ईरान और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता को लेकर बैठकें चल रही हैं। लेकिन वार्ता के सफल होने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक पोस्ट की वजह से विवाद बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसके प्रॉक्सी समूहों की तरफ से हमले नहीं रुके तो अमेरिका सीधे जड़ पर हमला करेगा।

Fox News के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद किया तो उसके प्रतिनिधि कभी भी अपने देश वापस नहीं जा पाएंगे। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “You won’t make it back to your F#/#/*# country.”

अमेरिका-ईरान के समझौते का क्या हुआ?

जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हुआ था। 14 सूत्रीय बिंदुओं के तहत दोनों देशों ने इस बात पर सहमति बनाई थी कि युद्ध को रोका जाएगा। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को खुला रखने पर भी सहमति बनी थी।

हालांकि, शांति समझौते के कुछ समय बाद इजरायल ने एक बार फिर लेबनान पर हमला कर दिया। इसके बाद ईरान में नाराजगी बढ़ गई और उसने फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद करने की बात कही। इसी मुद्दे को लेकर अमेरिका नाराज हो गया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को यह कड़ी चेतावनी दी है।

वैसे ट्रंप की इन चेतावनियों का असर ईरान पर नहीं पड़ा है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने दो टूक कहा है कि ईरान का कोई भी फैसला अमेरिका की धमकियों से तय नहीं होता है। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि फैसले अमेरिका नहीं लेगा बल्कि जमीन पर हो रही कार्रवाई के आधार पर लिया जाएगा।

ईरान, पाकिस्तान, कतर और अमेरिका के बीच हुई वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ट्रंप सरकार ने लेबनान में सीजफायर बनाए रखने की कोशिशों में प्रगति की है। हालांकि उन्होंने माना कि स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

जेडी वेंस ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में हमने लेबनान में सीजफायर को कायम रखने की कोशिश में प्रगति देकी है। इस तरह के सीजफायर हमेशा थोड़े अव्यवस्थित होते हैं।”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा, ट्रंप व्यापक क्षेत्रीय सीजफायर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और लेबनान सीजफायर को समझौते की दिशा में एक अहम कदम मानते हैं।

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