असम बीजेपी के हैंडल से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया गया था। इस वीडियो में हिमंता बिस्वा सरमा एक राइफल से दो टोपी पहने हुए लोगों पर निशाना साध रहे हैं। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा गया: पॉइंट ब्लैंक रेंज। हालांकि असम बीजेपी ने इस वीडियो पर बवाल मचने के बाद डिलीट कर लिया लेकिन इसको लेकर देशभर में हंगामा मचा है।
ओवैसी ने दर्ज कराई शिकायत
हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में शिकायत भी दर्ज कराई है। जबकि हिमंता बिस्वा सरमा का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि क्या वीडियो शेयर किया गया। हिमंता बिस्वा सरमा का 17 सेकंड का वीडियो 7 फरवरी को पोस्ट किया गया था और 8 फरवरी को इसे हटा दिया गया। जिन दोनों पुरुषों पर हिमंता बिस्वा सरमा निशाना साध रहे हैं, वह दाढ़ी और सफेद टोपी में हैं। विपक्षी इस वीडियो को भड़काऊ बताकर एक समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं कांग्रेस इस वीडियो की आलोचना कर रही है। पढ़ें कांग्रेस ने क्या कहा
हिमंता की ‘मियां मुसलमान’ राजनीति क्या है?
इस वीडियो को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ‘मियां मुसलमान’ के खिलाफ राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल हिमंता बिस्वा सरमा लगातार ‘मियां मुस्लिमों’ के घुसपैठ का मुद्दा उठाते रहे हैं। असम में बांग्लादेश से आकर बसने वाले मुसलमानों को “मियाँ मुस्लिम” कहा जाता है। असम के मूल निवासी मुसलमानों को असमिया मुस्लिम कहा जाता है। सीएम हिमंता ने हाल ही में स्पष्ट किया कि वे घुसपैठ करके असम में आने वाले “मियाँ मुस्लिम” की आलोचना करते हैं न कि असमिया मुस्लिम की।
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने हिमंता बिस्वा सरमा के हैंडल से वीडियो को राज्य की राजनीति का ‘कट्टरपंथीकरण’ बताया।
असम में कितनी है मुस्लिम आबादी?
2011 की जनगणना के अनुसार असम की मुस्लिम आबादी करीब 34 फीसदी है। हालांकि हिमंता बिस्वा सरमा दावा करते हैं कि अब यह बढ़कर 37 फीसदी हो गई है और आने वाले 5 सालों में 40 फीसदी को क्रॉस कर जाएगी। असम में मियां मुसलमान का मुद्दा भी बड़ा है और बीजेपी लगातार इस उठती रहती है। इससे पहले सीएम हिमंता ने कहा था कि असम में 22 सीटें हम नहीं जीत सकते क्योंकि यहां घुसपैठ के कारण मुस्लिम आबादी काफी अधिक बढ़ चुकी है और इसलिए उसपर बीजेपी चुनाव नहीं नहीं लड़ेगी। हिमंता बिस्वा सरमा ने दिसंबर में कहा था कि इसलिए हमारा टारगेट 100 सीटें पार करना है।
ध्रुवीकरण खिलाएगा कमल?
