असम में 2 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के बीच तकरार बढ़ चुकी है। इस बीच कांग्रेस मुश्किल में फंसती जा रही है। दरअसल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी असम में गौरव गोगोई को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं और इससे कई कांग्रेसी नेता असहज महसूस कर रहे हैं। इसी का परिणाम 16 फरवरी 2026 को नजर आया, जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि इसके तुरंत बाद कांग्रेस आलाकमान एक्टिव हो गया और उन्हें मनाने में कामयाब हुआ। भूपेन ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया लेकिन बात यहीं पर खत्म नहीं हो जाती है।
कांग्रेस के अंदर बढ़ रहा असंतोष?
विधानसभा चुनाव में डेढ़ से दो महीने ही दूर है और कांग्रेस के अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए हैं और बीजेपी चुनाव प्रचार में इसका फायदा लेना चाहेगी। आजादी के 79 साल हो गए हैं और असम में कांग्रेस ने करीब 57 साल तक शासन किया है। 2001 से 2016 तक लगातार असम में कांग्रेस की सरकार थी और तरुण गोगोई मुख्यमंत्री थे। हालांकि तरुण गोगोई से नाराज होकर ही हिमंता ने बीजेपी ज्वाइन की थी और उसका फायदा बीजेपी को मिला। पिछले 10 साल से असम में बीजेपी की सरकार है और इस बार भी बीजेपी वापसी की उम्मीद कर रही है। जब से हिमंता ने बीजेपी ज्वाइन की है, उसके बाद से असम बीजेपी का गढ़ बनता जा रहा है। 2016 के बाद असम में बीजेपी कोई भी चुनाव नहीं हारी हो चाहे वह विधानसभा हो या लोकसभा।
हिमंता ने क्यों छोड़ी थी पार्टी?
2011 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने हिमंता बिस्वा सरमा को पार्टी का कैंपेन इंचार्ज बनाया था। कांग्रेस ने असम में बड़ी जीत दर्ज की। हालांकि उसके बाद हिमंता मुख्यमंत्री बनना चाहते थे और यहीं से कांग्रेस नेतृत्व और तरुण गोगोई से उनकी दूरियां बढ़ती चली गई। हिमंता ने 2015 में कांग्रेस पार्टी को छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर लिया और उसके बाद से इसका फायदा बीजेपी को हुआ।
जैसे ही भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया तुरंत मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा कि वह कांग्रेस के आखिरी हिंदू नेता है और मंगलवार शाम उनके घर जाएंगे। हिमंता ने इस बीच एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि 3 साल पहले भी हमने भूपेन बोरा को सुरक्षित सीट ऑफर की थी। हिमंता यही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में पांच और विधायक पाला बदल सकते हैं।
प्रियंका गांधी वाड्रा को मिली कमान
बताया जा रहा है कि गौरव गोगोई की नियुक्ति के बाद असम कांग्रेस के कुछ नेता असंतुष्ट थे। कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट रखने के लिए ही प्रियंका गांधी वाड्रा को असम कांग्रेस राज्य स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इससे संदेश दिया गया कि भले ही गौरव गोगोई के हाथ में प्रदेश कांग्रेस की कमान है लेकिन फैसला गांधी परिवार को लूप में रखकर ही लिए जाएंगे। उनकी नियुक्ति से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा। वहीं भूपेश बघेल और डीके शिवकुमार को चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किया गया है।
2016 से सत्ता से बाहर है कांग्रेस
NDA पहली बार 2016 में असम में 86 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी। BJP को 60, सहयोगी AGP को 14, और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को 12 सीटें मिलीं थी। वहीं कांग्रेस को 26 और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को 13 सीटें मिलीं। जबकि 2021 में BJP को फिर से 60 सीटें मिली लेकिन AGP को केवल 9 सीट मिली। BPF ने सिर्फ़ चार सीटें जीतीं और बाद में अलायंस से बाहर हो गई। NDA ने 75 सीटों के साथ सरकार बनाई। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस ने 50 सीटें जीतीं थी।
हिमंता ने गोगोई पर लगाया था आरोप
हिमंता ने 8 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि गौरव गोगोई ने पाकिस्तान का दौरा किया था और उन्हें वहां के गृह मंत्रालय से भी क्लीयरेंस मिला था। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया कि 2013 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान गौरव गोगोई की आवाजाही से जुड़ी अनुमति पाक गृह मंत्रालय ने बदल दी थी। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान गौरव गोगोई कुछ प्रशिक्षण सत्रों में शामिल हुए हो सकते हैं और 2014 में सांसद बनने के बाद गोगोई ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कई सवाल उठाए।
सीएम हिमंता सरमा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ के बीच संबंधों की जांच जरूरी है।उन्होंने दावा किया कि अली तौकीर शेख ने 2010 से 2013 के बीच कई बार भारत का दौरा किया और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़ा रहा। हिमंता यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि गौरव गोगोई की पत्नी को एक पाकिस्तानी कंपनी में नौकरी दी गई और उनका वेतन भी कथित तौर पर पाकिस्तानी नागरिक द्वारा दिया जाता था।
भूपेन बोरा के इस्तीफा वापस लेने से भी नहीं भरेगी दरार
हिमंता ने भी तरुण गोगोई की वजह से ही कांग्रेस छोड़ी थी। वहीं भूपेन बोरा की नाराजगी भी गौरव गोगोई के कारण ही है। माना जा रहा है कि लगातार गौरव गोगोई को बढ़ावा देने से भूपेन बोरा नाराज चल रहे थे। ऐसे में यह साफ़ दिख रहा कि ‘गोगोई प्रेम’ कांग्रेस पर भारी पड़ रहा है। अभी तक कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए सीएम फेस की घोषणा नहीं की है। लेकिन जिस तरह से असम में कांग्रेस गौरव गोगोई को आगे बढ़ा रही है, ज्यादातर नेता मानते हैं कि वही पार्टी का चेहरा हैं। गौरव गोगोई लोकसभा में डिप्टी लीडर भी हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता है कि अभी कांग्रेस में भूपेन बोरा के इस्तीफा वापस लेने भर से दरार नहीं थमने वाली है। जब तक कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश के नेताओं को कुछ बड़ा भरोसा नहीं दिलाएगा, तब तक असंतोष बना रहेगा। अभी के लिए तो भूपेन बोरा ने इस्तीफा वापस ले लिया है लेकिन माना जा रहा है कि चुनाव के दौरान उनकी बारगेनिंग पावर बढ़ेगी। पढ़ें सीएम हिमंता को लेकर असम बीजेपी के पोस्ट से क्यों मचा है बवाल
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