पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की अगुवाई में दोनों पक्षों के बीच शांति को लेकर बातचीत हो रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों पक्ष जल्द ही शांति की राह अपनाएंगे और युद्ध समाप्त होगा। ऐसे में इस बारे में भी बात होनी चाहिए कि आखिर शांति वार्ता के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को ही क्यों चुना गया?

जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान के साथ युद्ध शुरू किया तब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसके पक्ष में नहीं थे। ऐसे में ईरान ने मांग की कि वह शांति वार्ता के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से बात करना ज्यादा पसंद करेंगे। इस कारण ईरानी शासन की इच्छा पूरी करने के लिए जेडी वेंस को वार्ता का नेतृत्व करने के लिए चुना गया।

ईरान के नेतृत्व ने किया स्वीकार

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के नेतृत्व के एक वर्ग ने जेडी वेंस को वार्ता के लिए स्वीकार किया और उनमें से कई ने गुपचुप तरीके से बातचीत का हिस्सा बनाने की कोशिश की।

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान में जेडी वेंस को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी लोगों में सबसे अधिक युद्ध-विरोधी चेहरों में से एक माना जाता है और इसी वजह से ईरानी शासन का मानना है कि ट्रंप के प्रतिनिधियों में से बातचीत करने के लिए जेडी वेंस सबसे संभावित चेहरे हैं।

इस्लामाबाद में हो रही बैठक

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास से इस्लामाबाद में मुलाकात कर रहे हैं। यह मुलाकात 1979 के बाद अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली हाई लेवल की मीटिंग है, इस बैठक में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी मौजूद रहेंगे।

क्यों ज्यादा अहम हैं अमेरिका के उपराष्ट्रपति?

जेडी वेंस का राजनीतिक प्रभाव इस तरह की वार्ताओं के लिए अहम है। हालांकि शांति के संभावित मध्यस्थ के रूप में उनकी छवि के कारण उनका शामिल होना अधिक महत्वपूर्ण है। जबकि विटकॉफ और कुशनर के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि युद्ध से पहले ईरान इन्हीं दो नेताओं से बातचीत कर रहा था। इस कारण दोनों नेताओं पर ईरान पहले की तरह भरोसा नहीं करता और वार्ता विफल होने का इन्हें ही जिम्मेदार मानता है। ईरान का मानना है कि उन्होंने कूटनीतिक वार्ता के बजाय सैन्य संघर्ष को चुना।

जेडी वेंस के बारे में कहा जाता है कि उन्हें युद्ध की रणनीति बनाने में कम और उसे समाप्त करने में अधिक रुचि है। ईरान उन्हें अधिक तर्कसंगत वार्ताकार के रूप में देख रहा है क्योंकि सैन्य टकराव बढ़ने के बाद वे युद्ध के पक्ष में नहीं दिख रहे थे।

न्यूयार्क टाइम्स के मुताबिक, उपराष्ट्रपति अपने ही प्रशासन के सबसे मुखर आलोचक बन गए जिसके वह खुद हिस्सा हैं।

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद पहली बार एक भारतीय टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर भारत आ रहा है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) टैंकर जग विक्रम ने शुक्रवार रात और शनिवार सुबह के बीच होर्मुज को पार किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें