संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा (CSE 2025) के नतीजे छह मार्च को जारी हुए। इस वर्ष यूपीएससी ने कुल 958 उम्मीदवारों को सफल घोषित किया। इस परीक्षा के द्वारा IAS, IFS और IPS समेत केंद्र सरकार की ग्रुप ए और ग्रुप बी की 20 से ज्यादा सेवाओं के लिए अभ्यर्थियों का चयन किया गया।
सीएसई 2025 के नतीजे जारी होते ही सोशल मीडिया पर यह बहस चल पड़ी कि क्या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उम्मीदवारों में मीणा सरनेम वाले उम्मीदवारों की संख्या उनकी जनसंख्या के अनुपात से कई गुना ज्यादा है। मीणा सरनेम को लेकर यह बहस पहली बार नहीं चली है। पिछले कुछ सालों से सोशल मीडिया पर यह मुद्दा विभिन्न परीक्षा परिणामों के जारी होते ही चर्चा में आ जाता है।
मीणा समुदाय को लेकर चलने वाली इन चर्चाओं के बारे में आंकड़े क्या कहते हैं? इस सवाल का जवाब पाने के लिए जनसत्ता ने सीएसई के पिछले पाँच साल के नतीजों को खंगाला और यह जानने का प्रयास किया कि एसटी वर्ग के तहत चुने जाने वाले उम्मीदवारों में मीणा या मीना सरनेम वाले कितने उम्मीदवार थे। यहाँ यह स्पष्ट कर दें कि कुछ मामलों में मिलते-जुलते सरनेम वाले उम्मीदवार अन्य समुदायों के भी हो सकते हैं।
आगे बढ़ने से पहले यह जान लेते हैं कि सीएसई 2025 में चुने हुए गये उम्मीदवारों की वर्गवार संख्या क्या है। सीएसई 2025 में जनरल कैटेगरी (GC) के 317,अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 306, अनुसूचित जाति (SC) के 158, आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) के लिए 104 और अनुसूचित जनजाति (ST) के 73 उम्मीदवार सफल घोषित किये गये। इस तरह कुल 958 उम्मीदवारों का चयन हुआ।
बात अनुसूचित जनजाति वर्ग (ST) की करें तो इसमें चयनित कुल 73 उम्मीदवारों में से 27 के सरनेम मीणा/मीना हैं। यानी एसटी वर्ग के कुल उम्मीदवारों में से करीब 34.24% मीणा/मीना सरनेम वाले हैं।
अगर पिछले पांच साल का ट्रेंड देखें तो सिविल सेवा परीक्षा में एसटी वर्ग के तहत मीणा/ मीना सरनेम वालों का दबदबा रहा है। CSE 2024 में कुल 1009 उम्मीदवार सफल घोषित किए गये। इनमें एसटी वर्ग के लिए 87 सीटें आरक्षित थीं जिनमें मीणा/मीना सरनेम वाले कुल 33 उम्मीदवार सफल हुए, यानी कुल सफल एसटी प्रत्याशियों में से करीब 37.93% मीणा सरनेम वाले थे।
CSE 2023 की बात करें, तो उस वर्ष ST समुदाय के लिए 86 सीटें आरक्षित थीं। इन 86 सीटों में से 32 पर मीणा सरनेम के उम्मीदवार सफल रहे, यानी करीब 37.21% हिस्सेदारी।
CSE 2022 के नतीजों को देखें तो उस वर्ष ST समुदाय के लिए कुल 83 सीटें आरक्षित थीं, जिनमें से 38 सीटें मीणा सरनेम के उम्मीदवारों ने हासिल की थीं। प्रतिशत के हिसाब से यह आंकड़ा करीब 45.78% बैठता है।
CSE 2021 के परिणामों पर नजर डालें तो उस साल ST समुदाय के लिए 60 सीटें आरक्षित थीं। इनमें से 31 मीणा सरनेम के उम्मीदवार सफल हुए, यानी अकेले ST कैटेगरी में करीब 51.67% उम्मीदवार मीणा सरनेम वालों की थी।
पिछले पांच साल का पूरा डेटा एक साथ देखें तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है। पांच वर्षों में ST के लिए कुल 389 सीटें आरक्षित थीं। इनमें से 159 सफल उम्मीदवार मीणा/मीना सरनेम वाले रहे। यानी पिछले पाँच साल में एसटी वर्ग के तहत चयनित कुल उम्मीदवारों में से करीब 40.87% मीणा/मीना सरनेम वाले रहे।
UPSC में उपस्थिति
कुल 958 उम्मीदवार चयनित · 25 मीणा सरनेम से
34.24% ST सीटों में हिस्सेदारी (25 / 73)
ST सीटें
मीणा सफल
औसत
मीणा समुदाय के बारे में
मीणा भारत का एक प्रमुख आदिवासी समुदाय है जो मुख्यतः राजस्थान और मध्य प्रदेश में निवास करता है। 1954 में सरकार ने इसे अनुसूचित जनजाति (ST) सूची में शामिल किया। UPSC परीक्षाओं में इस समुदाय का लगातार मजबूत प्रदर्शन देखने को मिलता है।मीणा समुदाय एसटी भी, ओबीसी भी
मीणा समुदाय मूलतः राजस्थान में पाया जाता है। राजस्थान के जयपुर, अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और उदयपुर जिलों में मीणा समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। राजस्थान में मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा प्राप्त है।
मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भी मीणा समुदाय के लोग रहते हैं। एमपी के ग्वालियर, बुंदेलखंड और विदिशा क्षेत्र में विशेषकर इनकी मौजूदगी है। मध्य प्रदेश में मीणा सरनेम का इस्तेमाल करने वाले कुछ समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत आते हैं।
इन दोनों प्रदेशों के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी मीणा समुदाय के लोग पाए जाते हैं।
मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा कब मिला?
वर्ष 1950 में जब पहली बार एसटी वर्ग की सूची बनाई गई थी, तब करीब 225 समुदायों को इसमें शामिल किया गया। मीणा समुदाय को 1954 में एसटी वर्ग में शामिल किया गया।
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के अनुसार 31 दिसंबर 2022 तक भारत में 700 से ज्यादा समुदाय एसटी वर्ग के अंतर्गत अधिसूचित हो चुके हैं। 1950 के मुकाबले ST जनजातियों की संख्या में करीब 213% की बढ़ोतरी हो चुकी है।
कई समुदाय स्वयं को एसटी वर्ग में शामिल किए जाने की माँग कर रहे हैं। मसलन, राजस्थान में गुर्जर समुदाय लंबे समय से एसटी दर्जे की मांग कर रहा है। इसी तरह झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कुर्मी समुदाय भी खुद को एसटी सूची में शामिल करने की मांग उठा रहा है। वहीं महाराष्ट्र में बंजारा समुदाय भी समय-समय पर यह मांग करता रहा है।
देश की कुल एसटी आबादी में कितने प्रतिशत मीणा?
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में अनुसूचित जनजाति वर्ग की कुल आबादी 10.42 करोड़ थी। इनमें मीणा समुदाय की आबादी लगभग 50 लाख है। यानी मीणा समुदाय एसटी की कुल आबादी का करीब 4.8 प्रतिशत है। हालाँकि पिछले 5 साल में सिविल सेवी परीक्षा में मीणा/मीना सरनेम वाले करीब 40.87 प्रतिशत सेलेक्ट हुए।
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