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डेटा अनियमितता की शिकायत पर वर्ल्ड बैंक ने रोका ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट का प्रकाशन, दो साल में भारत ने लगाई थी 63 स्थान की छलांग

वर्ल्ड बैंक ने कहा है, "अक्टूबर 2017 और 2019 में प्रकाशित डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 और डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2020 के डेटा में बदलाव के संबंध में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। ये बदलाव डूइंग बिजनस के तरीके के हिसाब से ठीक नहीं थे।"

भारत ने इन दो वर्षों में अपनी रैंकिंग में 63 स्थान की छलांग लगाई है। (Reuters)

साल 2018 और 2020 की ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट के डेटा में अनियमितता के बाद वर्ल्ड बैंक ने रिपोर्ट के प्रकाशन पर रोक लगा दी है। यह फैसला पिछली कुछ रिपोर्ट की डेटा के बदलाव में हुई अनियमितताओं के बाद लिया गया है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है, “अक्टूबर 2017 और 2019 में प्रकाशित ‘डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018’ और ‘डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2020’ के डेटा में बदलाव के संबंध में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। ये बदलाव डूइंग बिजनेस के तरीके के हिसाब से ठीक नहीं थे।”

भारत ने इन दो वर्षों में अपनी रैंकिंग में काफी सुधार किया है, इसलिए अटकलें हैं कि वर्ल्ड बैंक के इस फैसले के बाद भारत की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है। भारत ने 2018 में 30 स्थानों की छलांग लगाई थी। इसी तरह साल 2020 में भारत 14 स्थान की छलांग लगाते हुए 63वें स्थान पर पहुंच गया था। 190 देशों की लिस्ट में भारत पिछले साल (2019 में) 77 वें स्थान पर था। मोदी सरकार की इच्छा है कि भारत को टॉप 50 देशों की लिस्ट में जगह मिले, जो अभी बाकी है।

हालांकि, विश्व बैंक ने कहा, “हम एक व्यवस्थित समीक्षा और मूल्यांकन कर रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित देश अज़रबैजान, चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात प्रतीत होते हैं।” वर्ल्ड बैंक ने कहा है, “हम उन देशों के डेटा को पूर्वव्यापी रूप से सही करेंगे जो डेटा अनियमितताओं से सबसे अधिक प्रभावित हुए थे।”

190 देशों की लिस्ट में भारत साल 2015 में 142वें स्थान पर था जो 2016 में सुधरकर 131वें, 2017 में 130वें, 2018 में 100वें, 2019 में 77वें पर आ गया। साल 2020 की रिपोर्ट में भारत 63वें स्थान पर आ गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का डेटा पारदर्शी और वास्तविक प्रदर्शन (परफॉर्मेन्स) पर आधारित है।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भारत की रैंकिंग प्रभावित होने के संदेहों को खारिज करते हुए कहा कि भारत में व्यापार का माहौल लगातार सुधर रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वर्ल्ड बैंक के इंडेक्स को सुधारने के लिए नहीं बल्कि देश में व्यापार को आसान और सरल बनाने के लिए जरूरी है।

2012 से 2016 तक वर्ल्ड बैंक के चीफ इकॉनोमिस्ट रहे कौशिक बसु ने कहा कि मेथॉडोलॉजिकल चेंजेज की वजह से भारत की रैंकिंग सुधरी है। हालांकि, बसु ने 2018 में प्रकाशित अपने एक लेख में कहा था कि 2014 से 2015 के बीच भारत का स्थान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भले ही 12 स्थान की छलांग दिखाई गई हो लेकिन उन्होंने और उनकी टीम ने इसमें चार स्थान की ही बढ़ोत्तरी कैलकुलेट की थी। उन्होंने कहा कि ऐसा मेथॉडोलॉजी चेंजेज की वजह से हुआ था।

वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि आंकड़ों में हुए बदलाव के लिए अब एक सिस्टमैटिक रिव्यू और एसेसमेंट किया जाएगा और इंस्टीट्यूशनल डाटा रिव्यू प्रोसेस के बाद पिछले 5 इज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट के आंकड़ों की समीक्षा की जाएगी। वर्ल्ड बैंक के बयान में कहा गया है, “व्यापार संकेतक और कार्यप्रणाली को किसी एक देश को ध्यान में रखते हुए तैयार नहीं किया गया है, बल्कि समग्र व्यापार माहौल को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है।”

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