठंडी और गीली जगह पर ज्यादा पाई जाती है। यह गहरे भूरे रंग के होते हैं और इनका आकार बड़ा होता है। इनसे एक तेज दुर्गंध आती है और ये साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे हानिकारक बैक्टीरिया फैलाने में सक्षम हैं।

एशियन कॉकरोच- इस प्रजाति को जर्मन कॉकरोच का ही रिश्तेदार माना जाता है, इनमें कई समानताएं भी होती हैं। लेकिन एक बड़ा फर्क यह रहता है कि एशियन कॉकरोच आसानी से उड़ सकते हैं, इनके पंख बड़े होते हैं। ये कॉकरोच लाइट की तरफ भी आकर्षित होते हैं।

कॉकरोच नाम कहां से आया?

PNAS जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार साल 1624 में कई बार अंग्रेजी में कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल हुआ। जॉनस्मिथ नाम के अमेरिकी कैप्टन ने सबसे पहले ‘कैकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद 1756 से लेकर 1763 तक यूरोपियन ताकतों के बीच एक भीषण युद्ध हुआ था जो सात साल तक चला। इसे सेवन ईयर वॉर के नाम से भी जानते हैं। उस युद्ध के दस्तावेजों से पता चलता है कि कॉकरोच बड़ी संख्या में वहां पाए जाते थे जहां सेना का खाना रखा होता था। वो कॉकरोच दिखने में क्योंकि घिनौने होते थे, ऐसे में दोनों ही तरफ सेनाएं अपने दुश्मन के नाम से उन कॉकरोच को बुलाती थीं। रूस समर्थक इन्हें प्रशियन कॉकरोच कहते थे, वहीं प्रशिया के सैनिक रूसी कॉकरोच कहकर संबोधित करते थे।

कॉकरोच का भारत कनेक्शन?

PNAS जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि जिस कॉकरोच को दुनिया जर्मनी से जोड़कर देखती है, असल में उसका कनेक्शन भारत से ज्यादा है। रिसर्च के मुताबिक एक डीएनए एनालिसिस किया गया था, उससे पता चला कि 2100 साल पहले कॉकरोचों की एक प्रजाति भारत-म्यांमार में पाई जाती थी। यही कॉकरोच की प्रजाति आगे चलकर और विकसित हुई और इसे नाम मिला-Blattella Germanica Cockroach।

कॉकरोच पूरी दुनिया में कैसे फैले?

कॉकरोच को अंधेरे से ज्यादा प्यार रहता है, वो ऐसी जगहों पर छिपने की सबसे ज्यादा कोशिश करता है। उनकी यही फितरत उन्हें पूरी दुनिया तक लेकर चली गई। PNAS जर्नल की रिपोर्ट भी कुछ ऐसे ही संकेत देती है। रिसर्च बताती है कि 1200 साल पहले जब इस्लाम धर्म का फैलना शुरू हुआ, तब इस्लामिक शासक भारत की ओर आए। उनके साथ उनकी सेनाएं आईं, उनका खाना आया। वहां इन कॉकरोचों को छिपने की पर्याप्त जगह मिली। इस वजह से जर्मन कॉकरोच यहां पहुंच गए।

कॉकरोचों के लिए दूसरा रास्ता तब खुला जब यूरोप की सम्राज्यवादी ताकतें हिंदुस्तान की ओर बढ़ीं। उनके बड़े जहाज साथ आए थे, उन्हीं में ये कॉकरोच भी छिपे रहे। इसके बाद डच और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया के कई जहाजों में छिप कॉकरोच एशिया से बाहर पहुंच गए। शोधकर्ताओं के मुताबिक सिर्फ 270 साल पहले ही यूरोप में कॉकरोचों की दस्तक हुई थी, इससे पहले वहां इनकी प्रजाति नहीं पाई जाती थी। लेकिन बाद में जब यूरोप में तेज विकास हुआ, वहां हीटिंग के साधन बढ़ने लगे, पाइप्स की संख्या भी बढ़ गई, तब कॉकरोचों को खुद के लिए मुफीद वातावरण मिल गया।

यूरोप के बाद कॉकरोच अमेरिका पहुंचे। शोध के अनुसार 1842 में अमेरिका न्यूयॉर्क में पानी की समस्या होने लगी थी। तब 66 किलोमीटर लंबी क्रोटन नदी से मैनहैटन तक एक नहर तैयार की गई। ऐसा माना जाता है कि उस नहर के बनने के बाद ही न्यूयॉर्क में पहली बार कॉकरोच देखने को मिले थे। वर्तमान में दुनिया के सात में से छह महाद्वीप में जर्मन कॉकरोच पाए जाते हैं। सिर्फ अंटार्कटिका ऐसा द्वीप है जहां कॉकरोच नहीं पाए जाते।

कॉकरोच के बारे में 6 रोचक तथ्य

  • कॉकरोच का सिर कट जाए, फिर भी एक हफ्ते तक जिंदा
  • कॉकरोच 40 मिनट तक अपनी सांस रोक सकते हैं
  • कॉकरोच 3 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं
  • बेबी कॉकरोच जन्म के अगले दिन ही अपने माता-पिता जितना तेज दौड़ सकते हैं
  • कॉकरोज बिना खाए एक महीने तक जिंदा रह सकता है
  • कॉकरोज सर्वाइवर होते हैं, रेडिएशन झेलने की क्षमता
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