असम विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही सीएम हिमंता बिस्वा सरमा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के बीच तकरार बढ़ती जा रही है। सीएम हिमंता ने गौरव गोगोई और उनकी पत्नी पर बड़े आरोप लगाए। तो वहीं गौरव गोगोई ने भी पलटवार किया। 2016 में असम में पहली बार भाजपा सत्ता में आई थी, तब मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल बने थे। 2021 में बीजेपी लगातार दूसरी बार असम की सत्ता पर काबिज हुई और कांग्रेस को एक बार फिर से हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में 2026 के विधानसभा चुनाव असम कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

बीजेपी के सीएम फेस हैं हिमंता

कांग्रेस जहां सत्ता में वापसी चाहती है तो वहीं बीजेपी हैट्रिक लगाना चाह रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुछ दिन पहले ही असम के मुख्यमंत्री हिमंता को ही अगला सीएम फेस घोषित कर दिया है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक सीएम फेस की घोषणा नहीं हुई है। इस बीच असम कांग्रेस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2014 के बाद से लगातार असम में बीजेपी का दबदबा बढ़ा है। लोकसभा चुनाव में भी उसे अच्छी सफलता मिली है।

26 मई 2025 को भूपेन कुमार बोरा की जगह गौरव गोगोई को कांग्रेस ने असम का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। गौरव गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे हैं। युवा नेतृत्व पर जोर देते हुए कांग्रेस ने उनकी नियुक्ति की थी। हालांकि अभी तक कांग्रेस जमीनी स्तर पर असम में उतनी मजबूत नहीं है।

बताया जा रहा है कि गौरव गोगोई की नियुक्ति के बाद असम कांग्रेस के कुछ नेता असंतुष्ट थे। कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट रखने के लिए ही प्रियंका गांधी वाड्रा को असम कांग्रेस राज्य स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इससे संदेश दिया गया कि भले ही गौरव गोगोई के हाथ में प्रदेश कांग्रेस की कमान है लेकिन फैसला गांधी परिवार को लूप में रखकर ही लिए जाएंगे। उनकी नियुक्ति से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा। वहीं भूपेश बघेल और डीके शिवकुमार को चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। असम कांग्रेस के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं।

गौरव गोगोई पर आरोप

हिमंता बिस्वा सरमा लगातार गौरव गोगोई पर आरोप लगा रहे हैं। वहीं उनकी पत्नी पर पाकिस्तान से सैलरी लेने का भी आरोप लगाया है। गौरव गोगोई इस मामले में अभी तक घिरते हुए नजर आए हैं। हिमंता ने 8 फरवरी 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि गौरव गोगोई ने पाकिस्तान का दौरा किया था और उन्हें वहां के गृह मंत्रालय से भी क्लीयरेंस मिला था। ऐसे में आने वाले समय में चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा काफी बड़ा बनेगा और गौरव गोगोई को इन सवालों के जवाब देने पड़ेंगे।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया कि 2013 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान गौरव गोगोई की आवाजाही से जुड़ी अनुमति पाक गृह मंत्रालय ने बदल दी थी। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान गौरव गोगोई कुछ प्रशिक्षण सत्रों में शामिल हुए हो सकते हैं और 2014 में सांसद बनने के बाद गोगोई ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कई सवाल उठाए।

सीएम हिमंता सरमा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ के बीच संबंधों की जांच जरूरी है।उन्होंने दावा किया कि अली तौकीर शेख ने 2010 से 2013 के बीच कई बार भारत का दौरा किया और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़ा रहा। हिमंता यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा कि गौरव गोगोई की पत्नी को एक पाकिस्तानी कंपनी में नौकरी दी गई और उनका वेतन भी कथित तौर पर पाकिस्तानी नागरिक द्वारा दिया जाता था।

विपक्ष को एकजुट करना

असम कांग्रेस के सामने दूसरी बड़ी समस्या यह है कि वह विपक्ष को कैसे एकजुट रख पाती है? बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी और 30 से 35 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इन सीटों पर मुस्लिम वोट 35 फीसदी से अधिक है। अगर कांग्रेस ने कोई रणनीति नहीं बनाई और गठबंधन नहीं हुआ, तो बदरुद्दीन अजमल नुकसान पहुंचा सकते हैं।

हिमंता के कद का नेता कौन?

सीएम हिमंता के कद का असम कांग्रेस के पास कोई नेता नहीं है। असम में गौरव गोगोई को अगर कांग्रेस सीएम का चेहरा बनाती है तब स्थिति अधिक साफ होगी। हिमंता की लोकप्रियता केवल असम में नहीं बल्कि उत्तर भारतीय राज्यों में भी है। वहीं पूरे नॉर्थ ईस्ट में हिमंता बीजेपी की रणनीति को देखते हैं। 2021 में हिमंता पहली बार मुख्यमंत्री बने और उसके बाद उनके नेतृत्व में असम में बीजेपी हर चुनाव न केवल जीती है, बल्कि कांग्रेस पर भारी बढ़त भी बनाई है।

घुसपैठ, नागरिकता और सांस्कृतिक पहचान का नैरेटिव कैसे तोड़ेगी कांग्रेस?

हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी की आक्रमण रणनीति का कांग्रेस कैसे जवाब देगी, इसका भी अभी तक उसके पास कोई रोडमैप नहीं है। बीजेपी लगातार घुसपैठ, नागरिकता और सांस्कृतिक पहचान का नैरेटिव असम में बना रही है और यह कांग्रेस के लिए चुनौती है। भले ही कांग्रेस को मुस्लिम बहुल सीटों (30-35) पर फायदा मिले लेकिन जिस तरह से ध्रुवीकरण हो रहा है उससे बीजेपी को हिंदू बहुल सीटों पर फायदा हो सकता है। पढ़ें असम बीजेपी के AI वीडियो पर क्या है विवाद

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