यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा कि रूसी तेल की बिक्री पर प्रतिबंधों में अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी ढील से रूस को करीब 10 अरब डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो सकती है। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका का यह कदम यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों को सीधे तौर पर कमजोर करेगा।
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, पेरिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज़ेलेंस्की ने कहा, “अमेरिका द्वारा दी गई यह एक रियायत अकेले ही रूस को युद्ध के लिए लगभग 10 अरब डॉलर दे सकती है। इससे शांति को निश्चित रूप से कोई मदद नहीं मिलेगी।”
ज़ेलेंस्की की ये टिप्पणियां वाशिंगटन द्वारा 30 दिनों के लिए एक लाइसेंस की घोषणा के बाद आईं, जिसके तहत देशों को समुद्र में फंसे रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को खरीदने की अनुमति दी गई। अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान से जुड़े युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई तेजी को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जेलेंस्की और मैक्रों ने अमेरिकी कदम का किया विरोध
कीव की चिंताओं का समर्थन करते हुए इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि अगर रूस यह मानता है कि मध्य पूर्व संघर्ष मॉस्को पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करेगा तो वह “गलत” है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मैक्रों ने कहा, “आज रूस को लग सकता है कि ईरान में युद्ध से उसे कुछ राहत मिलेगी। यह एक गलतफहमी है।”
उन्होंने आगे कहा कि जी7 नेताओं ने इस सप्ताह की शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया था कि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण “हमें किसी भी परिस्थिति में रूस के प्रति अपनी प्रतिबंध नीति पर पुनर्विचार नहीं करना चाहिए”।
फ्रांसीसी नेता की टिप्पणियों में यूरोप में बढ़ती बेचैनी झलकती है कि अस्थायी प्रतिबंधों में ढील से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ऐसे समय में मजबूती मिल सकती है जब मध्य पूर्व संकट के कारण तेल की कीमतें पहले से ही ऊंची हैं।
अमेरिका का कहना है कि यह छूट अस्थायी है और इसका उद्देश्य बाजारों को नॉर्मल करना है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 12 मार्च तक जहाजों पर पहले से ही लोड किए गए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री के लिए 11 अप्रैल तक वैध 30 दिवसीय लाइसेंस जारी किया है। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान पर युद्ध के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद, इस अल्पकालिक कदम का उद्देश्य “वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करना” और “मौजूदा आपूर्ति की वैश्विक पहुंच बढ़ाना” था।
रॉयटर्स के अनुसार, वाशिंगटन ने कहा कि इस कदम से रूसी सरकार को कोई खास वित्तीय लाभ नहीं होगा। यह कदम 5 मार्च को जारी की गई अमेरिकी छूट के बाद उठाया गया है, जो विशेष रूप से भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद की अनुमति देने के लिए दी गई थी।
प्रतिबंधों में ढील ऐसे समय में दी जा रही है जब अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी भी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तेल के बड़े आपातकालीन भंडार को जारी करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।
पेरिस वार्ता में रूस पर दबाव बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया
2022 में रूस द्वारा किए गए पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से ज़ेलेंस्की की फ्रांस की 12वीं यात्रा का उद्देश्य रूस पर दबाव बढ़ाना था। विशेष रूप से प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए तेल परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकरों के मॉस्को के तथाकथित “छाया बेड़े” को निशाना बनाकर। पेरिस में हुई वार्ता पर इस चिंता का भी साया रहा कि मध्य पूर्व युद्ध ने कीव और मॉस्को के बीच शांति वार्ता को पुनर्जीवित करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता से किए जा रहे प्रयासों को पटरी से उतार दिया है।
एएफपी के अनुसार, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी शुक्रवार को अमेरिकी कदम की आलोचना करते हुए कहा कि “किसी भी कारण से अभी प्रतिबंधों में ढील देना गलत है”। वहीं दूसरी ओर क्रेमलिन ने कहा कि पेरिस बैठक शांति प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करेगी और तर्क दिया कि रूस पर दबाव डालने की कोशिश करना “बेतुका” है।
यूक्रेन में नया तनाव
यूक्रेन में युद्ध के लगातार तेज होने के बीच प्रतिबंधों पर बहस छिड़ी हुई है। शुक्रवार को पूर्वी यूक्रेन में कुपियांस्क के पास एक बस में सवार तीन लोगों की रूसी हमले में मौत हो गई। जहां रूसी सेना क्षेत्र पर पुनः कब्जा करने की कोशिश कर रही है।
ज़ेलेंस्की की यह यात्रा यूरोप में नए राजनीतिक तनाव के बीच हुई है। जिसमें हंगरी ने यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो के महत्वपूर्ण यूरोपीय संघ के ऋण पैकेज को रोक दिया है और साथ ही रूस पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाए गए हैं। यह विवाद आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त द्रुज़बा पाइपलाइन से जुड़ा है, जो हंगरी और स्लोवाकिया को रूसी तेल की आपूर्ति करती है और जिसके बारे में कीव का कहना है कि इस साल की शुरुआत में रूसी हमलों में इसे नुकसान पहुंचाया गया था।
वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की पृष्ठभूमि में घोषित अस्थायी अमेरिकी तेल छूट ने वाशिंगटन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच एक नई दरार पैदा कर दी है, जबकि कीव चेतावनी दे रहा है कि इससे उस युद्ध को बढ़ावा मिलने का खतरा है जिसे पश्चिम समाप्त करना चाहता है।
ओमान में ईरानी ड्रोन हमले में 2 भारतीयों की मौत, 10 घायल, विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि ओमान के सोहार शहर में हुए हमले में दो भारतीय नागरिक मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। इस घटना के बारे में बात करते हुए अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने बताया कि कुल 11 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 भारतीय शामिल हैं। घायलों में से पांच को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि शेष पांच का इलाज चल रहा है। पढ़ें पूरी खबर।
