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वर्ल्‍ड बैंक ने पाकिस्‍तान को दिया झटका, भारत को मिली हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी प्‍लांट बनाने की इजाजत

यह मांग की गई थी कि 57 वर्ष पुराने जल वितरण समझौते के तहत दोनों देशों के बीच मध्यस्थ विश्व बैंक इन चिंताओं के समाधान के लिए एक मध्यस्थता अदालत का गठन करे।

Author August 2, 2017 8:45 PM
बता दें कि दोनों संयंत्रों के तकनीकी डिजाइन संधि के प्रतिकूल है या नहीं, इस बात को लेकर दोनों देश असहमत हैं। (Photo : PTI)

विश्व बैंक ने कहा है कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत भारत को झेलम और चेनाब नदियों की सहायक नदियों पर कुछ शर्तों के साथ पनबिजली विद्युत संयंत्रों के निर्माण की अनुमति दे दी गयी है। आईडब्ल्यूटी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की बातचीत खत्म होने पर कल जारी एक फैक्ट शीट में कहा गया है कि पाकिस्तान किशनगंगा (330 मेगावॉट) और रातले (850 मेगावॉट) पनबिजली विद्युत संयंत्रों के निर्माण का विरोध कर रहा है। इन संयंत्रों का निर्माण भारत कर रहा है।

गौरतलब है कि दोनों संयंत्रों के तकनीकी डिजाइन संधि के प्रतिकूल है या नहीं, इस बात को लेकर दोनों देश असहमत हैं। इस संदर्भ में आईडब्ल्यूटी ने इन दोनों नदियों और सिंधु को पश्चिमी नदियां घोषित किया है, जिसका पाकिस्तान असीमित इस्तेमाल कर सकता है।

फैक्ट शीट में विश्व बैंक ने कहा है, ‘‘अन्य इस्तेमालों के साथ-साथ भारत संधि के अनुलग्नक में शामिल शर्तों को ध्यान में रखते हुए इन नदियों पर पनबिजली विद्युत संयंत्र का निर्माण कर सकता है।’’ बैंक ने कहा कि आईडब्ल्यूटी के तकनीकी मुद्दों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव-स्तरीय बातचीत सद्भावना और सहयोग के माहौल में हुई।

इससे पहले विश्व बैंक ने 25 जुलाई को पत्र लिखकर अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरना को आश्वासन दिया था कि वह इस मामले में अपनी तटस्थता और निष्पक्षता को बरकरार रखेगा, ताकि सुलह का रास्ता खोजा जा सके। इससे पहले दोनों देशों ने पाकिस्तान में स्थायी सिंधु आयोग (पीआईसी) की बैठक के दौरान इस वर्ष मार्च में दो परियोजनाओं पर वार्ता की थी। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में स्थित दो पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए पिछले साल विश्व बैंक का रुख किया था।

यह मांग की गई थी कि 57 वर्ष पुराने जल वितरण समझौते के तहत दोनों देशों के बीच मध्यस्थ विश्व बैंक इन चिंताओं के समाधान के लिए एक मध्यस्थता अदालत का गठन करे। दूसरी ओर, भारत ने कहा था कि पाकिस्तान ने जो चिंताएं व्यक्त की हैं, वे तकनीकी हैं और इस मामले की जांच के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त किया जाना चाहिए।

इसके बाद विश्व बैंक ने नवंबर 2016 में परियोजनाओं के संबंध में दोनों देशों के बीच तकनीकी मतभेदों के समाधान के लिए तटस्थ विशेषज्ञ नियुक्त करने और मध्यस्थता अदालत के गठन की दो प्रक्रियाएं साथ में शुरू की थीं। भारत के आपत्ति जताने के बाद एक साथ चल रहीं दोनों प्रक्रियाएं बाधित हो गई थीं। इसके बाद, विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने समाधान तलाशने के लिए भारत और पाकिस्तान से अलग-अलग वार्ता की थी।

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