America China Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को अंतिम दौर की बातचीत संपन्न हुई। इस बातचीत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से कई मुद्दों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि चीन के साथ कई अहम समझौते हुए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, चीन इस बात पर सहमत हुआ है कि वह अमेरिका से 200 बड़े बोइंग विमान खरीदेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने चीन से मांग की है कि वह व्यापार में वीजा कार्ड के इस्तेमाल को मंजूरी दे। इसके अलावा, चीन बड़ी मात्रा में अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने पर भी सहमत हुआ है, जिससे अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंच सकता है।
ईरान पर चीन का क्या रुख?
ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष पर भी शी जिनपिंग ने मदद की पेशकश की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि चीन किसी भी कीमत पर नहीं चाहता कि ईरान परमाणु संपन्न देश बने। उनके अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी तरफ से मदद की पेशकश की है और वह किसी भी तरह इस संघर्ष को रोकने में सहयोग करना चाहते हैं।
ईरान और चीन के रिश्ते
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि चीन ईरान को कोई सैन्य उपकरण नहीं देगा। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ने उन्हें यह भरोसा दिलाया है। जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। लगभग 90% ईरानी तेल चीन खरीदता है। सैन्य सहयोग के मामले में भी ईरान और चीन के रिश्ते काफी मजबूत माने जाते हैं।
ट्रंप ने की जिनपिंग की तारीफ
राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान शी जिनपिंग की तारीफ भी की। उन्होंने कहा, “शी जिनपिंग सिर्फ अपने काम से मतलब रखते हैं। वह पूरी तरह बिजनेस माइंडेड हैं। अच्छा लगता है कि वहां कोई दिखावा नहीं है और किसी तरह का खेल नहीं है।” ताइवान के मुद्दे पर भी चीन और अमेरिका ने अपना-अपना स्टैंड स्पष्ट किया। शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि अगर ताइवान का मामला ठीक से संभाला गया तो अमेरिका-चीन संबंध कुल मिलाकर स्थिर रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो दोनों देशों के बीच टकराव और यहां तक कि संघर्ष का खतरा है, जिससे पूरे संबंध गंभीर संकट में पड़ जाएंगे।
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