पिछले एक दशक में स्मार्ट फोन और इंटरनेट देश की अधिकांश आबादी के हाथों में पहुंच चुका है। भारत दुनिया के अग्रणी स्मार्ट फोन उपयोगकर्ता देशों में शुमार हो चुका है, जहाँ चीन के बाद सबसे अधिक लोग (65 करोड़ से अधिक) स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं। उनके फोन में एक ऐप जो सामान्यतः मिल जाएगा वह है यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ऐप।
इस एक (यूपीआई) प्रणाली ने पैसे को भेजना और प्राप्त करना इतना आसान बना दिया है कि एक टैप में पैसे देश के किसी भी कोने में बस कुछ सेकेंड में पहुंच जाते हैं। आज यह सब कुछ आसान लगता है, लेकिन यूपीआई के शुरू होने से पहले पैसे भेजने के लिए अच्छी-खासी मशक्कत करनी पड़ती थी। बैंक-पोस्ट ऑफिस में कतारों में लगना पड़ता था, फॉर्म भर कर जमा करना पड़ता था और तब कुछ घंटों, दिन तक का इंतजार करना पड़ता था। लोगों के जीवन को आसान बनाने और इस तकनीक को विकसित करने का पूरा श्रेय भारत को जाता है। यह तकनीक भारत में विकसित की गई और यहीं से पूरी दुनिया में फैल रही है।
एक दशक पूर्व 25 अगस्त 2016 को इसे लोगों के उपयोग के लिए लॉन्च किया गया था। हालांकि, इससे पहले अप्रैल में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर डॉ. रघुराम राजन द्वारा लॉन्च किया गया था। तब से लेकर अब तक यूपीआई देश के वित्तीय लेन-देन परिदृश्य को काफी बदल चुका है। हम यहाँ इस प्रणाली, इसके विकास और इसके प्रभाव को समझने की कोशिश करेंगे।
UPI क्या है
UPI एक डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसके जरिए आप अलग-अलग बैंकों के खातों को एक ही ऐप में जोड़ सकते हैं और आसानी से भुगतान कर सकते हैं, पैसे प्राप्त कर सकते हैं। यानी आपके मोबाइल पर एक ही ऐप में कई बैंकिंग सुविधाएं एक साथ आसानी से मिल जाती हैं। और इसके लिए आपको बार-बार बैंक खाते, IFSC कोड आदी की जरूरत नहीं होती।
इस पूरी प्रणाली को रिजर्व बैंक के मार्गदर्शन में भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने विभिन्न बैंकों के सहयोग से विकसित किया था, और कई परीक्षणों के बाद 2016 में आम लोगों के लिए लॉन्च किया था। लेकिन इसके शुरुआत की कहानी इससे काफी पहले शुरू हो गई थी।
दरअसल UPI का विचार 2012 में सामने आया। उस समय कुछ बैंकर और विशेषज्ञ मिलकर एक ऐसी भुगतान व्यवस्था बनाना चाहते थे, जिससे लोग बिना मोबाइल वॉलेट के सीधे अपने बैंक खाते से डिजिटल लेन-देन कर सकें। इसका नेतृत्व किया था नंदन नीलेकणि ने। वहीं नंदन निलकेणि जो इंफोसिस के पूर्व CEO और आधार बनाने वाली संस्था UIDAI के अध्यक्ष रह चुके हैं।
बाद में केंद्र सरकार ने नीलेकणि को देश में डिजिटल भुगतान के लिए एक ढांचा तैयार करने वाली समिति के नेतृत्व की जिम्मेदारी दी। इस समिति ने दिसंबर 2013 में अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में ऐसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था बनाने की सिफारिश की गई, जो सभी लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हो और मोबाइल फोन के जरिए लेन-देन की सुविधा दे।
रिपोर्ट में एक ऐसी नई संस्था बनाने की भी सिफारिश की गई, जो इस डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विकास और संचालन की जिम्मेदारी संभाले। इसी उद्देश्य से NPCI की भूमिका महत्वपूर्ण बनी। NPCI को UPI समेत कई तरह की भुगतान प्रणालियों को विकसित और संचालित करने की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि NPCI की स्थापना 2008 में ही हो गई थी और इसने NEFT और IMPS जैसी कई भुगतान प्रणालियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
UPI के फायदे
NPCI यूपीआई के फायदों को गिनाते हुए बताता है कि इसकी मदद से चौबीसों घंटे और साल के किसी भी दिन मोबाइल फोन से किसी भी समय पैसे भेजे या प्राप्त किए जा सकते हैं। एक ही ऐप में अलग-अलग बैंकों के खातों को जोड़ा जा सकता है। इसमें भुगतान को सुरक्षित रखने के लिए दो स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पैसे भेजने या मंगाने के लिए कार्ड नंबर, बैंक खाता नंबर या IFSC जैसी जानकारी साझा करने की जरूरत नहीं है, जिससे लेन-देन अधिक सुरक्षित रहता है। QR कोड को स्कैन करके आसानी से भुगतान किया जा सकता है। इसने कैश ऑन डिलीवरी की परेशानी खत्म कर दी है और बार-बार ATM जाने की जरूरत भी खत्म कर दी है। किसी भुगतान से जुड़ी समस्या होने पर सीधे मोबाइल ऐप से ही शिकायत की जा सकती है, इसके लिए बैंक जाने की जरूरत नहीं है।
UPI आने के बाद से क्या हुआ है
इस वर्ष जून तक लगभग 55.49 करोड़ उपयोगकर्ता UPI से जुड़ चुके हैं। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में 2,365.835 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य 29,87,880.49 करोड़ रहा। जुलाई तक इस प्रणाली से 741 बैंक जुड़ चुके हैं। निगम के आंकड़ो के अनुसार यहां हर महीने दो हजार करोड़ से अधिक के लेन देने हो रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि UPI किस तरह देश के आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन में पैबस्त हो चुका है।
अन्य देश भी इसे अपना रहे हैं
इसके शुरुआत के बाद से अब तक कई देशों में UPI से जुड़ी सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। नेपाल UPI भुगतान प्रणाली अपनाने वाला पहला देश बन चुका है। सिंगापुर में UPI और PayNow को आपस में जोड़ा जा चुका है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कई जगहों पर UPI से भुगतान संभव है। इसके अलावा भूटान, श्रीलंका, मॉरीशस और फ्रांस में भी भारतीय पर्यटकों के लिए UPI सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।
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