डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका वापस लौटे हुए अभी एक सप्ताह भी नहीं हुए हैं कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के दौरे पर मंगलवार रात पहुंच गए हैं। उनका यह दौरा दो दिन यानी 19 और 20 मई तक है। बीजिंग एयरपोर्ट पहुंचने पर रूसी राष्ट्रपति का चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने खुद गर्मजोशी से स्वागत किया।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके समकक्ष पुतिन ने बुधवार को यहां द्विपक्षीय संबंधों और ईरान, यूक्रेन जंग तथा व्यापार समेत प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की।
14 मई को था ट्रंप का दौरा
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 14-15 मई को चीन के दौरे थे। इस दौरे के दौरान ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ ईरान और यूक्रेन युद्ध से लेकर द्विपक्षीय व्यापारिक विवादों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों तक, विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की थी।
शी जिनपिंग ने बातचीत से पहले पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। मंगलवार को अपनी यात्रा से पहले दिए गए एक वीडियो संबोधन में पुतिन ने कहा कि रूस-चीन संबंध एक अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गए हैं।
पुतिन की 25वीं चीन यात्रा
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “यह चीन की पुतिन की 25वीं यात्रा है। दोनों पक्ष इस यात्रा को चीन-रूस संबंधों के विकास को एक उच्च स्तर तक आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में लेंगे, जिससे दुनिया में अधिक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।”
पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की नाकेबंदी और अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर कब्जे के बाद पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर वैश्विक चिंताएँ बढ़ गई हैं। ईरान, रूस और चीन दोनों का ही एक करीबी रणनीतिक साझेदार बना हुआ है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, चीन ईरान से 90 प्रतिशत तेल आयात करता है।
चीन और रूस का व्यापार 200 अरब अमेरिकी डॉलर
अपने संबोधन में पुतिन ने बताया कि रूस और चीन के बीच व्यापार 200 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है और अब लेन-देन मुख्य रूप से रूसी करेंसी (रूबल) और चीनी करेंसी (युआन) में किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि रूस-चीन की रणनीतिक साझेदारी ने वैश्विक स्तर पर स्थिरता लाने में एक अहम भूमिका निभाई है।
ट्रंप के जाते ही चीन क्यों पहुंचे पुतिन?
डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग से जाते ही पुतिन का चीन दौरा वैश्विक राजनीति में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इस हाई-प्रोफाइल बैक-टू-बैक दौरे के पीछे दोनों देशों के अपने-अपने गहरे राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक हित हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि चीन अमेरिका को यह संदेश दे रहा है कि हम किसी के दबाव में नहीं हैं।
इधर चीनी विदेश नीति के जानकारों के मुताबिक, शी जिनपिंग ने लगातार दो बड़े देशों के राष्ट्रपतियों की मेजबानी करके दुनिया को अपनी ताकत दिखाई है। चीन यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि अमेरिका सिर्फ उन देशों में से एक है जिससे वह बात करता है। अमेरिका चीन को अलग-थलग या आर्थिक रूप से कमजोर या मजबूर नहीं कर सकता क्योंकि चीन के पास रूस जैसे अन्य मजबूत और रणनीतिक साझेदार हैं।
रूस की अर्थव्यवस्था चीन पर निर्भर
इधर रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंच जाने और यूरोपीय देशों के कड़े प्रतिबंधों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक चीन पर निर्भर हो चुकी है। रूस को अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए चीन को रियायती दरों पर तेल और गैस बेचना जारी रखना है। इधर, ईरान-अमेरिका तनाव के कारण जो ऊर्जा संकट खड़ा हुआ है, उसमें रूस चीन के लिए एक सुरक्षित सप्लायर बनना चाहता है। साथ ही रूस को युद्ध को घरेलू उद्योगों को चालू रखने के लिए चीन से डुअल यूज टेक्नोलॉजी जैसे ड्रोन कंपोनेंट्स और माइक्रोचिप की सख्त जरूरत है।
इसके अलावा, पुतिन यह भी सुनिश्चित करने आए हैं कि ट्रंप के साथ किसी भी संभावित डील के कारण चीन उनके हितों को दरकिनार न करे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप से दौरे के दौरान बातचीत में पुतिन का जिक्र भी किया था। ऐसे में पुतिन सीधे चीनी राष्ट्रपति से मिलकर उस बातचीत का सीधा फीडबैक लेना चाहते थे। साथ ही इस दौरे का एक औपचारिक उद्देश्य 2001 की ‘चीन-रूस मित्रता संधि’ की 25वीं वर्षगांठ मनाना भी है। दोनों देशों के नेता एक ऐसे बहुध्रुवीय दुनिया बनाना चाहते हैं जहां अकेले अमेरिका की सिक्का न चले।
यह भी पढ़ें: ट्रंप के बाद अब पुतिन का चीन दौरा, चीनी मीडिया बोला- अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा महज औपचारिकता थी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 15 मई को अपने चीन दौरे से वापस लौट चुके हैं, अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के दौरे पर बीजिंग पहुंचेंगे। रूस और चीन ने इसकी पुष्टि कर दी है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति 19 और 20 मई के बीच चीनी दौरे पर रहेंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्लादिमीर पुतिन को निमंत्रण भेजा था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
