राजनीति में हर दिन कुछ ऐसे घटनाक्रम सामने आते हैं, जो सत्ता, संगठन और नेताओं की रणनीति पर सवाल खड़े करते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अमेरिका यात्रा, मायावती का पार्टी नेताओं पर लगातार कार्रवाई करना, संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के प्रदर्शन, दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए रखने की कवायद और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का वरुण यज्ञम ऐसे ही मुद्दे हैं। इन पांच घटनाक्रमों में सियासत के अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं।

अमेरिका यात्रा

करीब तीन दशक बाद गुजरात का कोई मुख्यमंत्री अमेरिका की यात्रा करेगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल निवेश आकर्षित करने के लिए यह दौरा करने वाले हैं। इससे पहले अमेरिका की यात्रा करने वाले केशू भाई पटेल राज्य के अंतिम मुख्यमंत्री थे। नरेंद्र मोदी यों तो 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे पर वे अमेरिका नहीं जा पाए। दरअसल 2002 के गुजरात दंगों के कारण अमेरिका ने उन्हें वीजा देने से इंकार कर दिया था। हालांकि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद वे कई बार अमेरिका जा चुके हैं। अमेरिका में गुजरातियों की संख्या अच्छी खासी है। जो आम तौर पर मालदार कारोबारी हैं। इसीलिए गुजरात के मुख्यमंत्री ‘वायब्रेंट गुजरात’ के लिए वहां जाकर निवेश जुटाने का जतन करेंगे।

‘वायब्रेंट गुजरात’ खुद नरेंद्र मोदी ने ही राज्य के आर्थिक विकास के लिए देश और दुनिया भर से निवेश आमंत्रित करने के मकसद से शुरू किया था। पिछले करीब दो दशक से यह गुजरात का प्रमुख सालाना सरकारी आयोजन है। प्रधानमंत्री खुद भी इसमें शामिल होते हैं। पर हैरानी की बात ये है कि मोदी के बाद आनंदी बेन पटेल और विजय रूपाणी भी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे पर वे अमेरिका नहीं गए। भूपेंद्र पटेल भी मुख्यमंत्री तो 2021 से हैं, लेकिन अमेरिका यात्रा पर वे पहली बार जाने वाले हैं। देखना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री को अमेरिका से क्या हासिल होता है।

गफलत में बहनजी

बसपा की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उनकी पार्टी का जनाधार 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में दस फीसद तक ही सिमट गया। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिएसभी पार्टियां कमर कस रही हैं। लेकिन बहिन जी अपने नेताओं को बाहर का रास्ता ही दिखा रही हैं। पहले अपने समधी यानी भतीजे आकाश आनंद के ससुर डाक्टर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला था। फिर कई राज्यों के पार्टी प्रभारी रणधीर सिंह बेनीवाल को निकाल दिया। बेशक उन्होंने आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर रखा है, लेकिन उन पर भी प्रकोप होता रहा है। दो दिन पहले उन्होंने ब्राह्मण चेहरे अनंत मिश्रा उर्फ अंटू को भी पार्टी से निकाल दिया। एक तरफ सपा और भाजपा के बीच ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने की होड़ लगी है तो वहीं बहिन जी ने प्रमुख ब्राह्मण नेता को पार्टी से निकाल दिया है।

नाट्य रूपांतरण से भरा रहा सत्र

संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल लगातार चढ़ावा चोरी और गृह मंत्री अमित शाह के सदन में बयान देने को लेकर सत्ता पक्ष को घेरते नजर आए। सत्र के आखिर में सांसदों ने एक अलग प्रयास किया। लेकिन इस प्रयास में विपक्ष के अंदर ही कुछ दूरियां नजर आईं। कांग्रेस के सांसद परिसर में बंदर का खिलौना लेकर पहुंचे थे। इस खिलौने के साथ ही सांसदों ने जमकर नारेबाजी भी की। बाद में विपक्ष में ही कुछ नेता इस तरह के प्रदर्शन को ठीक नहीं बताते नजर आए। उनकी आपत्ति इस बात को लेकर थी कि कुछ ऐसे ही प्रदर्शन और नारों की गूंज जंतर मंतर पर पहले सुनाई दे चुकी थी। इस तरह नाट्य रूपातरंण वाले तीन प्रदर्शन इस बार संसद सत्र में नजर आए।

कुर्सी कायम रहे

दीपक प्रकाश बिहार सरकार में मंत्री बने रहेंगे। वे उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी अलग पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा बना रखी है। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया था। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी स्नेहलता विधायक चुनी गई थीं। भाजपा ने एक कुशवाहा सम्राट चौधरी को ही बिहार का मुख्यमंत्री बना रखा है। फिर भी उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी कुछ ज्यादा ही अहमियत दे रही है। पिछले साल उनके बेटे दीपक को राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया, जबकि वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे।

ऐसा व्यक्ति अधिकतम छह माह ही मंत्री रह सकता है। पर दीपक को सम्राट चौधरी की सरकार में भी मंत्री-पद दिया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और असंवैधानिक स्थिति होने के कारण भाजपा ने अपने एक एमएलसी का इस्तीफा दिलाकर दीपक को उपचुनाव के जरिए एमएलसी बना दिया। जिससे वे मंत्री पद पर बने रह सकेंगे। लेकिन इस एमएलसी सीट का कार्यकाल ही आठ माह बचा है।

चर्चा है कि उपेंद्र कुशवाह पर अपनी पार्टी के भाजपा में विलय का दबाव है। कायदे से तो उन्हें अपनी पत्नी को मंत्री बनवाना चाहिए था, जो विधान सभा की सदस्य हैं। भाजपा को कतई नहीं अखर रहा कि उसके कारण पति, पत्नी और पुत्र तीनों अहम पदों पर हैं। भाजपा की कोशिश कुशवाहा समाज में पैठ बढ़ाने की है। लेकिन आठ माह बाद दीपक को फिर एमएलसी बनवाने के लिए उपेंद्र कुशवाहा को राष्ट्रीय लोक मोर्चा का भाजपा में विलय करना ही होगा।

कांग्रेस के धार्मिक मुख्यमंत्री

तेलंगाना में अच्छी बरसात के लिए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में वरुण यज्ञम कराया तो किसी को हैरानी नहीं हुई। होती भी क्यों। हर कोई जानता है कि दक्षिण के दो राज्यों कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्री धार्मिक प्रवृति के हैं। रेवंत रेड्डी और डीके शिव कुमार पूजा पाठ, यज्ञ व ज्योतिष आदि में खासी दिलचस्पी रखते हैं। कांग्रेस पार्टी के किसी भी नेता की इस पर प्रतिक्रिया नहीं आई। भाजपा की तरफ से भी कोई टीका टिप्पणी सुनाई नहीं पड़ी। भाजपा तो खुद ही ऐसे अनुष्ठानों, आयोजनों को तरजीह देती है। लेकिन राज्य की विपक्षी पार्टी भारत राष्ट्र समिति को रेड्डी का यह अनुष्ठान पसंद नहीं आया।

पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के बेटे केटी रामा राव ने रेड्डी पर जनता की असली समस्याओं से मुंह चुराने और दिखावा करने का आरोप जड़ दिया। भूल गए कि उनके पिता केसीआर खुद मुख्यमंत्री थे तो अमूमन ऐसे यज्ञ और आयोजन करते ही रहते थे। वे तो मंदिरों में भी खूब पैसा चढ़ाते थे। हालांकि अब माहौल नया है, कांग्रेस की रणनीति नई है तो सवाल उठना लाजिम है।