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भाई दारा शिकोह के हाथ में भगवान लिखी अंगूठी देख आग बबूला हो गया था औरंगजेब, सिर काट तश्तरी में सजा पिता को भिजवाया था

औरंगजेब (Aurangzeb) भाई दारा शिकोह से बहुत चिढ़ता था। खासकर दारा का, हिंदू धर्म के प्रति झुकाव उसे अखरता था।

भाई दारा शिकोह के हाथ में भगवान लिखी अंगूठी देख आग बबूला हो गया था औरंगजेब, सिर काट तश्तरी में सजा पिता को भिजवाया था
दारा शिकोह और औरंगजेब (बाएं से) सोर्स- Wikimedia Commons

औरंगजेब (Aurangzeb) को मुगल सल्तनत (Mughal Empire) का सबसे क्रूर बादशाह कहा जाता है। उसने न सिर्फ अपने भाइयों का कत्ल करवाया, बल्कि पिता शाहजहां को भी कैद कर लिया था। औरंगजेब ने अपने जिन भाईयों का कत्ल किया उनमें दारा शिकोह भी शामिल थे। दारा शिकोह, शाहजहां की दूसरी बीवी मुमताज महल के बेटे थे। 20 मार्च 1615 को राजस्थान के अजमेर में जन्मे दारा शिकोह सभी धर्मों को समान मानते थे।

दारा शिकोह का हिंदू धर्म के प्रति झुकाव औरंगजेब को नापसंद था

दारा शिकोह (Dara Shikoh) जितना इस्लाम को मानते थे, उतना ही सम्मान हिंदू धर्म को भी देते। उन्होंने हिंदू धर्म से जुड़े 50 से ज्यादा महत्वपूर्ण किताबों और उपनिषदों का संस्कृत से फारसी में अनुवाद कराया था, ताकि मुस्लिम विद्वान भी इन्हें पढ़ सकें। औरंगजेब को दारा शिकोह की जो बात खटकती थी, उनमें यह भी एक बड़ी वजह थी।

बाद में जब मुगल सल्तनत की गद्दी के लिए औरंगजेब और दारा शिकोह (Dara Shikoh) के बीच लड़ाई हुई तो दारा को मैदान छोड़कर भागना पड़ा। किसी तरह आगरा पहुंचे और वहां से छुपते-छुपाते अफगानिस्तान चले गए थे। हालांकि गद्दारी के चलते पकड़े गए और उन्हें दिल्ली लाया गया।

अंगूठी पर प्रभु लिखा देख आग बबूला हो गया था औरंगजेब

सुप्रिया गांधी अपनी किताब ‘द एंपरर हू नेवर वाज’ (The Emperor Who Never Was) में लिखती हैं कि दारा शिकोह को कैद करने के बाद औरंगजेब के दरबार में पेश किया गया। दारा शिकोह से पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि इस्लाम की तरह हिंदू धर्म भी सच्चा है? दारा ने जवाब दिया, ‘इससे क्या फर्क पड़ता है? जिस भी दरवाजे से रौशनी आए वही सही है।

दारा शिकोह ने अपने हाथ में पहनी अंगूठी दिखाई, जिस पर एक तरफ अल्लाह और दूसरी तरफ प्रभु लिखा था। इस अंगूठी को देख औरंगजेब आग बबूला हो गया। दरबार ने फैसला दिया कि दारा शिकोह लंबे समय तक इस्लाम के सच्चे रास्ते से हट गए थे और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।

कत्ल से पहले दिल्ली की सड़कों पर घुमाया गया

वरिष्ठ पत्रकार रेहान फजल बीबीसी हिंदी पर इतिहासकार फ्रांसुवा बर्नियर (Francois Bernier) की किताब ‘ट्रैवल्स इन द मुगल इंडिया’ के हवाले से लिखते हैं कि कत्ल से पहले दारा शिकोह को बहुत बुरी तरह बेइज्जत किया गया। उन्हें एक छोटी हथिनी पर बैठा कर दिल्ली की तमाम सड़कों पर घुमाया गया। दारे के ठीक पीछे दूसरे हाथी पर उनके 14 साल के बेटे सिफिर शिकोह को बैठाया गया था।

पिता को तश्तरी में सजाकर भेजा था भाई का सिर

बाद में दारा शिकोह (Dara Shikoh Murder) का सिर धड़ से अलग कर दिया गया। कटे सिर को औरंगजेब के सामने पेश किया गया तो औरंगजेब ने हुक्म दिया कि सिर को भी ठीक उसी तरह हाथी पर घुमाया जाए। बाद में दारा शिकोह के धड़ को हुमायूं के मकबरे (Humayun Tomb) में दफना दिया गया, जबकि औरंगजेब ने दारा के सिर को एक तश्तरी में सजाकर आगरा में कैद अपने पिता शाहजहां को भिजवाया। अपने सबसे बड़े बेटे का सिर देख शाहजहां को दौरा पड़ गया था।

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First published on: 17-01-2023 at 07:18:41 pm
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