हिमंता ने 28 जनवरी 2026 को कहा था कि राज्य में बांग्लादेशी मियां रहते हैं और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ऐसे विदेशियों के खिलाफ पांच लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई हैं। शिवसागर जिले में सीएम ने यह भी कहा कि अगर हम जीना चाहते हैं तो अगले तीस सालों तक हमें ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी।
असम में मुस्लिमों के दो वर्ग
असम में मुस्लिमों के दो वर्ग हैं। पहला है असमिया मुसलमान जो असम के मूल निवासी हैं। ये असमिया भाषा बोलते हैं और यही की संस्कृति में रचे बसे हैं। वहीं दूसरा वर्ग है मियां मुसलमान जो मुख्य रूप से बंगाली भाषी हैं। इनके पूर्वज 1947 और 1971 के बाद पूर्वी बंगाल और बांग्लादेश से यहां पर आकर बसे। यह मुसलमान ब्रह्मपुत्र घाटी के निचले इलाकों में बसे हुए हैं और इनकी संख्या भी काफी अधिक है।
हालांकि संवैधानिक तौर पर मुस्लिमों का वर्गीकरण नहीं किया गया है लेकिन सामाजिक और राजनीतिक तौर पर यह दो हिस्सों में बांटा जाता रहा है। हिमंता बिस्वा सरमा दावा करते हैं कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण असम की डेमोग्राफी बदल रही है। उनके अनुसार मियां मुस्लिम लगातार घुसपैठ कर रहे हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मिटा रहे हैं। अगर हम राजनीतिक तौर पर देखें तो मियां मुस्लिमों को अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए बताए जाने का प्रयास होता रहा है। हिमंता बिस्वा सरमा कहते हैं कि असम का जो मुसलमान है, यानी असमिया मुसलमान, वह यहीं की संस्कृति में रचा बसा है, लेकिन मियां मुस्लिम उसको नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ओवैसी ने हिमंता को भिखारी कहा
हिमंता बिस्वा सरमा ने कुछ दिन पहले ही एक बयान में कहा था कि अगर आप ऑटो से जाते हैं और उसका ड्राइवर मियां मुसलमान है, तो उसे 5 रुपये की जगह 4 ही दीजिए। इसके बाद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तीखी प्रक्रिया दी। उन्होंने एक जनसभा में कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा मैं तुम्हें 2 रुपये दे रहा हूं, मुझे पता है तुम 2 रुपये के भिखारी हो… क्या मैं तुम्हारे अकाउंट में ट्रांसफर कर दूं? हालांकि ओवैसी के बयान के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने पलटवार करते हुए कहा था कि अगर ओवैसी 2 रुपये देंगे तो मैं उसे लूंगा और उसे असम में इन्वेस्ट करूंगा। लेकिन मेरा जाने में किराया बहुत लग जाएगा इसलिए वह आकर इसे दे सकते हैं।
हिमंता के खिलाफ वामपंथी दल पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
हिमंता बिस्वा सरमा की कथित हेट स्पीच के खिलाफ वामपंथी दल सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गए हैं। सीपीआई नेता एनी राजा ने याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आरोप लगाया है कि हिमंता बिस्वा सरमा पर शिकायतें दर्ज होने के बावजूद FIR नहीं दर्ज हो रही है। इस याचिका को सीजेआई सूर्यकांत के सामने तत्काल सुनवाई की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि हिमंता बिस्वा सरमा के बयान भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत हेट स्पीच और उकसावे से जुड़े अपराधों तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत चुनावी अपराध के दायरे में आते हैं।
हेट स्पीच पर क्या कहता है कानून?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत हेट स्पीच के लिए मुख्य रूप से धारा 196 (पूर्व IPC 153A) के अंतर्गत धर्म, जाति, भाषा, या निवास स्थान के आधार पर समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके तहत 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर धारा 299 (पूर्व IPC 295A) भी लागू होती है।
क्या है जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) भारत में चुनावों के संचालन, उम्मीदवारों की योग्यता/अयोग्यता, और भ्रष्ट आचरण को रोकने के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। ये कानून स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करता है। यह संसद और राज्य विधानसभाओं के लिए मतदान प्रक्रिया, राजनीतिक दलों के पंजीकरण और चुनावी विवादों के समाधान को नियंत्रित करता है।
असम में हैट्रिक लगाने की फ़िराक में बीजेपी
NDA पहली बार 2016 में असम में 86 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी। BJP को 60, सहयोगी AGP को 14, और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को 12 सीटें मिलीं थी। वहीं कांग्रेस को 26 और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को 13 सीटें मिलीं। जबकि 2021 में BJP को फिर से 60 सीटें मिली लेकिन AGP को केवल 9 सीट मिली। BPF ने सिर्फ़ चार सीटें जीतीं और बाद में अलायंस से बाहर हो गई। NDA ने 75 सीटों के साथ सरकार बनाई। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस ने 50 सीटें जीतीं थी। पढ़ें क्या असम में बीजेपी को सत्ता से बाहर कर पाएगी कांग्रेस, क्या हैं चुनौतियां?
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